'ड्रैगन की मेहरबानियों' से पाक मीडिया गदगद

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ और चीन के रष्ट्रपति शी जिनपिंग

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    • Author, अशोक कुमार
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

बीते हफ़्ते पाकिस्तानी उर्दू मीडिया के लिए सबसे अहम ख़बर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का पाकिस्तान दौरा ही रही.

जंग लिखता है कि चीनी राष्ट्रपति के दौरे में पाकिस्तान में 46 अरब डॉलर के चीनी निवेश के लिए 51 समझौते हुए.

अख़बार के मुताबिक़ इन समझौतों से जहां पाकिस्तान में ऊर्जा संकट जैसी मुश्किलों पर क़ाबू पाने में मदद मिलेगी.

वहीं पाकिस्तान के ‘एशियन टाइगर’ बनने का मार्ग प्रशस्त होने के भी इशारे मिलते हैं.

बड़ी अड़चन

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ और चीन के रष्ट्रपति शी जिनपिंग

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रोज़नामा एक्सप्रेस लिखता है कि पाकिस्तान में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर चीनी निवेश से पाकिस्तानी अधिकारी ख़ुश हैं.

लेकिन आर्थिक जानकार मानते हैं कि चीन इससे ज़्यादा निवेश भारत और अन्य देशों में कर रहा है.

अख़बार कहता है कि भारत में अधिक चीनी निवेश की एक बड़ी वजह ये है कि वो बड़ा औद्योगिक देश तो है ही, उसका बुनियादी ढांचा भी बेहतर है.

अख़बार के मुताबिक़ पाकिस्तान में निवेश के रास्ते में बड़ी अचड़न शांति व्यवस्था है जिस पर सरकार को ध्यान देना है.

रोज़नामा दुनिया लिखता है कि चीन पाकिस्तान में 46 अरब डॉलर का निवेश करने जा रहा है, जबकि अमरीका ने बीते छह बरसों में पाकिस्तान को छह अरब डॉलर की मदद दी है.

अख़बार के मुताबिक़ ये मदद पाकिस्तान की कुरबानियों के मुकाबले कहीं नहीं ठहरती.

अमरीकी हितों की ख़ातिर दस बारह साल में अपने साठ हज़ार नागरिक और पांच हज़ार से ज्यादा सैनिक गंवाए हैं और देश की अर्थव्यवस्था को एक खरब डॉलर का जो नुक़सान हुआ है, वो अलग है.

सऊदी अरब के एहसान

वहीं नवा-ए-वक़्त ने प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के हालिया सऊदी अरब दौरे पर संपादकीय लिखा है.

अख़बार के मुताबिक़ मियां नवाज़ शरीफ़ ने सऊदी शाह सलमान को भरोसा दिया है कि यमन संकट में सऊदी अरब को अकेला नहीं छोड़ेंगे.

अख़बार के अनुसार पाकिस्तान पर सऊदी अरब के बहुत अहसान हैं और उसने इसी सरकार को डेढ़ अरब डॉलर का तोहफा तो पिछले ही साल दिया है.

अख़बार की राय है कि अगर नवाज़ शरीफ़ यमन में जारी लड़ाई का हिस्सा न बनने वाला प्रस्ताव पाकिस्तानी संसद में पारित होने के बाद ही सऊदी अरब चले जाते तो अच्छा था, लेकिन देर आए दुरुस्त आए.

वहीं जसारत ने अपने संपादकीय में एक रिपोर्ट का हवाला दिया है जिसके अनुसार कराची में एक करोड़ 75 लाख ग़ैर क़ानूनी हथियार हैं.

अख़बार कहता है कि अगर ये रिपोर्ट सही है तो फिर पाकिस्तानी अर्धसैनिक बल रैंजर्स इतने दिन से किसके ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रहे थे.

भारत की चिंताएं

नरेंद्र मोदी

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रूख़ भारत का करें तो चीनी राष्ट्रपति की पाकिस्तान यात्रा पर राष्ट्रीय सहारा लिखता है कि अगले महीने बीजिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात से पहले शी जिनपिंग का इस्लामाबाद जाकर नवाज़ शरीफ़ से मिलना कई संदेहों को हवा देता है.

अख़बार की राय है कि 46 अरब डॉलर का निवेश ही नहीं, बल्कि चीन पाकिस्तान को कई पनडुब्बियां भी दे रहा है, ग्वादर बंदरगाह तक पहुंचने का रास्ता बना रहा है.

भारत की आपत्ति के बावजूद वो पाकिस्तान में एक से ज़्यादा परमाणु रिएक्टर लगा चुका है और ये सब बातें भारत के लिए परेशानी का सबब ज़रूर होंगी.

वहीं आम आदमी पार्टी की रैली में एक किसान की मौत पर अख़बार-ए-मशरिक लिखता है कि देश में कभी राजनेताओं ने किसानों की समस्या को हल करने की संजीदगी से कोशिश ही नहीं की.

अख़बार के मुताबिक़ विडंबना तो ये है कि मार्च के महीने में ज़रूरत से ज़्यादा बारिश के कारण किसानों को भारी नुक़सान उठाना पड़ा है तो मौसम विभाग का अनुमान है कि इस बार मॉनसून औसत से कम रहेगा.

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