बदल जाएगा पासवर्ड का तरीका?

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    • Author, मानसी दाश
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

ईमेल, फेसबुक, बैंक अकाउंट, क्रेडिट कार्ड, ट्विटर, ऑनलाइन फ़ोरम– इंटरनेट की दुनिया में काम कोई भी हो अक्षर और नंबरों से बने पासवर्ड के बिना संभव नहीं.

इन अटपटे पासवर्ड के खो जाने से होने वाली परेशानी से कहीं अधिक चिंता हमें इन्हें सुरक्षित रखने की होती है.

चिट्ठी-पत्री या ज़रूरी दस्तावेज़ों को सुरक्षित रखने के लिए पासवर्ड का इस्तेमाल प्राचीन समय से होता आया है. कंप्यूटर के ईजाद के साथ इसके इस्तेमाल में भी थोड़ी बहुत जटिलता तो आई है लेकिन नंबरों और अक्षरों का कोड अभी भी कंप्यूटर में सुरक्षा का साधारण उपाय बना हुआ है.

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इमेज कैप्शन, 1961 में सुरक्षित फाइल शेयरिंग के लिए एमआईटी ने पहला पासवर्ड बनाया

हाल के वर्षों में पासवर्ड हैकिंग की घटनाओं में तेज़ी आई है. पिछले वर्ष ईबे डाटाबेस से करोड़ों नाम और पासवर्ड हैक कर लिए गए थे. एमेज़ोन और वॉलमार्ट के डाटाबेस से हजारों पासवर्ड हैकर्स ने ऑनलाइन पोस्ट कर दिए थे.

पासवर्ड हैकिंग का काम अब इंसान की बजाय सॉफ़्टवेयर करने लगे हैं, जिससे ख़तरा और भी बढ़ने लगा. आजकल बाज़ार में ऐसे सस्ते सॉफ़्टवेयर मिलते हैं जिनकी मदद से चंद मिनटों में पासवर्ड हैक किया जा सकता है.

क्या कर रही हैं कंपनियां

बिल गेट्स

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इमेज कैप्शन, माइक्रोसोफ्ट संस्थापक बिल गेट्स ने 2004 में पासवर्ड की मौत की घोषणा की थी

ऐसे में आप ही नहीं, कंपनियां भी आपके पासवर्ड को अधिक सुरक्षित करने के तरीकों के बारे में सोच रही हैं. हाल फिलहाल में कंपनियां और शोधकर्ता कई नए उपायों को लेकर सामने आए हैं जिससे लगता है कि आने वाले समय में पासवर्ड वाकई ख़त्म हो जाएंगे.

बाज़ार में इस तरह के पासवर्ड सॉफ़्टवेयर उपलब्ध हैं जो आपके पासवर्ड रखने के काम को आसान बनाते हैं- ये आपके पासवर्ड को मज़बूत बनाते हैं और आपके लिए इन्हें याद भी रखते हैं.

पर क्या हमें एक सॉफ़्टवेयर के पासवर्ड को याद रखने के लिए दूसरे सॉफ़्टवेयर पर निर्भर रहना पड़ेगा? क्या इससे छुटकारा पाने का कोई और तरीक़ा नहीं?

बीबीसी आपको बता रहा है पासवर्ड नहीं याद रखने के 5 नए तरीके जिन पर अभी काम चल रहा है. हो सकता है आने वाले वक़्त में आप ख़ुद ही अपना पासवर्ड हों.

बायोमीट्रिक सेंसर- उंगली का ठप्पा

एपल ने फिंगरप्रिन्ट सेंसर के साथ पासवर्ड की ज़रूरत लगभग ख़त्म ही कर दी. टच आईडी में फिट किए बायोमीट्रिक सेंसर के ज़रिए मोबाइल पेमेंट की सुविधा है, जिससे बार-बार पासवर्ड डालने की अब कोई ज़रूरत नहीं रही. <bold>पढ़ें- <link type="page"><caption> बैंक में पासवर्ड की जगह टच आईडी </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2015/02/150218_uk_bank_app_touch_id_sk" platform="highweb"/></link></bold>

