माशाल्लाह भारत माता की जय

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    • Author, ज़ुबैर अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

बचपन में मेरे एक दूर के मामा ने मेरे गाल पर ज़ोरदार तमाचा लगाया, क्योंकि मैं अपने कमरे में अकेले 'जन गण मन अधिनायक जय हे' गा रहा था.

तमाचा लगाते समय वो डांट कर बोले, "अबे, हिंदू हो गया है क्या?" मेरा मामा कोई मुल्ला नहीं थे लेकिन उनकी सोच मुल्लों वाली थी.

असदउद्दीन ओवैसी की बातों से मुझे अपने दूर के मामा की याद आ जाती है. भारत माता की जय कहने से इनकार करना उनका अधिकार ज़रूर है लेकिन केवल इसीलिए इसका विरोध करना कि मोहन भागवत ने इसकी सलाह दी है, सही नहीं है.

मुसलमानों के बड़े तबके में भारत माता की जय या वन्दे मातरम् को हिंदू धर्म से जोड़कर देखा जाता है.

जावेद अख्तर ने उनकी इस बात पर जो खिंचाई की है, वो मुझे बिलकुल सही लगती है. भारत माता की जय कहने से कोई हिंदू हो जाएगा क्या?

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अभी मैं कश्मीर से लौटा हूँ जहाँ हर कश्मीरी हिंदू का, वहां के मुसलमानों की ही तरह, तकिया कलाम है, "माशाल्लाह, इंशाल्लाह". तो क्या वो मुसलमानहो गए?

वो गर्व से हिंदू की तरह रह रहे हैं. इसी तरह से मैं पिछले साल पाकिस्तान से पनाह लेने आये दिल्ली में कई हिन्दुओं से मिला था. उनके नाम अगर आपको नहीं मालूम तो उनकी भाषा से आप उन्हें मुसलमानसमझ बैठेंगे.

भारत माता की जय के नारे सैनिक हर बड़े काम के दौरान लगाते हैं. इन सैनिकों में मुसलमानऔर दूसरे मज़हब के लोग भी होते हैं. तो क्या उनका धर्म भ्रष्ट हो गया?

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ये बात और है कि मोहन भागवत की सलाह अपने-आप फिज़ूल है. देशप्रेमी और देश-भक्ति का ठेका लेना उनकी आदत-सी बन चुकी है. मैं उनसे पूछना चाहता हूँ क्या कोई भारत माता की जय कहने से सच्चा देश प्रेमी हो जाएगा?

आज बीजेपी और आरएसएस के खेमों में मैं कई ऐसे भारतीयों को जानता हूँ जो अमरीका या यूरोपी देशों के पासपोर्ट वाले हैं. हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब ब्रिटेन के दौरे पर गए थे तो भारतीय मूल के हज़ारों ब्रिटिश नागरिक भारतीय झंडे लहराते सड़कों पर घूम रहे थे.

जहाँ तक मुझे याद है वो मोदी की जय- जयकार करने के साथ साथ ‘भारत माता की जय’ के नारे भी लगा रहे थे लेकिन तकनीकी तौर पर वे भारतीय नहीं थे, यानी हिंदू-मुसलमान होने या दूसरे देश का पासपोर्ट होल्डर होने से अंतर नहीं पड़ता, अंतर इस बात से पड़ता है कि आप दिल से भारतीय हैं, या नहीं.

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भारत माता की जय कहने से न किसी का धर्म बदल जाता है और न ये देश भक्ति की असल पहचान है. दिल से अगर भारतीय हो तो भारत माता की जय कहो या न कहो कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता.

इसी तरह से दिल से अगर मुसलमानया ईसाई हो तो भारत माता की जय कहने से धर्म परिवर्तन नहीं हो जाता.

मैं मुसलमान हूँ और कहता हूँ ‘भारत माता की जय’ लेकिन मैं अपने दिल से कहता हूँ, किसी के कहने पर नहीं, अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए नहीं.

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