'उत्तराखंड में शक्ति परीक्षण पर विचार करे केंद्र'

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा है कि उत्तराखंड के मामले पर वो विधानसभा में शक्ति परीक्षण के बारे में विचार करे.

इस समय उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू है.

सुप्रीम कोर्ट ने अटार्नी जनरल से पूछा है कि कोर्ट की निगरानी में शक्ति परीक्षण क्यों नहीं हो सकता?

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य में राष्ट्रपति शासन को रद्द कर दिया गया था. जिसके बाद केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया.

अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है और कोर्ट ने फ़िलहाल हाई कोर्ट के फ़ैसले पर रोक लगा रखी है.

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उत्तराखंड में सियासी संकट की शुरुआत 18 मार्च को हुई. इस दिन कांग्रेस के 36 विधायकों में से नौ बागी हो गए और वित्त विधेयक पर मतदान के समय भारतीय जनता पार्टी के विधायकों के साथ नज़र आए.

इसी दिन कांग्रेस के बागी विधायकों और भारतीय जनता पार्टी के 27 विधायकों ने राज्यपाल केके पॉल से मुलाक़ात की और हरीश रावत सरकार को भंग करने की मांग की.

राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को 28 मार्च तक विधानसभा में बहुमत साबित करने को कहा.

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लेकिन विधानसभा में शक्ति परीक्षण के ठीक एक दिन पहले राज्य में राष्ट्पति शासन लागू कर दिया गया. इसी दिन उत्तराखंड के स्पीकर ने कांग्रेस के नौ बागी विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया.

हरीश रावत ने राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के फैसले को नैनीताल हाई कोर्ट में चुनौती दी.

हाई कोर्ट ने राज्य में राष्ट्रपति शासन को हटाते हुए हरीश रावत सरकार को बहाल कर दिया था और उन्हें 29 अप्रैल को विधानसभा में बहुमत साबित करने को कहा था. लेकिन केंद्र ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी.

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