ईरानी लड़कियों में नशाख़ोरी की लत क्यों?

ईरानी महिलाएं

इमेज स्रोत, Reuters

ईरान की उपराष्ट्रपति शाहीनदख़्त मौलावर्दी ने बीते दिनों कहा कि अब 13 साल की लड़कियां भी ड्रग्स लेने लगी हैं. इसके साथ ही ड्रग्स लेने वाली महिलाओं की तादाद भी बढ़ी है.

साल 2012 में एक ग़ैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) ने कहा था कि आठ करोड़ की आबादी वाले इस देश में ड्रग्स लेने वालों की तादाद 50 लाख तक हो सकती है.

ईरान में इसके लिए देश के 'दुश्मनों' और विदेशी सैटेलाइट टेलीविज़न स्टेशनों को ज़िम्मेदार ठहराया जाता है.

'विनाशकारी' घटना

ईरानी महिलाएं

इमेज स्रोत, AP

पर वहां का मीडिया मानता है कि यह एक 'विनाशकारी' सामाजिक घटना है.

कुछ दिन पहले ही एक टेलीविज़न स्टेशन पर नशा करने वाले एक शख़्स को बुलाया गया.

उसने कार्यक्रम के दौरान ही पुलिस पर तंग करने का आरोप लगाया और अधिकारियों से गुज़ारिश की कि ड्रग्स लेने वालों की मदद की जाए.

इसके ठीक बाद मौलावर्दी ने महिलाओं और किशोरियों में बढ़ती ड्रग्स समस्या की ओर लोगों का ध्यान खींचा.

'मज़े के लिए नशा'

ईरानी महिलाएं

इमेज स्रोत, AFP

उन्होंने कहा, "नशा लेने वालों में लगभग 10 फ़ीसदी महिलाएं हैं. इनमें 62 प्रतिशत शादीशुदा हैं. ड्रग्स लेने वाली लड़कियों की औसत उम्र घट कर 13 साल हो गई है."

उप राष्ट्रपति के मुताबिक़, ईरानी महिलाएं अब अफ़ीम जैसे पारंपरिक नशा को छोड़ कर साइकोट्रॉपिक ड्रग्स लेने लगी हैं.

मौलावर्दी ने कहा, "इससे लगता है कि लड़कियां मज़े करना चाहती हैं, क्योंकि वे अवसाद से ग्रस्त हैं."

ड्रग्स से मौत

ईरानी महिलाएं

इमेज स्रोत, AP

इसके तीन दिन बाद 'शर्क' अख़बार ने ड्रग्स की वजह से होने वाली मौतों पर एक रिपोर्ट छापी.

अख़बार ने एक एनजीओ रीबर्थ चैरिटी ऑर्गनाइजेशन के अब्बास देलामिज़ादे का इंटरव्यू छापा. देलामिज़ादे ने कहा, "मार्च 2013 से शुरू होने वाले साल में 2,357 लोग ड्रग्स की वजह से मारे गए.

इनमें ज़्यादातर लोगों की मौत ड्रग्स की अधिक मात्रा की वजह से हुई."

उनके मुताबिक़, "अगले साल 2,986 लोग ड्रग्स के कारण मरे. मौजूदा साल की पहली तिमाही में ही 1,000 लोगों की मौत इस वजह से हो चुकी है. अगले साल मार्च तक ड्रग्स से मरने वालों की तादाद 3000 से भी ज़्यादा हो सकती है."

'दुश्मनों की साज़िश'

ईरानी महिलाएं

इमेज स्रोत, AP

इन तमाम चेतावनियों के बावजूद ईरान के पास इस समस्या से निपटने के लिए कोई ठोस योजना नहीं है.

इसे कुछ हद तक इससे समझा जा सकता है कि मीडिया और प्रशासन के लोग समाज की हर बुराई के लिए 'दुश्मनों की साज़िश' को ही ज़िम्मेदार ठहराते हैं.

इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है. आफ़ताब-ए-यज़्द अख़बार ने समाजशास्त्री जाफ़र बे का इंटरव्यू किया और मौलावर्दी के बयान पर उनकी राय पूछी.

उन्होंने कहा, "ईरान के समाज को बर्बाद करने के लिए दुश्मन मुख्य रूप से महिलाओं को निशाना बना रहा है."

महिलाओं में मेथ जैसे ख़तरनाक ड्रग्स लेने के मुद्दे पर वह कहते हैं, "दुश्मन अब यह कहने लगा है कि ये ड्रग्स नशे के लिए नहीं है और इनसे वजन कम हो रहा है. इसलिए महिलाएं इन्हें लेने लगी हैं."

'झूठा प्रॉपगेंडा'

ईरानी महिलाएं

इमेज स्रोत, BBC World Service

समाचार वेबसाइट 'तबनक' की ख़बर है कि मनोवैज्ञानिक परीनाज़ फ़तेहपुर का भी यही मानना है. वे इसके लिए विदेशी सैटेलाइट चैनलों के 'झूठे प्रॉपगेंडा' को ज़िम्मेदार मानती हैं.

समाचार एजेंसी 'फ़ारस' के मुताबिक़, कट्टर पुरातनपंथी सांसद ज़ोहरे तबीबज़ादे ने मौलावर्दी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उनका मानना है कि उप राष्ट्रपति के आंकड़े ग़लत हैं और वे लोगों को बेवजह डरा रही हैं.

वे सवाल उठाती हैं, "यदि सचमुच महिलाओं में ड्रग्स लेने की आदत बढ़ रही है तो उन्होंने बीते दो साल मे क्या किया है?"

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>

<bold>(<link type="page"><caption> बीबीसी मॉनिटरिंग</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/monitoring" platform="highweb"/></link> दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. आप बीबीसी मॉनिटरिंग की ख़बरें ट्विटर और फेसबुक पर भी पढ़ सकते हैं.)</bold>