दिल्लीः बिजली का करंट सभी दलों को

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- Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
दिल्ली की अंबेडकर कॉलोनी जाने के लिए आपको ख़ासी मशक्क़त करनी पड़ती है.
पहले तो उसका नाम ही ज़्यादातर लोगों को नहीं मालूम, हां; वो सर्च करने पर गूगल मैप पर ज़रूर दिख जाता है.
अंबेडकर कॉलोनी का नाम मीडिया में तब बार-बार आया था जब आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने 'बन्ने राम के घर की कटी बिजली के तार फिर से जोड़ दिए थे.’
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बन्ने राम के घर का बिजली कनेक्शन बिजली विभाग के साथ हुए बिल पर विवाद की वजह से कट गया था.
हालांकि जब मैं वहां पहुंचा तो बन्ने राम हमें नहीं मिले! लेकिन मेरी मुलाक़ात बस्ती के प्रधान बन्ने सिंह से हुई जिन्होंने बताया, "बिजली के लिए बहुत परेशानी है. लोगों के चौदह-चौदह हज़ार रुपये के बिल आ रहे हैं, जबकि बस्ती में रहने वाले ज़्यादातर लोग ग़रीब हैं."
बस्ती में पहुंचने के लिए कूड़े के ढेर के पास से गुज़रने वाली, पानी से भरी सड़क से गुज़रना होता है और फ़िज़ां में मौजूद बदबू कई दफ़ा वापस जाने का इरादा दिल के किसी कोने में जगाती है.

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इलाक़े में रहने वाली श्वेता कहती हैं कि, "पानी के लिए ट्यूबवेल ही एक सहारा है, लेकिन उसकी वजह से बड़े और बच्चे सभी इंफेक्शन का शिकार हैं."
आम आदमी पार्टी के चुनावी घोषणापत्र के सदस्य रोशन शंकर के चुनाव का तज़ुर्बा बताता है कि दिल्ली में 'कम से 20 क्षेत्र ऐसे हैं जहां चुनाव पानी के मुद्दे पर ही लड़ा जाता है.'
पार्टी ने बिजली के बिल आधे किए जाने और बिजली वितरण कंपनियों के बही-खाते की जांच करवाने का वादा किया है.
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली की एक चुनावी यात्रा में कहा है कि सरकार बनाने पर वो सबसे कम मुमकिन दर पर पानी-बिजली देंगे.
पार्टी कह रही है, "कांग्रेस लाओ और ढेढ़ रुपये पर बिजली पाओ."
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक सभा में वोटरों से कहा कि एक क्षेत्र में एक से अधिक बिजली कंपनी की व्यवस्था होगी, ताकि उपभोक्ता ख़रीदारी कर सके जिससे सौदा बेहतर पटे.
भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली प्रदेश के मीडिया प्रभारी प्रवीण शंकर कपूर दरों को घटाने और खपत कम करने के प्रयास की बात कहते हैं.
बड़ा है मुद्दा

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हालांकि मैदान में मौजूद सभी मुख्य राजनीतिक दल बिजली और पानी पर कई तरह के वादे कर रहे हैं, लेकिन वोटर इस मामले में ‘आप’ के रिकार्ड की बात करते हैं.
एयरपोर्ट पर काम करने वाले विक्रम कहते हैं कि उनका बिजली का बिल जो एक वक़्त पांच-छह हज़ार रुपये का आता था ‘आप’ की सरकार के वक़्त 1500-1600 रुपये पर पहुंच गया था.
वो कहते हैं, "अरविंद केजरीवाल की 49 दिन की सरकार के जाते ही वो बिल वहीं पहुंच गया."
केजरीवाल की सरकार ने बिजली की दरों को कम करने के साथ-साथ बिजली वितरण की निजी कंपनियों के खातों के ऑडिट की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी.
शीला दीक्षित की पिछली कांग्रेस सरकार इन कंपनियों के ऑडिट के ख़िलाफ़ रही थी.
केजरीवाल सरकार ने प्रति परिवार 700 लीटर पानी मुफ़्त देने की घोषणा कर दी थी.
कितना फ़ायदा?

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एक युवा वोटर आरोप लगाते हैं कि इस "700 लीटर मुफ़्त स्कीम में एक पेंच था कि 701 लीटर इस्तेमाल कर लेने पर पूरे 701 का पैसा देना होता था."
भाजपा के कपूर का आरोप है कि, "केजरीवाल ने एसटी-एससी फंड का मिसयूज़ किया और सब्सिडी देकर बिल कम कर दिया, क्योंकि उन्हें मालूम था कि उन्हें बहुत दिनों तक सत्ता में नहीं रहना है."
वो कहते हैं कि, "आप नेता ने लोगों से बिल न जमा करने को कहा, जिसकी नतीजा ये हुआ कि लोगों को बाद में सरचार्ज और पेनाल्टी भरना पड़ा."
जैसे जैसे मतदान का दिन क़रीब आ रहा है नए-नए सर्वे आ रहे हैं जिसमें आप और भाजपा की बढ़ती-घटती लोकप्रियता का प्रतिशत दिखाया जा रहा है.

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हालांकि एसे सर्वे कई बार ग़लत साबित हुए हैं.
लेकिन कोई भी दल इस बार कम से कम बिजली के मुद्दे पर चूकना नहीं चाहता.
केजरीवाल ने कुछ दिनों पहले ही आरोप लगा दिया कि बिजली कंपनियों के साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय के व्यापारिक संबंध हैं.
हाल में ही अन्ना हज़ारे की पूर्व समर्थक किरण बेदी भाजपा की मुख्यमंत्री की उम्मीदवार घोषित कर दी गईं. वह हाल में ही पार्टी में शामिल हुई थीं.
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