बदायूंः 'लड़कियों की न हत्या हुई, न बलात्कार'

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अनुसार बदायूं में पेड़ से लटकी मिली दो किशोरियों की न तो हत्या हुई थी, न ही उनके संग बलात्कार हुआ था. एजेंसी का कहना है कि दोनों लड़कियों ने आत्महत्या की थी.
सीबीआई की प्रवक्ता कंचन प्रसाद ने बीबीसी को बताया, "क़रीब 40 वैज्ञानिक रिपोर्टों के बाद सीबीआई इस नतीजे पर पहुँची है कि बदायूँ मामले में मृत दो नाबालिग लड़कियों के संग बलात्कार नहीं हुआ था, न ही उनकी हत्या की गयी थी, जैसा कि घटना के एफआईआर में आरोप लगाया था."
सीबीआई की जाँच रिपोर्ट के अनुसार दोनों लड़कियों ने आत्महत्या की थी.
हालांकि मृत किशोरियों में से एक के पिता सोहनलाल सीबीआई की जाँच रिपोर्ट से सहमत नहीं हैं.
सोहनलाल ने बीबीसी को बताया कि पहली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कहा गया था कि उनकी बेटी की मौत 'बलात्कार के समय' हुई थी.
इसी साल 28 मई को उत्तर प्रदेश दो चचेरी बहनों के पेड़ पर लटकते शव के पाए जाने के बाद देश-दुनिया में काफी हंगामा हुआ था.
दलित परिवार की 14 और 15 साल की इन लड़कियों के परिजनों ने बलात्कार के बाद हत्या का आरोप लगाया था. उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी.
शुरुआती जांच

सीबीआई ने जून में इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी.
अंग्रेजी अख़बार 'हिंदुस्तान टाइम्स' ने प्रमुख रंजीत सिन्हा के हवाले से लिखा है, "हमने बदायूं कांड का पर्दाफाश कर दिया है. हमारी जांच में पता चला है कि उन दोनों लड़कियों ने आत्महत्या की थी. उनकी हत्या नहीं हुई थी."
उन्होंने कहा, "स्थानीय पुलिस ने यह मानकर मामले की जांच की थी कि दोनों बहनों की हत्या हुई है."
पुलिस की ओर से कराए गए पोस्टमार्टम में शुरुआती तौर पर कहा गया था कि दोनों के साथ कई बार यौन उत्पीड़न हुआ है और उनकी मौत लटकाने की वजह से हुई है.
सबूतों का अभाव

सीबीआई के जांचकर्ताओं ने बाद में कहा कि कपड़ों और लड़कियों के निजी सामान की सेंटर फॉर डीएनए फिंगरप्रिंट एंड डायगोनस्टिक में जांच की गई. इस जांच में यौन उत्पीड़न का कोई सबूत नहीं मिला.
यह जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अदालत ने इस मामले में गिरफ़्तार तीन लोगों को जमानत दे दी. सीबीआई ने सबूतों के अभाव में उनपर कोई आरोप लगाने से इनकार कर दिया.
इस साल सितंबर में अदालत में उन दोनों पुलिसकर्मियों को भी जमानत दे दी जिन्हें इस मामले में लापरवाही बरतने, लड़कियों के परिजनों की शिकायत को गंभीरता से न लेने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.
जांच एजेंसी ने इन लड़कियों के परिजनों और मामले के प्रमुख गवाह, जो कि इन लड़कियों के एक पड़ोसी हैं, उनकी विश्वसनीयता पर संदेह जताया है.
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