सारंगी के सौ रंग...
- Author, प्रीति मान
- पदनाम, फ़ोटो पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
सारंगी नवाज़ मुराद अली ख़ान देश के चुनिंदा बेहतरीन सारंगी वादकों में से एक हैं. वो मुरादाबाद घराने के मुरादाबाद सारंगिया सिद्दक़ी अहमद ख़ान के पोते व ग़ुलाम साबिर ख़ान के बेटे हैं.
मुराद के जुड़वा भाई फ़तेह अली ख़ान युवा सितार वादक हैं, पर मुराद ने अपनी ख़ानदानी विरासत को आगे ले जाने का फ़ैसला लिया.
मुराद अली अपने घराने की छठवीं पीढ़ी का नेतृत्व कर रहे हैं. हालांकि सारंगी एक मुश्किल वाद्य है, जिसे अंगुली के नाख़ून के पोरों से बजाया जाता है.
पुराने समय में सारंगी घुम्मकड़ जातियों का वाद्य यंत्र था. इसे सारिंदा व पिनाकनी वीणा भी कहते हैं. सारंगी के कई रूप हैं जैसे थार, सिंधी, गुजराती आदि.
मुराद के अब तक कई सोलो और नॉन सोलो एल्बम आ चुके हैं. 1992 में उन्हें ऑल इंडिया रेडियो नेशनल म्यूजिक कॉम्पिटिशन में प्रथम स्थान मिला था.
उन्होंने 'ऑल इंडिया रेडियो' के ए ग्रेड आर्टिस्ट हैं. मुराद 'ख़ामोश पानी', 'लगे रहो मुन्ना भाई', 'लागा चुनरी में दाग' 'खोया खोया चाँद' जैसी फ़िल्मों में भी अपनी सारंगी के सुर बिखेर चुके हैं.
वो 'सारंगी रत्न अवार्ड', 'उस्ताद बिस्मिल्लाह खां पुरस्कार', संगीत नाटक अकादमी का 'युवा रत्न पुरस्कार' व डॉ अब्दुल कलाम द्वारा 'संस्कृति अवार्ड' समेत कई पुरस्कारों से नवाज़े जा चुके हैं.


इमेज स्रोत, PREETI MANN







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