‘इसी हिंदू उन्माद के चलते पाकिस्तान बना था’

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- Author, अशोक कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
भारत में असहिष्णुता को लेकर जारी बहस और फिल्मकारों और साहित्यकारों की तरफ़ से पुरस्कार लौटाने की चर्चा पाकिस्तानी उर्दू मीडिया में ख़ूब हो रही है.
‘जंग’ के संपादकीय का शीर्षक है ‘भारत अपनी दिशा ठीक करे’ जिसके मुताबिक़ नरेंद्र मोदी सरकार के आशीर्वाद से कट्टरपंथी हिंदू संगठनों ने मुसलमानों और धार्मिक रूप से अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ नफ़रत और ख़ून ख़राबे की मुहिम चला रखी है.
अख़बार कहता है कि इन हालात के विरोध में भारत के 24 बड़े फिल्मकारों ने अपने राष्ट्रीय पुस्कार लौटाकर एक नई मिसाल क़ायम की है और भारत सरकार को अपनी दिशा दुरुस्त करने की राह दिखाई है.
मणिपुर में गुरुवार को गाय चोरी के आरोप में एक मदरसे के अध्यापक की हत्या का ज़िक्र करते हुए अख़बार कहता है कि ऐसी घटना भारत के अलग-अलग हिस्सों में लगातार हो रही हैं.


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अख़बार कहता है कि यहां तक कि बॉलीवुड स्टार शाहरुख़ ख़ान को भी पाकिस्तान चले जाने की धमकियां मिल रही हैं.
वहीं ‘वक्त’ लिखता है कि एक नहीं, दो नहीं, बल्कि अब तो 100 से ज़्यादा बुद्धिजीवी, साहित्यकार और फिल्मकार अपने पुरस्कार लौटा चुके हैं.
अख़बार के मुताबिक़ सब जानते हैं कि भारत इस वक़्त उन ताक़तों के हाथ में हैं जो देश को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहती हैं और इसी एजेंडे पर आगे बढ़ते हुए मुसलमान ही नहीं, बल्कि धार्मिक रूप से अन्य अल्पसंख्यकों का जीना भी दूभर किए हुए हैं.
‘नवा-ए-वक़्त’ लिखता है कि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की है कि वो भारत में बढ़ते हुए कट्टरपंथ, मुसलमानों समेत अन्य अल्पसंख्यकों पर हो रहे ज़ुल्मों और शिवसेना जैसी पार्टियों की दहशतगर्द कार्रवाइयों पर ध्यान दे.

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अख़बार कहता है कि एक तरफ़ तो मोदी सरकार कश्मीर को पूरी तरह हड़पने की नीति पर काम रही है तो दूसरी तरफ़ देश के भीतर मुसलमान, सिख और ईसाइयों समेत किसी भी अल्पसंख्यक समुदाय को चैन से नहीं बैठने दिया जा रहा है.
अख़बार लिखता है कि हिंदुओं के इसी उन्माद ने भारत में दो राष्ट्रों वाले उस नज़रिए को फिर से ज़िंदा कर दिया है जिसके आधार पर पाकिस्तान बना था, ऐसे में कई लोग भारत के और अधिक टुकड़े होने का अनुमान भी लगाने लगे हैं.
रोज़नामा ‘दुनिया’ ने लाहौर में एक फैक्ट्री की बहुमंज़िला इमारत गिरने और उसमें 23 लोगों की मौत पर संपादकीय लिखा है.
अख़बार लिखता है कि ये घटना हादसा कम और असंवेदनशीलता और अक्षमता का मामला ज़्यादा नज़र आती है क्योंकि जब हालिया भूकंप के बाद इमारत में दरारें आ चुकी थीं तो मालिकों ने ये जायज़ा क्यों नहीं लिया कि इमरात कितनी मज़बूत है.

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अख़बार के मुताबिक़ ज़रूरत इस बात कि है कि इस मामले की पूरी जांच की जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो.
इसके अलावा ‘जसारत’ और ‘एक्सप्रेस’ जैसे अख़बारों ने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टेस्ट सीरिज़ 2-0 से जीतने पर पाकिस्तान क्रिकेट टीम को बधाई दी है.
‘जसारत’ कहता है कि लंबे अरसे बाद पाकिस्तान को यह कामयाबी मिली है और वो टेस्ट रैंकिंग में दूसरे नंबर पर आ गया है.
‘एक्सप्रेस’ कहता है कि इंग्लैंड दुनिया की मज़बूत टेस्ट टीमों में शुमार है, इसलिए उसे हराना गर्व की बात है. उम्मीद है कि पाकिस्तानी खिलाड़ी आगे भी कामयाबी के झंडे गाड़ते रहेंगे.
रुख़ भारत का करें तो ‘एतेमाद’ का कहना है कि ऐसा लगता है कि भारत में असहिष्णुता एक गंभीर समस्या बन गई है.

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‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी’ पर सवाल उठाते हुए अख़बार कहता है कि वो देश की जनता को भरोसा दिलाऩे की बजाय असहिष्णुता को बढ़ावा देते ही नज़र आ रहे हैं.
अख़बार कहता है कि जब शाहरुख़ ख़ान ने पिछले दिनों कहा कि असहिष्णुता सबसे बड़ा जुर्म है तो भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि शाहरुख़ का मन तो हमेशा पाकिस्तान में रहता है.
इस सिलसिले में अख़बार ने भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ का भी ज़िक्र किया है जिन्होंने कहा था कि शाहरुख़ ख़ान हाफ़िज़ सईद की भाषा बोल रहे हैं.
वहीं नेपाल के रिश्तों में आए तनाव पर रोज़नामा ‘ख़बरें’ का संपादीय है- एक और पड़ोसी नाराज.

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नेपाल में लागू नए संविधान पर भारत की आपत्तियों से पैदा इस तनाव पर अख़बार लिखता है कि प्रधानमंत्री मोदी जब बिहार में एक चुनावी रैली में दहाड़ रहे थे तो नेपाल सीमा पर भारतीय मूल के लोगों के प्रदर्शन पर नेपाली पुलिस की फायरिंग में एक भारतीय की मौत हो गई.
अख़बार कहता है कि भारत और नेपाल के बीच बढ़ती खाई का फ़ौरी फ़ायदा चीन को हुआ है.
अख़बार की राय है कि भारत को नेपाल के साथ संबंध सुधारने के लिए क़दम उठाने होंगे, वरना चीन अपने दोस्त पाकिस्तान के साथ साथ अब नेपाल को भी अपना बना कर भारत के ख़िलाफ़ मोर्चा बना सकता है.
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