शशि देशपांडे ने साहित्य अकादमी से नाता तोड़ा

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरू से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
जानी मानी उपन्यासकार शशि देशपांडे ने साहित्य अकादमी की गवर्निंग काउंसिल से इस्तीफ़ा दे दिया है.
उन्होंने कहा कि 'अकादमी ने कन्नड़ विद्वान डॉक्टर एमएम कलबुर्गी के निधन पर खेद तक ज़ाहिर नहीं किया.'
शशि देशपांडे ने साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉक्टर विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को भेजे पत्र में लिखा है, ''यदि अकादमी जो देश का प्रमुख साहित्यिक संस्थान है, एक लेखक के ख़िलाफ़ हिंसा की इस तरह की घटना पर खड़ी नहीं हो सकती, यदि अकादमी इस तरह के हमले पर चुप रहती है, तब हम अपने देश में बढ़ती असहिष्णुता से लड़ने की क्या उम्मीद करें?''

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देशपांडे ने बीबीसी को बताया, ''मैंने उनसे कुछ नहीं कहा, इंतज़ार किया. मैंने सोचा अभिव्यक्ति की आज़ादी पर वो कुछ कहें, असहमति के अधिकार पर कुछ कहेंगे. एक लेखक और साहित्यिक संस्थान के लिए ये महत्वपूर्ण मुद्दे हैं. मैं मूर्ख हो सकती हूं क्योंकि ये संस्थान अपने ही नियमों से काम करते हैं. मुझे नहीं लगता कि मैं वहां रहकर कुछ कर रही हूं.''
भारत सरकार ने शशि देशपांडे को वर्ष 2009 में पद्मश्री पुरस्कार से नवाज़ा था. उससे पहले वर्ष 1990 में 'दैट लॉँग साइलेंस' के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया था.
बीते कुछ समय में तीन लेखक उदय प्रकाश, नयनतारा सहगल और अशोक वाजपेयी अपने साहित्य अकादमी सम्मान वापस कर चुके हैं.
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