दो और लेखकों ने साहित्य अकादमी से नाता तोड़ा

के. सच्चिदानंदन

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भारत में सांप्रदायिक हिंसा की हालिया घटनाओं पर अपना विरोध जताते हुए मलयामल और अँग्रेज़ी भाषा के कवि के. सच्चिदानंदन ने साहित्य अकादमी से नाता तोड़ लिया है.

सच्चिदानंदन साहित्य अकादमी की विभिन्न समितियों के सदस्य थे जिनसे उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया है.

इसी तरह जानी-मानी उपन्यासकार सारा जोसेफ़ ने भी अपना साहित्य अकादमी सम्मान केंद्र सरकार को लौटाने का फैसला किया है.

शशि देशपांडे

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इन दोनों लेखकों से पहले जानी-मानी उपन्यासकार शशि देशपांडे ने साहित्य अकादमी की गवर्निंग काउंसिल से इस्तीफ़ा दे दिया था.

उन्हें शिकायत थी कि 'अकादमी ने कन्नड़ विद्वान डॉक्टर एमएम कलबुर्गी के निधन पर खेद तक ज़ाहिर नहीं किया.'

अशोक वाजपेयी

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हिंदी कवि और आलोचक अशोक वाजपेयी ने दादरी में बीफ़ की अफ़वाह को लेकर हुई हिंसा और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं की हत्याओं से जुड़ी घटनाओं पर 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी' पर सवाल उठाया था.

अशोक वाजपेयी का कहना था कि उन्होंने 'जीवन और अभिव्यक्ति, दोनों की स्वतंत्रता के अधिकार पर हो रहे हमलों को देखते हुए' पुरस्कार लौटाने का फैसला किया.

नयनतारा सहगल

मशहूर लेखिका नयनतारा सहगल ने भी अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने का फ़ैसला किया था.

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की भांजी नयनतारा ने एक बयान जारी करके कहा था, "सरकार, भारत की सांस्कृतिक विविधता की हिफ़ाज़त करने में नाकाम रही है. इस वजह से मैंने ये सम्मान लौटाने का फ़ैसला किया है."

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