उम्र निकल गई! फिर भी बन सकते हैं डॉक्टर

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- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपुर से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
उम्र निकल गई है और इसके बावजूद आप डॉक्टर बनने का सपना संजोए हुए हैं तो छत्तीसगढ़ में आपको मौका मिल सकता है.
छत्तीसगढ़ सरकार ने मेडिकल की पढ़ाई के लिए प्रारंभिक चयन परीक्षा में ऊपरी आयु सीमा ख़त्म कर दी है.
अभी तक मेडिकल की चयन परीक्षा में 25 साल से अधिक उम्र का कोई व्यक्ति शामिल नहीं हो सकता था.
सरकार के इस आदेश के बाद राज्य के मेडिकल कॉलेजों की 650 सीटों पर किसी भी उम्र के व्यक्ति के पढ़ने का रास्ता साफ़ हो गया है.
राज्य के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्री अमर अग्रवाल कहते हैं, "पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती और हम चाहते हैं कि अधिक से अधिक और हर उम्र के लोग शिक्षा के विविध क्षेत्रों में आएं, ज्ञान अर्जित करें."
विरोध के स्वर

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लेकिन राज्य सरकार के इस फरमान से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले खुश नहीं हैं.
रायपुर के जवाहरलाल नेहरु चिकित्सा महाविद्यालय में एमबीबीएस के अंतिम वर्ष की छात्रा शैलजा कहती हैं, "हर आदमी की मेधा अलग होती है. 40 साल के एक अनुभवी व्यक्ति के सामने 20 साल के एक छात्र को चयन परीक्षा में बैठाया जाएगा तो संभव है, 20 साल की उम्र का छात्र पीछे रह जाए."
बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान के अभिषेक का तर्क है कि मेडिकल की पढ़ाई में सरकार हर साल एक छात्र पर 50 लाख रुपए से अधिक खर्च करती है. 29-30 साल का एक छात्र जब डॉक्टर बन कर निकलता है तो वह कम से कम 40 साल तक अपने पेशे के सहारे समाज की सेवा करता है.
निर्णय कितना सही?
अभिषेक कहते हैं, "साठ साल की उम्र का व्यक्ति 65-67 की उम्र में डॉक्टर बन कर निकलेगा तो वह तो खुद ही उस उम्र की बीमारियों से जूझ रहा होगा. वह दूसरों की क्या सेवा करेगा?"

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रायपुर के डॉक्टर अभिषेक वर्मा का मानना है कि सरकार का यह निर्णय धंधे की तरह चिकित्सा सेवा में आने वाले लोगों को प्रोत्साहित करेगा.
भारत में आर्थिक, सामाजिक और शिक्षा मामलों की कई नीतियां बनाने वाले समीर घोष का मानना है कि छत्तीसगढ़ सरकार का यह निर्णय सुखद नहीं है.
समीर कहते हैं, "जायज कारणों के साथ किसी को अगर आप 29-30 साल की उम्र तक मेडिकल की चयन परीक्षा में बैठने देते हैं तो वहां तक तो बात समझ में आती है, लेकिन उम्र सीमा खत्म करने से युवाओं पर एक ख़ास किस्म का मानसिक दबाव बनेगा."
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