'हिंदुओं को कटघरे में खड़े करना बंद हो'

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विश्व हिंदू परिषद के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन का कहना है कि गाेहत्या या इसकी आड़ में हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ करना, दोनों क़ानून का अपमान है.
उन्होंने कहा कि हम राष्ट्रपति के सहनशीलता वाले बयान का स्वागत करते हैं. सहनशीलता हिंदू धर्म का मुख्य लक्षण है. पूरी दुनिया जानती है कि गाय के प्रति हिंदू समाज किस तरह की भावना रखता है.
जैन ने कहा कि राष्ट्रपति जब कहते हैं तो सबके लिए कहते हैं, जिसमें वे भी शामिल हैं जो बीफ़ को लेकर हिंदू समाज का मज़ाक उड़ाते हैं.
जम्मू-कश्मीर के जिस विधायक ने गोमांस कहकर वहां के हिंदुओं को चिढ़ाया, उसकी सहनशीलता कोई मतलब नहीं रखती.

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जैन से बात की बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद ने. इस बातचीत के चुनिंदा हिस्से.
क्या कहते हैं सुरेंद्र जैन: बातचीत के अंश
क़ानून का मज़ाक
जब क़ानून के रखवाले ख़ुद क़ानून का मज़ाक उड़ाने लगें तो क्रिमिनल प्रोसीज़र कोड साफ़ शब्दों में आम नागरिक को यह अधिकार देता है कि कहीं किसी लड़की से बलात्कार हो रहा है और पुलिस कहीं और देख रही हैं, तो वे उसे रोकें.
मैं समझता हूं कि यही बात यहां लागू होती है. यहाँ भी क़ानून का उल्लंघन हो रहा है.

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गाेहत्या होना या इसकी आड़ में हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ करना, दोनों क़ानून का अपमान है.
क़ानून के रखवाले जब क़ानून तोड़ने वालों के साथ खड़े होंगे तो मैं समझता हूँ कि यह प्रतिक्रिया स्वाभाविक है. भारत का क़ानून यह अधिकार देता है (क़ानून को अपने हाथ में लेना).
केवल राजनीति
दादरी कांड के बाद चंद लोगों के बयान के आधार पर या अपने पुरस्कार वापस लौटा देने के आधार पर कोई राय बना लेना सही नहीं है.
उनसे ये पूछा जाना चाहिए जब दिल्ली में सिखों का क़त्ल हो रहा था, आपने क्यों नहीं पुरस्कार वापस किए.

यह लोग केवल राजनीति कर रहे हैं. दादरी की जो दुर्घटना हुई, वो दुर्भाग्यपूर्ण है. वह नहीं होनी चाहिए थी.
लेकिन क्यों इस तरह की परिस्थितियां बनीं? वहां जिस तरह की परिस्थितियां बन गई हैं, उसमें मामूली अफवाह भी कैसा रूप धारण कर लेती है.
मैं समझता हूँ कि वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के बाद अमरीका में जो हुआ उसके बाद तो पश्चिम को यह प्रश्न उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है.
ज़िम्मेदारी बनती है उस सेक्युलर जगत की जो इस तरह का वातावरण बनते हुए चुपचाप देख रहे थे.
सहनशीलता की परीक्षा
अब कोई जान-बूझकर यह कहे कि मैं गाय काट रहा हूँ कोई मेरा कुछ करके देख ले, कोई जानबूझ कर यह कहे कि मैं बीफ फेस्टिवल मना रहा हूँ मेरा कोई कुछ करके देख ले, मैं समझता हूँ कि यह हिंदुओं की सहनशीलता की परीक्षा ली जा रही है.
सहनशीलता का मतलब कायरता नहीं होता. सहनशीलता बनी रहे, इसके लिए हिंदुओं को कठघरे में न खड़ा किया जाए.
हिंदू जिस दिन अल्पसंख्यक हो गया, यह गुण भी ग़ायब हो जाएगा. मुस्लिम बहुल देशों में जाकर आप देख लें. आज़ाद भारत में 500 से अधिक मंदिर तोड़े गए हिंदू चुप रहे.

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गाय कटती है हिंदू चुप रहे, उसकी बेटियां लव जिहाद के नाम पर उठाई जाती हैं हिंदू चुप रहे.
मुझे लगता है बहुत हो गया यह ढोंग. अब हिंदुओं को सहनशीलता का पाठ पढ़ाने की ज़रूरत नहीं है.
मैं स्पष्ट शब्दों में बीबीसी के माध्यम से पूरी दुनिया को यह बता देना चाहता हूँ कि हिंदू इस तरह की कायरतापूर्ण शांति नहीं चाहता.
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