चट तलाक पट पुनर्विवाह की महाराष्ट्र गाथा

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- Author, प्रकाश दुबे
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
महाराष्ट्र की गांव बोली में तलाक के लिए छोड़-चिट्ठी शब्द प्रचलित है. छोड़-चिट्ठी के लिए अदालत के चक्कर लगाना आवश्यक नहीं है.
शिवसेना ने भारतीय जनता पार्टी से विधानसभा चुनाव के पूर्व राजनीतिक तलाक़ लिया था.
संवाद माध्यमों की साक्षी से दोनों का काम चल गया था. तलाक़ के बाद दोनों पक्ष एक दूसरे के रहस्य उखाड़ने में जुटे.
यही खारापन अब चटपटी आत्मीयता में बदल गया है. शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना का रिश्ता जुड़ जाएगा. राजनीति में नई कथा लिखी जाएगी.
प्रतिपक्ष का नेता बनकर तीखा तेवर दिखाने वाली पार्टी पखवाड़े भर में पांच मंत्री और सात राज्यमंत्रियों की लाल बत्ती के सहारे राजनीतिक जीवन-संगी की भूमिका निभाने के लिए तैयार है.
विधानसभा चुनाव की चूक की भरपाई करते हुए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने विधायकों पर खिसकती पकड़ को मज़बूत किया है.
उद्धव के रूप में शिवसेना के पास मुख्यमंत्री की दावेदारी करने वाला चेहरा था.
उद्धव लेंगे मोदी से प्रेरणा

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नरेंद्र मोदी का अनुकरण करते हुए उद्धव ठाकरे सुभाष देसाई को अपना अरुण जेटली बना सकते हैं.
देसाई की मुश्किल यह होगी कि उन्हें पराजित करने वाली भाजपा विधायक राज्यमंत्री के रूप में शिवसेना को आईना दिखाती रहेंगीं.
कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के कुछ दलबदलू नेताओं को सत्ता मिलने पर मंत्री बनाने का आश्वासन दिया गया था. गुरुवार से ही ऐसे विधायक पलटन समेत मुंबई के कलानगर में डेरा डाले हुए हैं. बांद्रा के कलानगर में ठाकरे का निवास है.
यह सबक शिवसेना ने भली-भांति सीखा है कि दूरगामी लाभ के लिए इस समय झुकने में हर्ज नहीं है.
मुंबई महानगर पालिका से लेकर दूरदराज़ की पंचायतों तक तालमेल के भरोसे ही दोनों दल सत्ता में बने रह सकते हैं.
भाजपा की ख़्वाहिश हुई पूरी

भारतीय जनता पार्टी को राज्य में स्थिरता चाहिए, राज्यसभा में ताक़त में वृद्धि चाहिए और लोगों को यह दिखाना ज़रूरी है कि हिंदुत्व से जुड़ी शक्तियों में मनमुटाव नहीं है.
जम्मू-कश्मीर के आख़िरी चरण में भले मतदाता अहम हों लेकिन अनेक राज्यों में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन की ख़ातिर तालमेल आवश्यक था.
दोनों को छकाने वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी तालमेल कराने में मुख्य कारण बनी. भाजपा के नेता राष्ट्रवादी के साथ खड़े होने में हिचक रहे थे.
शिवसेना को सत्ता के लिए भ्रष्टाचार विरोध का बहाना मिला. कम खोकर शिवसेना ने अधिक पाया है.
बिन पानी सब सून
गुरुवार को शिवसेना प्रमुख के निवास पर पानी की क़िल्लत हो गई. मंत्री पद की चाह रखने वाले अनेक लोगों से अध्यक्ष ठाकरे नहीं मिल पाए. मुंबई में शिवसेना की सत्ता है. पानी से मतलब सिर्फ़ पानी है, राजनीतिक संदर्भ में इसे सांकेतिक प्रयोग न समझें.
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