मोदी के 'नसीब' पर छिड़ी बहस

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खुद को ‘नसीब वाला’ और विरोधियों को ‘बदनसीब’ कहने से जुड़े मुद्दे पर सोशल मीडिया पर ज़बरदस्त प्रतिक्रिया हुई है.
मोदी ने रविवार को दिल्ली में एक चुनावी रैली में कहा था, “पेट्रोल, डीज़ल के दाम कम होने से लोगों की जेब में कुछ पैसा बचा है. इस पर भी आलोचक कहते हैं कि मोदी नसीबवाला है. अगर नसीबवाले से काम बन रहा है तो बदनसीब को लाने की क्या ज़रूरत है?”
सोशल मीडिया पर बहस

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<link type="page"><caption> </caption><url href="https://www.facebook.com/nitin.zaware.7?fref=hovercard" platform="highweb"/></link>फ़ेसबुक और ट्विटर पर लोग इस पर अपनी अपनी राय जता रहे हैं. ज़्यादातर लोगों ने मोदी के भाषण के इस हिस्से को पसंद नहीं किया है.
<link type="page"><caption> प्रेम पाल</caption><url href="https://www.facebook.com/prem.is.paul?fref=nf" platform="highweb"/></link> नामक शख़्स ने अपने फ़ेसबुक पर सवाल किया है कि यदि मोदी जी के नसीब से पेट्रोल डीज़ल सस्ता हुआ तो क्या उन्हीं के नसीब की वजह से 2002 मे गोधरा में हुए दंगों में निर्दोष लोग मारे भी गए थे?
<link type="page"><caption> अनवर आज़ाद</caption><url href="https://www.facebook.com/aajtak/posts/10153273663647580" platform="highweb"/></link> पूछते हैं, "आपके नसीब से मेरा नसीब जुड़ा है, मगर विश्व बाज़ार में तेल की कीमतों में 50% गिरावट आई है मगर भारत में क्यों नहीं मोदी जी ?"
मोदी का मज़ाक!

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इसके उलट <link type="page"><caption> डा. नितिन झवाड़े </caption><url href="https://www.facebook.com/nitin.zaware.7?fref=hovercard" platform="highweb"/></link>का दावा है कि मोदी सरकार ने तो कच्चे तेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में गिरने पर उसका फ़ायदा आम आदमी तक नहीं पंहुचने दिया.
ट्विटर पर कुछ लोग व्यंग्य कर रहे हैं तो कुछ लोग कटाक्ष भरी टिप्पणी कर रहे हैं. यहां भी अधिकतर लोग प्रधानमंत्री से ख़फ़ा नज़र आ रहे हैं.
<link type="page"><caption> गुणशेखर राजरत्नम</caption><url href="https://twitter.com/crguna" platform="highweb"/></link> तंज करते हुए कहते हैं, बिल्कुल ठीक, वैसे ही जैसे मोदी जी ने चुनाव जीतने के पहले ही कारगिल जंग जीत ली थी.

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<link type="page"><caption> आर सरोजा</caption><url href="https://twitter.com/rsaroja70" platform="highweb"/></link> ट्वीट करते हैं, "सोने की क़ीमत कम करने का श्रेय मोदी जी कब ले रहे हैं?"
<link type="page"><caption> भूपेन सिन्हा</caption><url href="https://twitter.com/bksCG" platform="highweb"/></link> नाम के शख्स कहते हैं कि लोगों को बेवकूफ़ न बनाया जाए.
उपद्रवी कोमल सवाल उठाती हैं कि यदि ऐसा ही है तो मंडियों के व्यवसायी क्या वाकई तेल लेने गए?

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<link type="page"><caption> डीके विकास</caption><url href="https://twitter.com/Di_Vikas" platform="highweb"/></link> मोदी के पक्ष में खड़े दिखते हैं. वे उनके विरोधियों पर ईर्ष्या करने का आरोप लगाते हुए जले हुए पर मरहम लगाने की सलाह देते हैं.
<link type="page"><caption> नितिन राउत</caption><url href="https://twitter.com/NitinRaut2" platform="highweb"/></link> नाम के व्यक्ति ने कहा, "दवा की क़ीमतें भी कुछ कम कर दी जानी चाहिए."
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