गुजरात: महज चार साल में हिंदू स्टडीज का कोर्स 'बंद होने के कगार' पर क्यों पहुंचा

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इमेज कैप्शन, महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी में हिंदू स्टडीज कोर्स में स्टूडेंट्स का ज़्यादा उत्साह देखने को नहीं मिल रहा है
    • Author, अपूर्व अमीन
    • पदनाम, बीबीसी गुजराती
  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

वडोदरा के महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी (एमएस यूनिवर्सिटी) में चार साल पहले शुरू हुआ हिंदू स्टडीज का कोर्स विवादों में घिर गया है.

कोर्स के संचालन के लिए व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं और आरोप हैं कि प्रोफ़ेसरों को पिछले छह महीनों से वेतन नहीं मिल रहा है.

हालांकि, एमएस यूनिवर्सिटी की आर्ट्स फ़ैकल्टी की डीन कल्पना गवली ने बीबीसी गुजराती को बताया कि प्रोफ़ेसरों के वेतन जैसे मुद्दे हाल ही में 'सुलझा दिए गए' हैं.

इस कोर्स का कई बार प्रचार किया गया. लेकिन कई प्रयासों के बावजूद इस कोर्स में स्टूडेंट्स की कमी ने एमएस यूनिवर्सिटी की आर्ट्स फ़ैकल्टी को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है.

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नई शिक्षा नीति के तहत एमएस यूनिवर्सिटी में 2022-23 में हिंदू स्टडीज का कोर्स शुरू किया गया था.

हालांकि, इस कोर्स में अध्ययनरत स्टूडेंट्स की घटती संख्या के कारण इसके अस्तित्व पर ही सवाल उठ रहे हैं.

यह कोर्स विवाद में कैसे आया?

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इमेज कैप्शन, महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी में चल रहा हिंदू स्टडीज कोर्स कई अव्यवस्थाओं का शिकार है

हाल ही में इस कोर्स में पढ़ रहे छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया. उनका कहना था कि अगर कोर्स अचानक बंद हो जायेगा तो उनकी पढ़ाई बीच में ही अटक सकती है.

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छात्रों की शिकायत है कि यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने ये नहीं देखा कि इस कोर्स की कितनी जरूरत है. साथ ही सही तरह से नहीं चलाने की वजह से यह कोर्स महज चार वर्षों में बंद होने के कगार पर पहुंच गया है.

अब तो इस कोर्स की स्थिति यह है कि इसमें कुल मिलाकर एक दर्जन छात्र भी नहीं बचे हैं.

एमएस यूनिवर्सिटी में हिंदू स्टडीज की सेकेंड ईयर की छात्रा मुस्कान गिरि कहती हैं, " पहले साल इसमें आठ स्टूडेंट्स ने एडमिशन लिया था. मैंने तो साइकोलॉजी को छोड़ कर इस हिंदू स्टडीज कोर्स में एडमिशन लिया था."

स्टूडेंट्स अपने भविष्य को लेकर बहुत चिंतित हैं. उन्हें डर है कि यह कोर्स बंद कर दिया जाएगा.

उनके अनुसार, कोर्स तो शुरू किया गया, लेकिन इसे चलाने के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं है.

एक छात्रा महक कहती हैं, "जब हमने एडमिशन लिया था, तब 25 स्टूड़ेंट्स थे. इस कोर्स के शुरू होने के बाद यह दूसरा बैच था. समय के साथ स्टूडेंट्स की संख्या घटने का कारण कोर्स का सही तरीके से प्रबंधन नहीं होना है.''

हिंदू स्टडीज का कोर्स कर रहीं छात्रा कला जोशीपुरा कहती हैं, "इस कोर्स में प्रवेश की प्रक्रिया आसान नहीं है. वेबसाइट बार-बार हैंग हो जाती है."

मुस्कान गिरि कहती हैं, '' इस तरह के कोर्स को शुरू करने के बाद इस पर ध्यान भी देना चाहिए. जब मैं पहले साल में थी, तो मुझे लगा था कि मैं इस कोर्स से बहुत कुछ सीखूंगी,".

