मोर्सी की मौत की सज़ा बरक़रार

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मिस्र की एक अदालत ने मंगलवार को साल 2011 में बड़े पैमाने पर जेल तोड़ने की घटना में पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी को दी गई मौत की सज़ा बरकरार रखी है.
मोर्सी को ये सज़ा इस साल मई में सुनाई गई थी लेकिन इसकी अंतिम पुष्टि मिस्र के शीर्ष धार्मिक नेता(ग्रैंड मुफ़्ती) की राय आने के बाद हुई है.
इससे पहले एक अन्य मामले में अदालत ने मोर्सी को जासूसी मामले में आजीवन क़ैद की सज़ा सुनाई है.
मोर्सी पर आरोप है कि उन्होंने फ़लस्तीनी गुट हमास, लेबनान के चरमपंथी गुट हिज़्बुल्लाह और ईरान के लिए जासूसी की.
मोर्सी के समर्थकों ने उनपर लगे आरोपों को 'मनगढ़ंत' बताया है. मोर्सी इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील कर सकते हैं.
जुलाई 2013 में बड़े पैमाने पर प्रदर्शऩ के बाद मोहम्मद मोर्सी का हटा दिया गया था.
सत्ता में रहते हुए प्रदर्शनकारियों की गिरफ़्तारी और उन्हें प्रताड़ित किए जाने का आदेश देने के मामले में मोर्सी फ़िलहाल 20 साल की सज़ा काट रहे हैं.
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