सिख जत्थेदारों ने अपना ही फैसला बदला

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- Author, रविंदर सिंह रॉबिन
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
एक हैरतअंगेज़ फ़ैसला लेते हुए सिख जत्थेदारों ने शुक्रवार को अपने ही हुक्मनामे को ख़ारिज कर दिया. ये हुक्मनामा अकाल तख़्त से 24 सितंबर को जारी किया गया था.
इसके तहत डेरा सच्चा सौदा के विवादित प्रमुख गुरमीत राम रहीम को माफ़ कर दिया गया था.
ज़ाहिर तौर पर ये फ़ैसला पूरी दुनिया में सिख समुदाय में जल्दबाज़ी में लिए गए उनके पहले फ़ैसले की कड़ी निंदा के मद्देनज़र किया गया है.
शुक्रवार को सिख जत्थेदारों की अकाल तख़्त सचिवालय में एक आपात बैठक हुई जिसमें पहले लिए गए फ़ैसले को पलटने का फ़ैसला लिया गया.
इसका मतलब ये है कि सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख को सिख जत्थेदारों की माफ़ी नहीं मिली है. सिखों ने सामाजिक तौर पर इनका बहिष्कार किया हुआ था.
क्या था मामला
डेरा प्रमुख से बग़ैर माफ़ीनामा के उन्हें माफ़ करने पर सिख जत्थेदारों की कड़ी आलोचना हुई थी.

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साल 2007 में जब गुरमीत राम रहीम ने सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह का वेश धारण किया था तो पूरे पंजाब में ये विवाद जंगल की आग की तरह फैल गया था.
तब अकाल तख़्त ने उनका बहिष्कार करने का आदेश दिया था.
लेकिन इसी वर्ष 24 सितंबर को तख़्त ने विवादित डेरा प्रमुख की 'माफ़ी' को मंज़ूर कर लिया था. लेकिन शुक्रवार को उसी माफ़ी को ख़ारिज कर दिया गया.
पूरी दुनिया के सिखों ने सिख जत्थेदारों के इस फ़ैसले पर तीव्र प्रतिक्रिया की थी और कहा था कि पूरे मामले से चुपचाप निपटा गया और पंथ को इस बारे में विश्वास में नहीं लिया गया.
कुछ सिख संस्थाओं ने इस माफ़ी का विरोध भी किया.
पंजाब में इस मुद्दे पर रोष उभर आया जिससे तख़्त को अपना फ़ैसला पलटना पड़ा.
मामले को सुलझाने के लिए जत्थेदार ज्ञानी गुरबचनसिंह ने एक बैठक बुलाई और उसके बाद इस मुद्दे पर सिख बुद्धिजीवियों के सुझाव मांगे और एक समिति की घोषणा भी की.
इस दौरान धर्मगुरुओं ने ये फ़ैसला पलट दिया.
बदले हुए फैसले का स्वागत

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जत्थेदार गुरबचन सिंह ने कहा कि इस विषय पर गंभीर चर्चा और घटनाओं का अध्ययन करने के बाद वे इस नतीजे पर पहुंचे कि गुरु पंथ हुक्मनामे को स्वीकार नहीं करता और उसे अब ख़ारिज किया जाता है.
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के प्रमुख मंजीत सिंह ने इस फ़ैसले का स्वागत किया और कहा कि उन्होंने पहले हुक्मनामे को भी मान लिया था लेकिन वे अकाल तख़्त के नए फ़ैसले का स्वागत करते हैं.
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति की सदस्य बीबी किरणजोत कौर ने पहले खुले तौर पर डेरा प्रमुख को माफ़ करने के फ़ैसले की आलोचना की थी. अब उन्होंने कहा कि आज का फ़ैसला "सिख पंथ की जीत है."
अमरीकी गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के समन्वयक डॉक्टर प्रीतपाल सिंह ने भी कहा कि ये सिख समुदाय की जीत है क्योंकि धर्मगुरु समुदाय के हितों के ख़िलाफ़ अपने फ़ैसले को थोप नहीं सकते.
शिरोमणि अकाली दल दिल्ली के प्रमुख परमजीत सिंह सरना ने कहा कि जत्थेदारों ने पहले एक फ़ैसला लेकर फिर बाद में उसे पलट कर अकाल तख़्त की छवि को कमज़ोर किया है. उन्होंने कहा कि इसके राजनीतिक कारण भी हो सकते हैं.
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