चैंडी ने मोदी को पढ़ाया क़ानून का पाठ

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
मुख्यमंत्री ओमन चैंडी ने केरल हाउस पर दिल्ली पुलिस के प्रवेश को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ख़त में नियमों की लंबी लिस्ट भेजी है.
सोमवार को कट्टरपंथी संगठन हिंदू सेना के कार्यकर्ता दिल्ली पुलिस के साथ केरल हाउस की केंटीन में दाखिल हुए थे. उनका मकसद मेन्यू में 'बीफ़' होने की शिकायत की जांच करना था.
गुरुवार को चैंडी ने प्रधानमंत्री को एक चिट्ठी भेजी है जिसमें उन्होंने दिल्ली पुलिस के दाख़िले को घृणित और क़ानून के ख़िलाफ़ बताया. साथ ही चैंडी के पूरे ख़त में एक के बाद एक क़ानूनी पहलूओं का ज़िक्र है.
कानून का पाठ

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ख़त में लिखा है कि दिल्ली कृषि पशु सरंक्षण कानून, 1994 की धारा 11 में परिसर में प्रवेश करने, छानबीन करने और ऐसे मवेशी इस धारा के तहत जिन्हें मारा जाना प्रतिबंधित है, उनका अवैध मांस ज़ब्त करने संबंधी प्रावधान हैं.
कानून की धारा 11(1) के अनुसार परिसर में प्रवेश करने, छानबीन करने और कृषि पशु के संदिग्ध मांस वाले परिसर को ज़ब्त करने का अधिकार सिर्फञ वेटरनेरी अधिकारी को है और इससे पहले उन्हें लिखित में नोटिस देना होगा.
आगे कहा गया है कि धारा 11(4) के अनुसार पुलिस अधिकारी को किसी भी ऐसे वाहन को रोकने, उसमें प्रवेश करने और उसकी छानबीन करने का अधिकार है जिसका इस्तेमाल कृषि पशु को लाने-ले जाने के लिएकिया गया है या ऐसा करने का इरादा है.
पुलिस का अधिकार कृषि पशु को काटने, बेचने, खरीदने या निपटाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले वाहन तक सीमित है. पुलिस अधिकारी के अधिकार वाहन की छानबीन तक सीमित हैं, परिसर की नहीं.
सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए ख़त में कहा गया है कि संविधान पीठ ने पंजाब राज्य बनाम बलदेव सिंह मामले में कहा था कि किसी अक्षम अधिकारी का जब़्त किया गया सामान वाजिब अभियोग का आधार नहीं बन सकता.

यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि दिल्ली के पुलिसकर्मी बिना किसी नटिस के केरल हाउस में प्रतिबंधित मांस की छानबीन करने के लिए घुस गए, जो राज्य का दिल्ली में कार्यालय है. यह कार्यालय एक रेज़ीडेंट कमिश्नर के अधीन है जो प्रिंसिपल सेक्रेट्री स्तर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं.
दिल्ली पुलिस की यह हरकत दिल्ली कृषि पशु सरंक्षण कानून, 1994 के ख़िलाफ़ हैं. इसके साथ ही केरल हाउस में दिल्ली पुलिस का अनावश्यक प्रवेश भादस की धारा 186 और 353 के तहत दंडनीय अपराध है.
ये केरल के मुख्यमंत्री को इस मामले में भेजा गया दूसरा ख़त है.
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