एमएस यूनिवर्सिटी के छात्र वीरेंद्रसिंह चौहान कहते हैं, "अगर हिंदू संस्कृति का यह कोर्स बंद होने की ओर बढ़ रहा है तो यह मैनेजमेंट के लिए शर्म की बात है."

वीरेंद्र सिंह कहते हैं, "अगर फ़्रेंच, जर्मन और रूसी भाषा के कोर्स बहुत अच्छे से चल रहे हैं, तो फिर सिर्फ़ हिंदू स्टडीज का कोर्स चलाने में समस्या क्यों है?''

उनका कहना है कि इसे एचपीपी (हायर पेमेंट प्रोग्राम) के तहत होने के बजाय नियमित कोर्स में शामिल किया जाना चाहिए और इसकी फीस भी कम की जानी चाहिए.

हिंदू स्टडीज में क्या पढ़ाया जाता है?

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इमेज कैप्शन, हिंदू स्टडीज कोर्स में रामायण, महाभारत, पुराण, भगवद गीता, भक्ति आंदोलन, शैववाद, वैष्णववाद पढ़ाया जाता है

केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति के तहत, वडोदरा स्थित एमएस यूनिवर्सिटी के आर्ट्स डिपार्टमेंट में हिंदू स्टडीज में बीए ऑनर्स कोर्स शुरू किया गया है.

एमएस यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार , यह एक हायर पेमेंट प्रोग्राम है.

कक्षा 12 तक की पढ़ाई कर चुके किसी भी स्ट्रीम के स्टूडेंट्स इसके लिए आवेदन कर सकते हैं.

प्रवेश पूरी तरह से योग्यता के आधार पर दिया जाता है.

वेबसाइट के मुताबिक़, इस कोर्स के लिए फॉर्म और एंट्रेस एग्ज़ाम की फ़ीस 300 रुपये है, जब कि पहले, दूसरे और तीसरे वर्ष के लिए वार्षिक फ़ीस 14,000 रुपये है.

तीन साल का ये ग्रेजुएट प्रोग्राम कुल छह सेमेस्टर में विभाजित है, जिसमें हिंदू तत्व-विमर्श, हिंदू दर्शन, योग शास्त्र, प्रमाण सिद्धांत, उपनिषद और वेदों का परिचय जैसे विषय शामिल हैं.

एमएस यूनिवर्सिटी की वेबसाइट के मुताबिक़, इसके पाठ्यक्रम में रामायण, महाभारत, पुराण, भगवद गीता, भक्ति आंदोलन के साथ-साथ शैववाद, वैष्णववाद और शक्ति जैसे विषय शामिल हैं.

पाठ्यक्रम में हिंदू मनोविज्ञान, आयुर्वेद, अर्थशास्त्र (राजनीति), नाट्यशास्त्र, काव्यशास्त्र, वास्तुशास्त्र और वास्तुकला जैसे विषय भी शामिल हैं.

हालांकि यह कोर्स विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से सुझाए गए सिलेबस पर आधारित है. इसमें इंटर्नशिप प्रोग्राम भी शामिल है.

'बुनियादी सुविधाएं भी नहीं'

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इमेज कैप्शन, स्टूडेंट्स का कहना है कि हिन्दू स्टडीज कोर्स की पढ़ाई के लिए यूनिवर्सिटी में कमरे भी आवंटित नहीं हैं

स्टूडेंट्स का दावा है कि यूनिवर्सिटी ने इस कोर्स के लिए उन्हें सही क्लासरूम भी आवंटित नहीं किया है. इस वजह से उन्हें अपनी पढ़ाई के लिए यूनिवर्सिटी में जगह-जगह भटकना पड़ता है.

