बंगलुरु साहित्योत्सव के संस्थापक का इस्तीफ़ा

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
असहनशीलता पर चल रही बहस का असर अब बंगलुरु के साहित्योत्सव पर भी दिख रहा है.
इस आयोजन के संस्थापक-निदेशक और इतिहासकार विक्रम संपत ने खुद को इस आयोजन से अलग कर लिया है.
कन्नड़ के एक लेखक और कवि के मुताबिक, "अवार्ड वापसी" अभियान और टीपू सुल्तान पर संपत के विचारों के चलते उन्होंने खुद को इस आयोजन से अलग किया है.
बंगलुरू साहित्योत्सव 5 और 6 दिसंबर को होना है.

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बंगलुरू साहित्योत्सव यानी बीएलएफ की वेबसाइट पर पोस्ट किए गए एक बयान में संपत ने कहा, "ये समारोह और इसके आदर्श मुझसे या किसी भी व्यक्ति से कहीं बड़े हैं. अगर मेरी वजह से अलग अलग विचारों को सुना ही ना जाए तो ये शर्मनाक होगा. "
संपत ने कहा, "जिस संस्था की स्थापना और पोषण मैंने किया और जिसे अब मेरे निजी विचारों से जोड़कर निशाना बनाया जा रहा है, उस संस्था के हित में मैंने इस समारोह को आयोजित करने की सभी ज़िम्मेदारियों से खुद को अलग रखने का पीड़ादायक फैसला किया है."
कन्नड़ लेखक और कवि आरिफ़ राजा ने इस समारोह से खुद को ये कहते हुए अलग कर लिया था कि संपत उन लेखकों और कलाकारों के खिलाफ थे जिन्होंने साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा दिए और अकादमी की संस्थाओं से इस्तीफा दे दिया.
उन्होंने ये भी कहा कि टीपू सुल्तान के विरोध में एक याचिका पर जिन इतिहासकारों ने दस्तखत किए थे उनमें संपत भी शामिल थे.

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18वीं सदी के शासक टीपू सुल्तान की वर्षगांठ मनाने के कर्नाटक सरकार के फैसले पर इसी महीने की शुरुआत में काफी विवाद खड़ा हो गया था.
बहरहाल, संपत का कहना है कि टीपू सुल्तान का ज़िक्र करते वक्त "भारतीय इतिहास लेखन में विविध नज़रियों और विचारों को जगह देने की आवश्यकता है."
इस समारोह के सलाहकार रवि चंदर ने बीबीसी को बताया, "बंगलुरु साहित्योत्सव हमेशा निष्पक्ष रहा है. ये दुखद बात है कि इसे व्यक्तिगत स्तर पर लिया जा रहा है. संपत के अलग हो जाने के बाद, हम एक बार फिर सभी लेखकों को आमंत्रित करते हैं कि वो इस समारोह में हिस्सा लें और अपने विचार रखें."
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