बदायूं: 'गांव में तो जिसकी लाठी, उसी की भैंस'

क़रीब 14 महीने पहले पहले दो बहनों की लाशें उत्तर प्रदेश के बदायूं ज़िले में एक पेड़ से लटकी मिली थीं.
28 मई 2014 को सामने आई इस घटना की शुरुआती जांच में पुलिस ने इसे सामूहिक बलात्कार और हत्या का मामला बताया था.
भारत में उस वक्त बर्बर बलात्कार की कई वारदातें सामने आईं थीं और इस घटना की <link type="page"><caption> दुनियाभर में निंदा</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2014/06/140602_un_condems_badaun_sn.shtml" platform="highweb"/></link> हुई थी.
हालांकि बाद में सीबीआई ने रिपोर्ट में बलात्कार और हत्या से इनकार किया था.
साल भर पहले घटनास्थल पर जा चुकीं बीबीसी संवाददाता दिव्या आर्य ने दोबारा बदायूं के कटरा शहादतगंज गांव जाकर पता लगाया कि क्या महिलाओं की ज़िंदगी और सुरक्षित हुई?
बदायूं से विस्तृत रिपोर्ट

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मैं फिर उनसे उसी पेड़ के नीचे मिल रही हूँ जहां उनके परिवार की दो बेटियों के शव झूलते हुए मिले थे.
लड़कियों में से एक के पिता एक साल पहले भी मुझे यहीं मिले थे. पर आज उनके साथ तीन पुलिस कांस्टेबल हैं.
लड़कियों के घबराए हुए पिता आरोप लगाते हैं, “मुझे धमकियां मिल रही हैं इसलिए पुलिस लगाई गई है. अभियुक्त लड़कों के समुदाय के लोग कहते थे कि देख लेंगे एक बार जांच ख़त्म हो जाने दो.”

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शुरुआती जांच में डॉक्टरों ने पाया था कि इनकी 14 साल की बेटी और उसकी 16 साल की बहन के साथ सामूहिक बलात्कार कर हत्या की गई.
जब जांच को के हवाले किया गया तो सीबीआई ने एक विवादास्पद रिपोर्ट दी जिसके मुताबिक़, लड़कियों के साथ बलात्कार नहीं हुआ था और उन्होंने आत्महत्या की थी.
लड़कियों के मुकाबले समाज में ऊंची जाति के माने जाने वाले अभियुक्त लड़कों को ज़मानत मिल गई है. लेकिन लड़कियों के मां-बाप सीबीआई जांच को झूठा बताते हैं और उन्होंने इसे ख़ारिज करने के लिए अदालत में अपील की है.
कुछ तो बदला है...

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लड़कियों की माँ कहती हैं, “जब तक हमें न्याय नहीं मिलेगा, वो लोग डरेंगे नहीं, बल्कि अब तो औरतें और सहम गई हैं, सड़कों पर बद्तमीज़ी बढ़ गई है.”
उनके मुताबिक़, पिछले एक साल में बस एक बात बदली है और घर के बाहर शौचालय बन गया है और देर रात शौच के लिए खेतों में नहीं जाना पड़ता.
गांववालों के मुताबिक़, लड़कियों के साथ हुई वारदात के बाद ही उनके गांव में शौचालय बनाने का काम किया गया, पर जांच के नतीजे बदले तो ये काम बीच में ही छोड़ दिया गया.

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लड़कियों के परिवार के अलावा गांव के क़रीब एक-चौथाई घरों में ही शौचालय बन पाया.
16 साल की लक्ष्मी भी उन खुशकिस्मत लोगों में से एक हैं.
वो बताती हैं कि, “शौचालय से बहुत सुविधा है, वरना पहले तो दबंग लड़के छेड़छाड़ करते थे, हम बैठते थे तो टॉर्च मारते थे, कभी हाथ पकड़ लेते थे.”
पर जब मैं पूछती हूं कि अब सुरक्षित महसूस होता है, तो लक्ष्मी 'ना' में सिर हिला देती हैं.
ख़ौफ का साया

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लक्ष्मी कहती हैं, “अपनी आंख से देखा है ना, अपने पड़ोस की लड़कियों के साथ जो होता है, तो खौफ़ बैठ गया है. मन करता है कि दिन में भी पिता जी के साथ खेत में काम करने के लिए ना जाना पड़े, घर में ही कुछ काम कर लें और सुरक्षित रहें.”
सतह पर शांत लगने वाले गांव में कुरेदो तो डर की जड़ें गहरी मिलती हैं. कम से कम महिलाओं के दिल में तो खौफ़ है.
बाला तीन बच्चों की मां हैं. वो बताती हैं, "कई बार गांव छोड़कर चले जाने का मन बनाया पर पैसे की तंगी के चलते रुक जाना पड़ा."
सुरक्षा

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बाला के मुताबिक़, “पहले कभी ऐसी घटना देखी नहीं, तो डर मन में बैठना ही था. अब भी लगता है यहाँ से चले जाएं. पुलिस तो उन्हीं (पीड़ित परिवार) के घर के बाहर लगी है, हम औरतों का क्या, हमें कैसे सुरक्षा मिले?”
बदायूं के एसएसपी सौमित्र यादव के मुताबिक़, "जब तक मामला अदालत में है लड़कियों के परिवारवालों को पुलिस की सुरक्षा दी गई है, फिर हटा ली जाएगी."
एक साल पहले जब लड़कियों का मामला सामने आया था तो दो पुलिसकर्मियों पर अभियुक्त लड़कों की मदद करने का आरोप लगा था.
जांच की शुरुआत में ही उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया था.
सौमित्र यादव के मुताबिक़, "पुलिस द्वारा जाति के आधार पर भेदभाव के आरोप ग़लत हैं और सीबीआई ने भी जांच में यही पाया."
जाति का गणित

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लेकिन गांववालों की राय अलग है और वो तथाकथित ऊंची जाति से ख़ौफ़ की बात करते हैं. लेकिन सौमित्र यादव के मुताबिक़, “हमारे पास जातिगत भेदभाव की कोई शिकायत नहीं आई है और अगर आएगी तो हम तत्काल कार्रवाई करेंगे.”
पर गांववालों का डर ये आश्वासन कम नहीं करता. लड़कियों के भाई के मुताबिक़ गांवों की सच्चाई अलग है.
वो कहते हैं, “ये शहर नहीं है जहां लोग पढ़े-लिखे हों. गांव में तो जिसकी लाठी उसकी भैंस है, पच्चीस गांवों के लिए एक पुलिस चौकी है और वो भी दबंगों के साथ रहती है, हमारा ना कोई सत्ता में है, ना पुलिस में. इसलिए हमारे लिए कुछ नहीं बदला है.”
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