'प्रमोशन में आरक्षण अटल ने किया शुरू, मायावती ने ख़त्म'

भाजपा सांसद और दलित नेता उदित राज ने बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती पर जवाबी हमला करते हुए कहा है कि दलितों को पदोन्नति में आरक्षण उनके शासन में खत्म किया गया था.
बसपा अध्यक्ष मायावती ने सोमवार राज्यसभा में अपने भाषण में दलितों और जनजातीय समुदाय के लोगों को सरकारी व निजी क्षेत्रों में पदोन्नति में आरक्षण देने की मांग की थी.
मायावती ने आर्थिक रूप से कमज़ोर सवर्णों को भी आरक्षण देने की मांग की. बसपा अध्यक्ष ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को संविधान पर हुई चर्चा के अंत में काफी बातें कहीं. बेहतर होता अगर उन्होंने अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए पदोन्नति में आरक्षण, निजी क्षेत्र में आरक्षण, सवर्णों में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए आरक्षण जैसी अच्छी योजनाओं का ऐलान किया होता.”

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मायावती के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उदित राज ने बीबीसी से कहा कि सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में आरक्षण तो अटल सरकार ने ही शुरू किया था, जबकि इसे ख़त्म मायावती के शासन में किया गया है.
उन्होंने कहा कि लगभग सभी दल निजी क्षेत्र में आरक्षण की हिमायत कर रहे हैं. अनुसूचित जाति जनजाति परिसंघ 7 दिसंबर को दिल्ली में निजी क्षेत्र और पदोन्नति में आरक्षण की मांग के लिए एक रैली का आयोजन कर रहा है.
उन्होंने कहा कि जहां तक इस मुद्दे पर पार्टी के रुख़ का सवाल है तो वे इस बारे में कुछ नहीं कह सकते, क्योंकि ये नीति से संबंधित है.

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उन्होंने माना कि आरक्षण के मुद्दे ने बिहार चुनावों के नतीजों को निश्चित तौर पर प्रभावित किया. उन्होंने कहा कि 2004 के आम चुनावों में भी आरक्षण बड़ा मुद्दा बना था और चुनाव नतीजों में भी ये दिखा, ये अलग बात है कि तब लोगों को ये समझ में नहीं आया था.
उन्होंने कहा, “पिछले कुछ दिनों में गुजरात से जिस तरह से हार्दिक पटेल ने पटेलों को आरक्षण दिलाने के लिए आवाज़ बुलंद की, फिर बिहार में भी आरक्षण पर चर्चा हुई, उसका असर रहा.”
भाजपा सांसद ने कहा, “मेरा मानना है कि कांग्रेस की नीतियों का असर अब दिखने लगा है. ठेकेदारी प्रथा को लेकर दलितों में भारी छटपटाहट है.”
(बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से बातचीत पर आधारित)
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