डेविड हेडली को भारत से इतनी नफ़रत क्यों है?

हेडली

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    • Author, ज़ुबैर अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

पाकिस्तानी-अमरीकी नागरिक डेविड कोलमैन हेडली उर्फ़ सैयद दाऊद गिलानी की भारत से बेइंतहा नफ़रत को देखते हुए ही उसे मुंबई हमलों में ख़ास भूमिका दी गई थी.

ऐसा दावा हेडली ने ख़ुद 16 मई 2011 को शिकागो की एक अदालत के सामने किया था.

हाफिज सईद

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उसके शब्दों में भारत से उसकी घृणा का मुख्य कारण था 1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े होने में भारत की भूमिका. इस जंग में भारतीय बमबारी से लाहौर में उसके स्कूल की इमारत की तबाही ने भी भारत के ख़िलाफ़ उसकी नफ़रत को बढ़ाया था.

इसीलिए "मिशन मुंबई" के लिए उसका चुनाव केवल एक संयोग नहीं था.

मुंबई

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ऊंचे क़द का हेडली जितना देखने में दबंग था उतना ही बोलने में भी. वो पाकिस्तानी भी था और अमरीकी भी.

वो अंग्रेज़ी जितने फर्राटे से बोल सकता था उतनी ही रवानगी से उर्दू भी बोल सकता था. वो पश्चिमी देशों की सभ्यता में जितनी आसानी से घुल मिल सकता था उतना ही इस्लामी सभ्यता में.

उस जैसी शख़्सियत वाला व्यक्ति अब तक लश्कर-ए-तैयबा में शामिल नहीं हुआ था.

मुंबई

हेडली 2000 में लश्कर-ए-तैयबा की तरफ आकर्षित हुआ और दो साल बाद इसमें शामिल हो गया.

लेकिन उसके साथ एक समस्या थी. वो हमलावर चरमपंथी बनने के योग्य नहीं था. साल 2005/2006 में मुंबई हमले की योजना के समय वो 44 वर्ष का हो चुका था. एक घातक हमले के लिए उसकी उम्र ढल चुकी थी. उसकी सेवाओं को लगभग अस्वीकार कर दिया गया.

लखवी

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लेकिन हेडली ने शिकागो की अदालत में बयान देते हुए कहा था कि उसकी ज़िद पर लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जकीउर रहमान लखवी के नेतृत्व में एक साल तक शारीरिक प्रशिक्षण दिया गया.

मानसिक और आध्यात्मिक रूप से तैयार करने के लिए उसे कैंप में एक साल और गुज़ारना पड़ा. दो साल बाद वो किसी बड़े हमले में शामिल होने के लिए पूरी तरह से योग्य हो चुका था.

मुंबई

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उसी समय लश्कर के संस्थापक हाफ़िज़ सईद और लखवी मुम्बई हमलों की योजना बना रहे थे. हेडली को केवल इतना बताया गया कि उसे किसी बड़े मिशन के लिए चुना गया है. उस समय उसने डेविड कोलमैन हेडली के नाम से पासपोर्ट बनवाया.

भारत से अपनी सख़्त नफ़रत के बावजूद वो सात बार मुंबई आया और शहर में उसने कई दोस्त बनाए.

उनमें से एक थे बॉलीवुड डायरेक्टर महेश भट्ट के बेटे राहुल भट्ट. पहली बार दोनों एक जिम में मिले थे. राहुल भट्ट ने इस पर एक किताब भी लिखी है.

उन्होंने एक बार हेडली के बारे में चर्चा करते हुए मुझसे कहा कि दोनों के बीच इस्लाम पर काफ़ी बहस होती थी.

महेश भट्ट

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मुंबई में अगर आप विदेशी हैं और अमरीकी एक्सेंट में अंग्रेज़ी बोलते हैं तो अमीर लोगों की पार्टियों के दरवाज़े आपके लिए आसानी से खुल जाते हैं. हेडली के साथ भी ऐसा ही हुआ.

वो वहां एक अमरीकी "डूड" की तरह रहता था. एक फ़र्ज़ी ट्रेवल एजेंसी चलाता था और खूब पार्टियां करता था. बॉलीवुड की कई साइड हीरोइनों से उसकी दोस्ती भी थी. कुछ को तो राहुल ने ही उससे मिलाया था.

मुंबई

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मुंबई की रंगीन शाम में शामिल हेडली अपनी इस्लामी सभ्यता को भूल सा गया था, या फिर ये सब केवल एक दिखावा था?

मुंबई में केवल पार्टियां करने वाला हेडली शहर के ख़ास इलाक़ों और होटलों की तस्वीरें और वीडियो भी बना रहा था. उसके अनुसार उसने सभी वीडियो और तस्वीरों को लश्कर के हवाले कर दिया.

इन्हीं की मदद से ये तय किया गया कि हमले किन जगहों पर किए जाएंगे.

हेडली

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शिकागो की अदालत की तरह उसने सोमवार को मुंबई की एक अदालत के समक्ष वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए गवाही देते हुए कहा कि मुंबई पर हमले की दो कोशिशें नाकाम रहीं.

दोनों बार हमला कर रही टीमों में 26/11 की तरह 10-10 लोग शामिल थे.

लेकिन क्या हेडली "हाई लाइफ़" का एक पुजारी था या एक मज़हबी कट्टरवादी? क्या वो एक कायर था या एक कठोर चरमपंथी?

शायद वो दो शख़्सियतों का मालिक था जिसे अंग्रेज़ी में स्प्लिट पर्सनालिटी कहते हैं. मुंबई हमलों के बाद भी एक और हमले की योजना बनाने के लिए भारत वापस लौटना दिलेरी का काम था.

शिकागो

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लेकिन उसके ख़िलाफ़ मुक़दमे पर रिपोर्टिंग करने वाले अमरीकी पत्रकारों के अनुसार, शिकागो में 2009 में अपनी गिरफ़्तारी के बाद मौत की सजा से बचने और मोरक्को की अपनी जवान (दूसरी) बीवी को जेल जाने से रोकने के लिए सरकारी गवाह बनने के लिए तैयार होना उसकी कायरता थी.

पाकिस्तानी पिता और अमरीकी माँ की औलाद हेडली अमरीका में एक समय रंगीन ज़िन्दगी गुज़ार चुका था जिसके दौरान ड्रग्स की तस्करी के लिए उसे जेल भी हुई थी.

लेकिन पाकिस्तान में और खास तौर से लश्कर में शामिल होने के बाद उसने एक कट्टरवादी मुस्लिम का रूप धारण कर लिया था.

मुंबई हमला पीड़ित

इन दिनों वो अमेरिका में 35 साल की जेल की सजा काट रहा है. कुछ सालों में दुनिया उसे भूल जाएगी.

लेकिन मुंबई हमलों में मारे गए 160 लोगों के परिवार वाले शायद उसे कभी न भूल सकेंगे और जैसा कि मुंबई में एक घायल ने मुझसे 2009 में कहा था कि हेडली और उसके साथियों को "हम कभी माफ़ नहीं करेंगे."

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