सीरिया के लिए सबसे ख़तरनाक साल

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सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सीरिया में बीते साल 76 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए. इन आंकड़ों के आधार पर कह सकते हैं कि 2011 में शुरू हुए संघर्ष ने पिछले साल सीरिया को सबसे ज़्यादा लहूलुहान किया.
सीरिया में मानवाधिकारों पर नज़र रखने वाले ब्रिटिश संगठन द सीरियन ऑब्ज़र्वेटरी फ़ॉर ह्यूमन राइट्स का कहना है कि मारे गए लोगों में क़रीब 25 फ़ीसदी आम नागरिक हैं.
इनके अलावा सरकारी सेना के सदस्य, विद्रोही लड़ाके और जिहादी गुटों के चरमपंथी मरने वालों में शामिल हैं.
30 लाख शरणार्थी

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सीरिया की जंग ने 30 लाख से ज़्यादा लोगों को बेघर भी किया है. ये लोग जंग से बचने के लिए भाग कर सीरिया की सीमाओं के पार चले गए.
सीरिया में हर दिन घर छोड़ कर भागने पर मजबूर लोगों की तादाद दूसरे विश्व युद्ध में पेश आए शरणार्थी संकट के बाद सबसे ज़्यादा है.

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संयुक्त राष्ट्र के दर्ज किए आंकड़े बताते हैं कि 2012 की शुरुआत से ही सीरिया के पड़ोसी देशों की ओर शरणार्थियों का सैलाब आ गया.
सीरिया में विरोधी गुटों ने राष्ट्रपति बशर अल-असद को सत्ता से हटाने की मांग के साथ प्रदर्शन शुरू किया था. यही संघर्ष अब फैल कर गृहयुद्ध की शक्ल ले चुका है.
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