यूएन वाले बयान पर क़ायम हैं आज़म

दिल्ली से सटे दादरी में अख़लाक़ की हत्या के बाद भारत में मुसलमानों की सुरक्षा से जुड़े सवाल को संयुक्त राष्ट्र में उठाने की बात करने वाले आज़म ख़ान पर विवाद रुक नहीं रहा.
लेकिन समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री आज़म ख़ान अपने बयान पर क़ायम हैं.
आज़म ख़ान ने कहा कि धर्म के 'ठेकेदार' तब कहां थे जब बदायूं हत्या का मामले सामने आया था, और जब बाल मज़दूरों का मामला संयुक्त राष्ट्र में उठाया गया था.
बदायूं मामला
एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, ''जब बदायूं में दो बहनों के शव पेड़ पर लटके हुए पाए गए थे और मामला संयुक्त राष्ट्र तक पहुंचा था तब मुख्यमंत्री को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के ख़त का जवाब देना पड़ा था. समाज के वे 'ठेकेदार' अब कहां हैं?''

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उन्होंने पूछा, ''जब मज़दूर आंदोलन और बाल मज़दूरी से जुड़े कई मुद्दे भी संयुक्त राष्ट्र में उठाए गए, कैलाश सत्यार्थी को नोबेल पुरस्कार मिला, वे लोग अब कहां हैं? ''
आज़म ख़ान ने कहा, ''जब स्वास्थ्य सबंधी लाखों मामले संयुक्त राष्ट्र में उठे, तब किसी ने इन मुद्दों को उठाने वालों को पाकिस्तानी एजेंट नहीं कहा, न ही उन्हें देश छोड़ने को कहा. लेकिन जब एक बेक़सूर व्यक्ति की मौत से दुखी व्यक्ति ख़त्म किए जा रहे गणतंत्र पर और देश को 'हिंदू राष्ट्र' बनाने की कोशिश का विरोध करता है तो कोई गणतांत्रिक ताक़त इसे समझने को तैयार नहीं.''
हटाने की मांग

आज़म ख़ान के पत्र पर तीव्र प्रतिक्रिया जताते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उन्हें मंत्रिमंडल से निष्कासित करने की मांग की है.
भाजपा ने मांग की है कि उन पर देशद्रोह का मुक़दमा चलाया जाना चाहिए क्योंकि संयुक्त राष्ट्र में दादरी मामले को ले जाने की बात कह कर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को ख़राब किया है.

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विवादों में घिरे रहने वाले ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लमीन के नेता असदउद्दीन ओवैसी ने कहा है कि भारत के आंतरिक मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने की बात कह कर आज़म ख़ान ने भूल की है.
आज़म ख़ान अखिलेश यादव सरकार में मंत्री हैं और हाल में उन्होंने बयान दिया था कि वे दादरी हत्या के मामले को संयुक्त राष्ट्र में उठाएंगे.
इसके लिए उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान-की-मून को एक पत्र भी लिखा था जिसमें उन्होंने कहा था कि ''हिंदुस्तान में कमज़ोर मुस्लिम अल्पसंख्यक के साथ ग़लत व्यवहार हो रहा है.''

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उन्होंने बान-की-मून को लिखे पत्र में आरोप लगाया था कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भारत को धर्मनिरपेक्ष राज्य से बदल कर एक 'हिंदू राष्ट्र' बनाने की कोशिश कर रहा है.
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