ओवैसी ने महाराष्ट्र में कैसे बनाई पैठ

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- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) अब केवल हैदराबाद में असर रखने वाली पार्टी नहीं रह गई है.
उसका राजनीतिक दायरा महाराष्ट्र विधानसभा तक भी पहुँच गया है.
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में उनके दो उम्मीदवार चुनकर आए हैं.
ज़ुबैर अहमद का विश्लेषण
एमआईएम के नवनिर्वाचित विधायक इम्तियाज़ जलील कहते हैं, "हम मुस्लिम, दलित और पिछड़े वर्गों के लोगों की आवाज़ संसद और विधान सभाओं तक पहुँचाना चाहते हैं. हम इन लोगों की आवाज़ बनना चाहते हैं"
जलील चुनाव से कुछ समय पहले तक समाचार चैनल एनडीटीवी के एक वरिष्ठ रिपोर्टर थे.
अब वह सांप्रदायिक पार्टी की छवि वाली पार्टी एमआईएम के विधायक हैं. तो इस पार्टी में शामिल होना कितना कठिन फैसला था?
भड़काऊ बयान

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चुनाव मैदान में उतरने के सवाल पर इम्तियाज़ जलील कहते हैं, "ये कोई मुश्किल फ़ैसला नहीं था. ये सोचा-समझा निर्णय था. मैं जानता था कि अगर कांग्रेस और एनसीपी में शामिल होता तो कितनी कठिनाई होती."
उनका कहना था कि वह अपने समुदाय के लोगों के लिए काम करना चाहते थे. तो क्या वह ये काम दूसरी पार्टियों में शामिल होकर नहीं कर सकते थे?
जिस पार्टी के नेताओं पर भड़काऊ बयान देने के इल्ज़ाम लगते रहते हैं और जिसकी छवि एक सांप्रदायिक पार्टी की है, उसमें शामिल होना ज़रूरी था?
वह बोले, "एमआईएम एक सांप्रदायिक नहीं, धर्मनिरपेक्ष पार्टी है."
वो कैसे? इस पर वह कहते हैं, "अगर ये कम्यूनल पार्टी होती तो मुसलमानों के साथ दलितों को टिकट न देती."
बेहतर प्रदर्शन

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अब तक हैदराबाद तक सीमित रही एमआईएम ने महाराष्ट्र में पहली बार विधान सभा का चुनाव लड़ा.
पार्टी ने पुराने चेहरों को खारिज करते हुए इम्तियाज़ जलील जैसे पत्रकार और मुहम्मद रफ़ी के बेटे शहीद रफ़ी जैसे ग़ैर-विवादास्पद व्यक्तियों के साथ मुसलमान और दलित समाज के कई लोगों को चुनाव में उतारा था.
महाराष्ट्र में कुल 24 सीटों पर पार्टी ने अपने उम्मीदवार उतारे थे. अपने पहले ही चुनाव में एमआईएम ने राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना जैसी स्थानीय पार्टियों से बेहतर प्रदर्शन करके सबको हैरान कर दिया.
दो सीटें जीतने के अलावा पार्टी पांच सीटों पर दूसरे नंबर पर और नौ पर तीसरे स्थान पर रही.
नया प्रयोग

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इम्तियाज़ जलील इस कामयाबी का राज़ बयान करते हुए कहते हैं कि मुस्लिम-दलित इलाक़ों और वोटरों पर ध्यान देने का पार्टी का प्रयोग कामयाब रहा.
उनका कहना था, "अब तक कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस ने मुसलमानों और दलितों को वोट बैंक की तरह से इस्तेमाल किया है लेकिन जब सत्ता में भागीदारी की बात आती है तो उन्हें अलग रखा जाता है."
उनके अनुसार उनकी पार्टी इन दो समुदायों और पिछड़े वर्ग के लोगों के हित में काम करेगी
चुनावी मुहिम के दौरान पार्टी के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी और उनके विवादास्पद भाई अकबरुद्दीन ओवैसी ने कांग्रेस और एनसीपी पर प्रहार किया जबकि बीजेपी और शिवसेना पर हमला करने से परहेज़ किया.
पार्टी का विस्तार

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जवाब में कांग्रेस और एनसीपी ने एमआईएम को 'बीजेपी का एजेंट' कहा.
इससे पहले एमआईएम केवल हैदराबाद और तेलंगाना में चुनाव लड़ती आई है. महाराष्ट्र में केवल एक बार यानी 2012 में नांदेड़ नगर पालिका के चुनाव में भाग लिया था जिसमें उसे 11 सीटें मिली थीं.
इम्तियाज़ जलील के अनुसार उनकी पार्टी दूसरे राज्यों में अपने विस्तार के अलावा महाराष्ट्र के नगरपालिका चुनावों में भी भाग लेगी.
विशेषज्ञों के अनुसार अगर पार्टी मुस्लिम और दलित समुदायों को आकर्षित करने में कामयाब हुई तो इससे कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी जैसी पुरानी पार्टियों को नुकसान होगा.
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