गैलैक्सी एस 6

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एप्पल पे की तर्ज़ पर सैमसंग ने सैमसंग पे नाम से मोबाइल पेमेंट सिस्टम लॉन्च किया है जिसके ज़रिए गैलैक्सी एस6 में फिंगरप्रिन्ट सेंसर के इस्तेमाल से पेमेंट की सुविधा दी गई है. <bold>पढ़ें- <link type="page"><caption> सैमसंग गैलेक्सी एस 6, एज की 7 ख़ास बातें</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2015/03/150302_samsung_galaxy_s6_mg" platform="highweb"/></link> </bold>

माइक्रोसोफ्ट भी विंडो 10 के साथ पासवर्ड को टा-टा करने जा रहा है. इस ऩए ओएस के साथ कंपनी फिडो (फास्ट आईडेंटिटी ऑनलाइन अलायंस) का इस्तेमाल करेगी जिसके साथ बार-बार पासवर्ड डालने की ज़रूरत को ख़त्म कर दिया जाएगा. आप एक डिवाइस पर लॉग इन करेंगे और सभी विंडो डिवाइसेज पर ऑटोमैटिक लॉग इन हो जाएगा.

क्वॉलकॉम अल्ट्रासोनिक 3डी फिंगरप्रिन्ट सेंसर

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प्रोसेसर बनाने वाली कंपनी क्वॉलकॉम ने अभी मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस में 3डी फिंगरप्रिंट सेंसर की घोषणा की जिसे फ़ोन और टैबलेट में इस्तेमाल किया जाएगा. इससे कई अन्य कंपनियां ऐसे उत्पाद लेकर आएंगी जिनमें आपकी उंगली का ठप्पा ही आपका पासवर्ड होगा.

आंख़ों का रेटिना, हार्टबीट सेंसर

जिन्होंने रितिक रोशन की फिल्म 'क्रिश' देखी है, उन्हें इस तरह के पासवर्ड का मतलब समझ आ ही गया होगा. इस पासवर्ड में आंख़ों के रेटिना का पैटर्न या दिल की धड़कन ही पासवर्ड होता है.

इसकी दिक्कत यह है कि यदि आप इसे बदलना चाहें तो, आपके पास कोई दूसरा विकल्प इस नहीं होता.

किसी और जगह का लॉग इन

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कई कंपनियों ने हाल के महीनों में अन्य लॉग इन को ही पासवर्ड के रूप में स्वीकारना शुरू कर दिया है. जैसे कि कई उभरते सोशल नेटवर्क पर आप अपने ट्विटर या फेसबुक लॉग इन के ज़रिए प्रवेश कर सकते हैं.

इस तरह के पासवर्ड मानते हैं कि यदि आप एक जगह पर लॉग इन हैं तो उस पहचान के ज़रिए आपकी पहचान की जा सकती है.

आपका फ़ोन

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कई लोगों के लिए आपके फ़ोन पर पासवर्ड या पासवर्ड कंफर्म करने के लिए गुप्त कोड भेजना भी आपके अकाउंट को सुरक्षित बनान का तरीक़ा है. जीमेल इस्तेमाल करने वालों के लिए यह कोई नई बात नहीं है.

आपकी लोकेशन भी बन सकती है आपका कोड

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कंप्यूटर वैज्ञानिक ज़िया-अल-सोलम के अनुसार पासवर्ड याद न रखने का नया तरीक़ा हो सकता है- भौगोलिक पासवर्ड. यह पासवर्ड अक्षांश और देशांतर पर लोकेशन, जगह की ऊंचाई, गांव, शहर का विस्तार आदि आंकड़ों के आधार पर हो सकता है, जिन्हें याद रखने की जरुरत नहीं रहेगी.

हार्ड-की पासवर्ड

गूगल जैसी कई कंपनियां यूएसबी ड्राइव को पासवर्ड की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही हैं.

अपने अकाउंट में लॉग इन करने से पहले ये यूएसबी ड्राइव कम्प्यूटर में लगाकर एंटर बटन दबाएं.

इसके साथ कम से कम आपका पासवर्ड सुरक्षित रहता है क्योंकि यह आपके पास रहता है, किसी डाटाबेस में नहीं.

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link>करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>