मुस्कान कहती हैं, "मैनेजमेंट ने इस कोर्स को बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है. हमें लेक्चर अटेंड करने के लिए वडोदरा संस्कृत महाविद्यालय जाना पड़ता है. स्थिति इतनी खराब हो गई है कि कई बार छात्रों को खुले में या बगीचों में पेड़ों के नीचे घास में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है. इतना ही नहीं, यहां पढ़ाने वाले टीचर्स के लिए कोई अलग स्टाफरूम भी नहीं है."

कला जोशीपुरा कहती हैं, ''हिंदू स्टडीज के पास कोई स्टाफ़ रूम नहीं है.''

हमने इस मामले में बीबीसी गुजराती ने एमएस विश्वविद्यालय के आर्ट्स फैकल्टी की डीन कल्पना गवली से संपर्क किया.

उन्होंने कहा, "एमएस यूनिवर्सिटी में वर्ष 2022-23 में हिंदू स्टडीज प्रोग्राम शुरू हुआ था. समय के साथ इसमें प्रवेश लेने वाले स्टूडेंट्स की संख्या में कमी आई है और संख्या बनाए रखने में भी कठिनाई हो रही है."

छात्रों की संख्या के बारे में गवली ने बीबीसी गुजराती को बताया, "चूंकि यह एक हायर पेमेंट प्रोग्राम है, इसलिए इस कोर्स में स्टूडेंट्स की संख्या को लेकर कुछ कठिनाई रही है. जब यह कार्यक्रम 2022 में शुरू हुआ था, तब इनकी संख्या 30 थी, जो अब घटकर 10 रह गई है."

गवली कहती हैं, "इस साल मैं फिर से कोशिश करूंगी कि इस कोर्स में ज़्यादा से ज़्यादा स्टूडेंट्स को दाखिला मिले. यह केंद्र उच्च शुल्क वाला केंद्र है, जिसे तीन साल तक चलाया जाना है, और इसमें स्टूडेंट्स की संख्या कम होने जैसी समस्याएं हैं. हम इस कोर्स का व्यापक प्रचार करेंगे ताकि स्टूडेंट्स की संख्या बढ़े. शिक्षकों को समय पर वेतन मिलने की व्यवस्था जल्द ही की जाएगी."

प्लेसमेंट की कितनी संभावना?

एमएस विश्वविद्यालय में कला संकाय की डीन कल्पना गवली

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इमेज कैप्शन, एमएस विश्वविद्यालय में कला संकाय की डीन कल्पना गवली का कहना है कि शिक्षकों को समय पर वेतन देने की व्यवस्था की जा रही है

गवली ने कहा, "यह कोर्स में छात्रों को टेम्पल मैनेजमेंट के क्षेत्र में नौकरी पाने में मदद कर सकता है. स्टूडेट्स संस्कृत कॉलेजों और गुरुकुलों में भी नौकरी पा सकते हैं."

उन्होंने कहा, "हमने इंटर्नशिप के लिए छात्रों को बड़ौदा के गुरुकुल में भी भेजा है."

हालांकि स्टूडेंट्स ने इस कोर्स के प्रोफेसरों को समय पर वेतन न मिलने का भी मुद्दा उठाया है.

छात्रा महक का कहना है, "प्रोफ़ेसरों को तो समय पर वेतन भी नहीं मिल रहा है."

वो कहती हैं, "पिछले साल इस कोर्स में दो प्रोफ़ेसर सात विषय पढ़ा रहे थे. इस साल चार प्रोफेसर हैं, लेकिन उन्हें छह महीने से वेतन नहीं मिला है. अगर उन्हें वेतन नहीं मिला तो यह कोर्स कब तक चलेगा? यह वाकई शर्मनाक है."

कला जोशीपुरा कहती हैं, "वेतन न मिलने के कारण शिक्षक परेशानी में हैं. जब यह कोर्स बंद होने के कगार पर है, तो इसके कारणों की जांच होनी चाहिए."

जब बीबीसी ने इस मामले में डीन कल्पना गवली से पूछा तो उन्होंने कहा, "शिक्षकों के वेतन की समस्या को हमने फिलहाल के लिए हल कर लिया है."

बीबीसी ने इस कोर्स को पढ़ाने वाले प्रोफ़ेसरों से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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