रेडियो पर घुमा फिरा कर क्या कहते हैं मोदी?

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- Author, विकास पांडे
- पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सबसे पसंदीदा माध्यम है रेडियो.
पिछले साल उन्होंने वादा किया था कि वो महीने में कम से कम एक बार रेडियो पर अपने ‘मन की बात’ साझा करेंगे.
मई 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने रेडियो पर अब तक नौ बार देश को संबोधित किया है.
मोदी का यह रेडियो प्रसारण युवा और बुज़ुर्ग दोनों सुनते हैं. ‘मन की बात’ में अभी तक उन्होंने ड्रग्स, विकलांग अधिकार, सफ़ाई की अहमियत और किसानों के अधिकार जैसे मुद्दों पर बात की है.

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बीते जनवरी में उन्होंने भारत दौरे पर आए अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ एक साझा रेडियो प्रोग्राम भी ‘होस्ट’ किया.
अपने पहले चार संबोधनों में प्रधानमंत्री ने महीने के चर्चित मुद्दों पर भरोसा किया. उन्होंने ‘जनता’ और उनके ‘मुद्दों’ के बारे में बात की और एक ‘बेहतर ज़िंदगी’ जीन के ‘नुस्खे’ भी दिए.
उन्होंने अपने पहले संबोधन में ‘साफ़ सफ़ाई’ की अहमियत के बारे में बात की, मंगल यान के मिशन की ‘सफलता’ पर वैज्ञानिकों को बधाई दी और कौशल विकास पर भी रोशनी डाली.

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उन्होंने बच्चों के पालन पोषण और युवाओं में कौशल निर्माण पर भी बात की.
बाकी तीन संबोधनों में मोदी ने दीवाली पर लोगों को बधाई दी और युवाओं में बढ़ती ‘नशाखोरी’ पर बात की.
27 जनवरी को अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ एक संयुक्त कार्यक्रम किया.

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मोदी ने अपने नियमित रेडियो प्रोग्राम मन की बात में अमरीकी राष्ट्रपति का स्वागत किया और एक चाय बेचने वाले के रूप में अपनी शुरुआती ज़िंदगी के बारे में बात की और ओबामा की शुरुआती सामान्य ज़िंदगी पर रोशनी डाली.
उन्होंने कहा कि ओबमा और उनका अपना करियर दिखाता है कि अमरीका और भारत ‘अवसरों’ की धरती है और लोग यहां लोग अपने ‘सपनों’ को ‘साकार’ कर सकते हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब दशकों पहले वो एक सामान्य नागरिक की हैसियत से व्हाइट हाउस का दौरा करने गए तो वो बहुत प्रेरित हुए थे, लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वो इस ऐतिहासिक इमारत में भारत के प्रधानमंत्री की हैसियत से पहुंचेंगे.

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उन्होंने मार्च में थोड़ा हटकर एक फैसला लिया और अपने उन आलोचकों को जवाब देने के लिए इस रेडियो संबोधन का इस्तेमाल किया, जो विवादित भूमि अधिग्रहण बिल के कारण उन्हें किसान विरोधी बता रहे थे.
उन्होंने कहा कि उनकी ‘सरकार’ देश के किसानों की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है और वो किसानों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई काम नहीं करेगी.
अपने अंतिम तीन संबोधनों में वो योग दिवस, नेपाल में भूकंप या लोगों से अपनी छुट्टियों की तस्वीरों को साझा करने के लिए कहने जैसे साप्ताहिक मुद्दों पर लौट आए.
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