सहानुभूति के रथ पर सवार, जंग लड़ेंगी जया?

जयललिता

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    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

आय से अधिक संपत्ति के मामले में निर्दोष करार दिए जाने और चौथी बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने के बाद यदि जयललिता जयराम कुछ ही महीनों में चुनाव कराने का फ़ैसला करें तो कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए.

तमिलनाडु की राजनीति के विशेषज्ञों को यकीन है कि वह पहले कुछ महीने में प्रशासन को चुस्त-दुरुस्त करेंगी. पिछले साल 27 सितंबर से जब उन्हें विशेष अदालत ने दोषी ठहराया था, तब से प्रशासन ठप पड़ा हुआ है.

इस समय जयललिता की पार्टी अन्नाद्रमुक को विधानसभा में पूर्ण बहुमत प्राप्त है और विधानसभा चुनाव अगले साल मई में होने हैं.

'प्रशासन रफ़्तार पकड़ेगा'

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वो ऐसी पहली मुख्यमंत्री थीं जिन्हें उस क़ानून के तहत पद छोड़ना पड़ा था जिसमें प्रावधान है कि अदालत से दोषी पाए जाने के साथ ही लोगों के चुने गए प्रतिनिधि को अपना पद छोड़ना पड़ेगा.

लेकिन कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस सीआर कुमारस्वामी ने ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले को पलटकर उनके मुख्यमंत्री की शपथ लेने का रास्ता साफ़ कर दिया. अब संभवतः 17 मई को ऐसा होगा.

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक भगवान सिंह ने बीबीसी हिंदी से कहा, "एक बार वह वापस आ जाती हैं तो प्रशासनिक कार्य रफ़्तार पकड़ेगा. और इस समय विपक्षी पार्टियों की जो स्थिति है, उसे देखते हुए लगता है कि अगर तीन महीने में चु्नाव होते हैं तो विपक्षा का सूपड़ा साफ़ हो जाएगा."

करुणानिधि

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जयललिता की राजनीति पर जानी-मानी विशेषज्ञ वासंथी भी भगवान सिंह के नज़रिए से सहमत हैं, "वह (जयललिता) ऐसा ही करेंगी, क्योंकि ऐसा करना उनके फ़ायदे में रहेगा. इसलिए भी, क्योंकि अब तक डीएमके और अन्य पार्टियां अपनी रणनीति तय नहीं कर पाई हैं."

हाल के कुछ हफ़्तों में विपक्षी डीएमके के नेता करुणानिधि की पहल पर छोटी पार्टियों के बीच विभिन्न मुद्दों पर एक समझ बन रही है. करुणानिधि इन पार्टियों को एक गठबंधन करने के लिए रिझा रहे थे क्योंकि जब तक जयललिता दोषी रहीं और जेल में थीं, तो अन्नाद्रमुक की स्थिति ख़ासी कमज़ोर दिख रही थी.

भगवान सिंह कहते हैं, "डीएमके बहुत अच्छी स्थिति में नहीं हैं. करुणानिधि के बेटे एमके स्टालिन अब भी जयललिता के मुकाबले में मजबूत दावेदार नहीं हैं, और न ही करुणानिधि हैं."

'सहानुभूति पाने की कोशिश होगी'

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सिंह और वासंथी दोनों का मानना है कि जयललिता इस बात का इस्तेमाल सहानुभूति पाने के लिए करेंगी कि विपक्ष की वजह से उन्हें जेल में रहना पड़ा.

सिंह कहते हैं, "अब चूंकि वह दोषमुक्त हो गई हैं इसलिए अन्नाद्रमुक सहानुभूति का ज़बरदस्त इस्तेमाल करेगी."

विश्लेषक इस कानूनी लड़ाई के उच्चतम न्यायालय में जाने की संभावना से इनकार नहीं करते, लेकिन जस्टिस कुमारस्वामी के फ़ैसले पर अपील की प्रक्रिया पूरी होने में भी समय लगेगा.

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