एसआईआर की प्रक्रिया से घबराए घुमंतू जनजातियों के ये लोग- ग्राउंड रिपोर्ट
एसआईआर की प्रक्रिया से घबराए घुमंतू जनजातियों के ये लोग- ग्राउंड रिपोर्ट
भारत की विमुक्त और घुमंतू जनजातियों के लिए पहचान पत्र केवल कागज़ नहीं है, बल्कि उनके अस्तित्व का प्रमाण है.
ये प्रमाण इन्हें दशकों के संघर्ष के बाद मिला है.
कई लोग तो ऐसे भी हैं, जिन्हें साल 2010 में वोटर आईडी मिला.
अब जब चुनाव आयोग नौ राज्यों में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) की प्रक्रिया करा रहा है, तो ऐसे में इन समुदाय के लोगों में डर है कि अगर वो साल 2002 से पहले के रिकॉर्ड नहीं दिखा सके, तो उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं रहेगा.
इन लोगों का एसआईआर को लेकर और क्या कहना है? इस रिपोर्ट में जानिए.
रिपोर्ट: रॉक्सी गागडेकर छारा
शूट, एडिट: पवन जायसवाल
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.



