‘ढाई लोटे पानी से ढाई दिन माहवारी होगी’

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- Author, अदिति गुप्ता
- पदनाम, संस्थापक, मेंस्ट्रूपीडिया डॉट कॉम
मैं और मेरे पति तुहिन राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान में साथ पढ़ते थे. कोर्स का सारा काम भी साथ ही होता था.
धीरे-धीरे हम गर्लफ्रेंड और ब्वॉयफ्रेंड बने. मेरा साथी बनने के बाद तुहिन को ये अहसास हुआ कि मैं महीने के कुछ दिन बाक़ी दिनों की तरह नहीं होती.
मुझे माहवारी होती है. उन दिनों में मैं उतना हंसती नहीं हूं. उतनी ऊर्जा से भरी नहीं रहती. मुझे दर्द होता है. तुहिन को लगा कि 25 बरस की उम्र होने के बावजूद उसे इसके बारे में नहीं पता था.
उसके घर में बहन नहीं थी मां थी जिन्होंने हमेशा छिपा कर रखा कि हर महीने उनके साथ ऐसा कुछ होता है.
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मैंने ख़ुद कभी माहवारी के बारे में ज़्यादा जानने-समझने की कोशिश नहीं की जबकि मैं कर सकती थी.
मैं भी उन्हीं बातों में यक़ीन करती थी जो घरों में बताई जाती हैं जैसे उस दौरान शरीर अशुद्ध होता है.

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तुहिन ने इंटरनेट पर रिसर्च करके जानकारियां जुटाईं कि कैसे उन दिनों में दर्द को कम किया जा सकता है. क्या चीज़ें सिर्फ़ एक मिथक हैं.
फिर हमें लगा कि जब हम इतने पढ़े लिखे होकर नहीं जानते तो ऐसे कितने और लोग होंगे जिनको नहीं पता होगा.
हमने सोचा कि इसमें डिज़ाइनिंग है जो हमारा क्षेत्र है और सीधे जानकारी और शिक्षा से जुड़ा है इसलिए इसमें काम किया जा सकता है.
हमने इसे एक संचार डिज़ाइन समस्या की तरह लिया और मेंस्ट्रूपीडिया डॉट कॉम का जन्म हुआ.
दबाना-छिपाना

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मुझे जब पहली बार पीरियड्स आए तो मैं सातवीं में पढ़ती थी और स्कूल की किताब में इससे जुड़ी जानकारी आई नौवीं क्लास में. वो भी टीचर ने ना उस पर ठीक से बात की और ना ही परीक्षा में उस पर सवाल आया.
घरों में तो इस पर कोई बात होती ही नहीं है. अपने पिता और भाई जिन पुरुषों से हमारा पहला संपर्क होता है उनसे ही हमें इतना छिपाने की सलाह दी जाती है.
मां-बाप बात नहीं करते. स्कूल पर निर्भरता होती है लेकिन स्कूल में कभी उस पर ठीक से बात नहीं होती और कभी ये उलझन नहीं सुलझती.
जब पहली बार पीरियड्स होते हैं तो मां ही कहती है कि तुम इस पर बात नहीं करोगी. हमने सोचा कि इस झिझक को तोड़ना होगा.
चर्चा

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मेंस्ट्रूपीडिया पर हम पूरी कोशिश करते हैं कि माहवारी शुरू होने की जानकारियों से लेकर उससे जुड़े तमाम भ्रम और मिथक तोड़े जाएं.
पीरियड्स क्यों होते हैं, प्रक्रिया क्या है, लड़कियों को अपना ख़्याल कैसे रखना है, ये सब जानकारी उपलब्ध करवाई है.
हमने अपने पाठकों के लिए एक फ़ोरम रखा है जहां वो सारे सवाल उठा सकते हैं.
ख़ुशी ये देख कर होती है कि महिलाएं ही नहीं पुरुष भी इस बात की पैरवी करती है कि इस पर बात होनी चाहिए.
एक लड़के ने हमारे लिए लेख लिख कर कहा कि औरतों को माहवारी छिपाने की कोई ज़रूरत नहीं है.
हमारे साथ एक स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं जो अहम सवालों के जवाब देते हैं. समस्याएं सिर्फ़ पीरियड्स होने और ना होने तक सीमित नहीं हैं.
सैनेटरी पैड्स अपने आप में एक सवाल है. बहुत सारी महिलाएं इस्तेमाल नहीं करतीं. सिर्फ़ इसलिए नहीं कि मंहगा है.
जानकारी भी नहीं है या सिर्फ़ झिझक के चलते वो ख़रीदने ही नहीं जातीं.
कॉमिक

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हम जानकारी देना चाहते थे और दो बातें ध्यान में थी. पहली, सकारात्मक तरीक़े से बात पेश करनी है और लोगों को शर्म महसूस ना हो.
जब हम मेंस्ट्रूपीडिया शुरू करने से पहले शोध कर रहे थे तो हमें बहुत सारी दिलचस्प कहानियां मिलीं जैसे एक लड़की ने हमें बताया कि जब उसे माहवारी शुरू हुई तो उसकी मां ने उसे ढाई लोटे पानी से नहलाया.
ये सोच कर कि इससे ढाई दिन ही माहवारी होगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं.
डिज़ाइनर होने के नाते हम चित्रों के ज़रिए बातें कहते ही हैं तो हमने सोचा कि इन कहानियों को अगर कॉमिक की शक्ल दे दी जाए तो बहुत आसानी से जानकारी दी जा सकती है.
इन कॉमिक्स को पढ़ना भी मुश्किल नहीं होगा. लड़कियों को झिझक नहीं होगी.
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