झुग्गी के जीवन में रंग भरती कला

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रंगम्मा कौल ने दिल्ली के नांगलोई स्थित झुग्गी में बीस साल पहले पहला कला स्कूल खोला था.
उन्होंने समाचार एजेंसी एफ़पी से बात करते हुए अपना अनुभव साझा किया.
फ़ाइन आर्ट्स में डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने यहां ग़रीब बच्चों को अपने ढंग से मदद करने की ठानी. वे बच्चों को पेंटिंग, क्ले मॉडलिंग, ड्राइंग और दूसरे तरह के हुनर सिखाने लगीं.
उन दिनों को याद कर वो कहती हैं, "मेरे माता-पिता मेरे कला सीखने से ख़फ़ा थे. वे मुझसे कहते थे कि काग़ज़ को रंगने से टेबल पर खाना नहीं मिलेगा."
कला सीखने और फिर दूसरों को मुफ़्त सिखाने की उनकी ज़िद रंग लाईं. आज उनके स्कूल में 60 बच्चे हैं. सब कुछ न कुछ सीख रहे हैं.
उसी झुग्गी में रहने वाली सुनीता निगम के पति हर महीने तक़रीबन 7,000 रुपए कमाते हैं. पर वे चाहती हैं कि उनका बेटा कला स्कूल जाता रहे.
उन्हें लगता है कि कला उन्हें ग़रीबी से लड़ने में मदद करेगा.
वे कहती हैं, "मैं चाहती हूं कि मेरा बेटा पेंटिंग करे, दूसरी चीज़ें बनाए. मैं चाहती हूं कि वह बड़ा होकर सब कुछ करे, डाक्टर बने."

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