देखिए हिमालय की ये मन मोहने वाली तस्वीरें

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अक्सर अद्भुत तस्वीरें लेने की चाहत फ़ोटोग्राफ़रों को पृथ्वी के दुर्गम इलाकों तक खींच ले जाती है. ऐसे ही एक फ़ोटोग्राफ़र हैं नील व्हाइट, जिनका ताज़ा काम नेपाल और भारत की सीमा के हिमालय के पहाड़ी क्षेत्र पर है- 'द वेव कम्स फ्राम द माउंटेन.'
यह शीर्षक ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड्स (जीएलओएफ़) से प्रेरित है.
व्हाइट का मुख्य काम तीन झीलों- इमजा तोशो, स्पोंग तोग्पो और त्शो रोल्पा और इस इलाके में ग्लोबल वार्मिंग के कारण वहाँ के दृश्यों में हुए बदलावों पर केंद्रित है.

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व्हाइट कहते हैं, "मैंने पहली बार 1996 में नेपाल के हिमालयी क्षेत्र का दौरा किया था. बर्फ से ढकी चोटियां और पहाड़ों की अद्भुत सुंदरता देखने लायक थी."
वह बताते हैं, "जब मैं 15 साल बाद दोबारा वहां गया तो मैं यह देखकर दंग रह गया कि यहां भूदृश्य में कितना बदलाव आ गया है."
व्हाइट के अनुसार, "इन झीलों की तस्वीरें लेते हुए मेरा ध्यान इनकी सुंदरता के अलावा इस बात पर भी गया कि यदि ये उफनती हैं तो कितना बड़ा विनाश कर सकती हैं."
उन्होंने 19वीं शताब्दी के इतालवी पर्वतारोही और फ़ोटोग्राफ़र <link type="page"><caption> विटोरियो सेला</caption><url href="http://www.adventure-journal.com/2011/02/pioneering-photographers-vittorio-sella/" platform="highweb"/></link> का जिक्र करते हुए कहते हैं कि उन्होंने कहा था कि "इतिहास का वह क्षण क़ैद हुआ है, जब भूदृश्य पूरी तरह अछूता था.''

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इमजा तोशो झील के पास छोटे ग्लेशियर तालाब बन रहे हैं. समय के साथ ये तालाब आकार में बड़े होते जाएंगे और लेक का हिस्सा बन सकते हैं.

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इमजा तोशो ग्लेशियर लेक के नज़दीक प्राकृतिक जलायश के पास एक और झील बन गई है.

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सघन पर्वत शृंखला के बी त्शो रोल्पा लेक.

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स्पोंग तोग्पो लेक और ग्लेशियरों से कई जल स्रोत मिलकर ये नदी बनाते हैं.

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ग्लेशियर टूटने की स्थिति में इसी स्पोंग तोग्पो नदी से पानी नीचे जाएगा.

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नीचे घाटी में स्पोंग तोग्पा लेक से आने वाले पानी का बहाव.

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इमजा तोशो के पास सबसे नज़दीक बसा गांव चुखुंग.
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