हम विपक्ष को पंक्चर करेंगेः उदित राज

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बीमा, कोयला और खनन से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयकों के राज्यसभा से पारित हो जाने के बाद केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती भूमि अधिग्रहण विधेयक को पारित कराना है.
लोकसभा में ज़बरदस्त बहुमत वाली सरकार को राज्यसभा में अल्पमत में होने के कारण हर विधेयक को पारित कराने के लिए काफ़ी जद्दोजहद करनी पड़ी है.
विपक्षी दल मौजूदा भूमि अधिग्रहण विधेयक को किसान और ग़रीब विरोधी बता रहे है. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन आरोपों का खंडन किया है.
इस विधेयक को लेकर भाजपा रणनीतियों पर बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद ने बात की भाजपा सांसद उदित राज से.

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लोकसभा में इस विधयेक पर मतदान में भाजपा के कई सांसदों ने भाग नहीं लिया. क्या भाजपा के अंदर भी इसे लेकर विरोध है?
मैं इससे सहमत नहीं हूँ कि पार्टी के अंदर इस विधेयक को लेकर मतभेद हैं. लोकसभा में शत प्रतिशत सांसद उपस्थित नहीं रहते हैं. भाजपा का कोई सांसद इस बिल के विरोध में नहीं है.
राज्यसभा में विधेयक पेश करने में देर क्यों हो रही है?
विपक्ष माइंस बिल पर अड़ा हुआ था, लेकिन वो बिल पारित हो गया. भूमि अधिग्रहण विधेयक पर अभी चर्चा चल रही है. इसे लेकर भी हमारे पास रणनीति है.
विपक्ष का जो विरोध है वो दलित हितों के ख़िलाफ़ है क्योंकि जब तक देश का औद्योगीकरण नहीं होगा तब तक ग़रीबी नहीं जाएगी, रोज़गार नहीं मिलेगा.
इस विधेयक का विरोध दलितों का विरोध कैसे है?
बिल्कुल, हम चाहते हैं कि कृषि पर देश की निर्भरता कम हो. जैसे अमरीका में महज क़रीब दो प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है.
हमारे यहाँ 50 प्रतिशत से ज़्यादा आबादी कृषि पर निर्भर है. सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि का योगदान केवल 12-13 प्रतिशत है.
ऐसे में, इस विधेयक का विरोध, औद्योगीकरण और शहरीकरण का विरोध है.

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क्या आप कृषि को छोड़कर दूसरे पेशे अपनाने का सुझाव दे रहे हैं?
निश्चित तौर पर, शहरीकरण तो होगा ही. 'मेक इऩ इंडिया' का यही मतलब है, वरना किसान आत्महत्या करेंगे या ग़रीब रहेंगे. विकसित देशों की तरह यहां भी कम से कम जनता को कृषि क्षेत्र से जुड़ा होना चाहिए.
इस विधेयक में मुआवज़ा देने के लिए 'आधार वर्ष' को लेकर भी आपत्तियां हैं. कुछ किसानों का कहना है कि मुआवज़ा पंद्रह साल पुराने आधार वर्ष पर दिया जाएगा, इसलिए शहरों में दो गुना और गाँवों में चार गुना मुआवज़ा देने की बात भ्रामक है.
मैं नहीं समझता की ऐसा है.
क्या साल 2014 को आधार वर्ष माना जाएगा?
मैं समझता हूँ कि इसका हल निकाल लिया जाएगा. ये बड़ी बात नहीं है.

आपको उम्मीद है कि राज्यसभा में ये विधेयक पारित हो जाएगा?
राज्यसभा में इसे पारित हो जाना चाहिए. हम विपक्ष को पंक्चर कर देंगे. हम दलित रैली बुलाएँगे. दलित समाज एक बहुत बड़ा तबका है, क़रीब 25 प्रतिशत. अगर वो सड़कों पर उतर गया तो विपक्ष ढीला पड़ेगा.
यह रैली आप कब बुलाने वाले हैं?
यह इस पर निर्भर है कि विपक्ष का क्या रवैया रहता है.
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