राजनीति पर नाटक या नाटक पर राजनीति?

अंकुर

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    • Author, विदित मेहरा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

थिएटर ग्रुप 'अस्मिता' के डायरेक्टर अरविंद गौड़ का कहना है कि नाटक 'वेलकम टू द मशीन' पर प्रतिबंध लगाने की दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) की मांग अनुचित है.

खालसा कॉलेज ने नाटक 'वेलकम टू द मशीन' पर फिलहाल रोक लगा दी है, लेकिन इसको लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं.

डूसू ने इस नाटक को 'हिन्दू विरोधी' बताया है और खालसा कॉलेज के प्रधानाचार्य से नाट्य संस्था 'अंकुर सोसाइटी' पर तत्काल पाबंदी लगाने की मांग की है.

नाटक पर राजनीति

खत

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खालसा कॉलेज की नाट्य संस्था के प्रमुख गुनीत ने बताया कि ये नाटक बिल्कुल भी 'हिन्दू विरोधी' नहीं है.

गुनीत ने कहा, "हमारा नाटक बंटवारे की राजनीति के बारे में बात करता है और ये नाटक इसका जमकर विरोध करता है."

डूसू के संयुक्त सचिव आशुतोष माथुर ने कहा, "इस नाटक को कुछ छात्रों ने देखा और कहा कि इसमें 'हिन्दू विरोधी' चीज़ें हैं तो हमने तुरंत खालसा कॉलेज के प्रिंसिपल को नोटिस भेजा और इस पर कार्रवाई करने को कहा."

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने ये नाटक देखा है? माथुर ने कहा, "मैंने पूरा नाटक नहीं देखा है, सिर्फ़ कुछ अंश देखे हैं."

राजनीति

अरविंद गौड़

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नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने मई 2014 से केंद्र में सत्ता की कमान संभाली थी. उसके बाद 'लव जिहाद', 'चार बच्चे' और कई ऐसे बयान उठने लगे थे.

गौड़ कहते हैं, "बेशक बीजेपी के सत्ता में आने के बाद इस तरह के बयान बहुत बढ़ गए हैं. मुझे नहीं लगता है कि इस सबसे हिन्दू कट्टरपंथ की भावना जाग रही है, बल्कि इस इनसे हिन्दू कट्टरपंथ की भावना जगाने की कोशिश की जा रही है.”

वो आगे कहते हैं, “हाल ही में भगत सिंह और विनायक दामोदर सावरकर को एक ही धरातल पर रखकर देखने की कोशिश की गई. जब भी आप ऐसी बातें करते हैं तो हम कहीं न कहीं एक विचार को केंद्र में लाने की कोशिश करते हैं.”

उन्होंने आगे कहा, "राजनीति में अपने लाभ के लिए हर राजनीतिक पार्टी इस खेल का सहारा लेती है, फिर चाहे वो कांग्रेस हो या बीजेपी."

कुलजीत सिंह

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‘नाट्य संस्था 'अंकुर' के संयोजक कुलजीत सिंह कहते हैं, “मौजूदा सरकार का अपना एक एजेंडा है उनके इंस्टिट्यूट राष्ट्रवाद की बात करते हैं. अगर वो इसे बढ़ावा देंगे, तो ऐसी प्रतिक्रियाएं सामने आएंगी ही.”

अंकुर का समर्थन

दिल्ली विश्वविद्यालय

खालसा कॉलेज की नाट्य संस्था 'अंकुर' के समर्थन में 'आइसा' ने भी धरना दिया.

कुलजीत ने ये भी बताया कि खालसा कॉलेज की नाट्य संस्था में 21 छात्र हैं जिसमें से सात सिख हैं और 14 हिन्दू हैं.

अब तक इस नाटक का 40 से ज़्यादा बार मंचन किया जा चुका है और इसे नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा में भी दिखाया जा चुका है.

फ़िलहाल ख़ालसा कॉलेज ने इस नाटक को न करने का निर्देश दिया है पर साथ ही ये भरोसा भी दिलाया है कि वो नाट्य संस्था 'अंकुर' के साथ है.

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