श्रमिकों के कार्यक्रम से यूनियनें नदारद

मोदी, श्रमेव जयते योजना

इमेज स्रोत, EPA

    • Author, सलमान रावी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

भारतीय मज़दूर संघ सहित लगभग सभी श्रमिक संगठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शुरू किए गए पंडित दीनदयाल उपाध्याय श्रमेव जयते कार्यक्रम से खुश नज़र नहीं आ रहे हैं.

इस कार्यक्रम के तहत श्रम सुविधा पोर्टल, कंपनियों के लिए यूनिफाइड लेबर इन्सपेक्शन स्कीम और भविष्य निधि जमा करने वाले कर्मचारियों के लिए एक समान अकाउंट नंबर की योजना शुरू करने की घोषणा की गयी है.

मगर श्रमिक संगठनों का कहना है कि यह योजना मज़दूरों की बजाय मालिकों के हितों की रक्षा करने वाली ही बनकर जाएगी.

श्रमिक संगठनों की पहली आपत्ति यह है कि ऐसा पहली बार हुआ है जब श्रम मंत्रालय ने कोई राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किया और उसमे श्रमिकों को ही ना बुलाया गया हो.

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी से सम्बद्ध आल इण्डिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी) के जीएल धर का कहना था कि सरकार ने यह आश्वासन दिया था कि वो श्रमिक संगठनों की सलाह लेगी मगर ऐसा नहीं हुआ.

मोदी श्रमेव योजना

इमेज स्रोत, EPA

उनका कहना है, "सरकार की श्रमिक संगठनों से राय मशविरे के बाद जो आम सहमति बनेगी उसके आधार पर ही वो आगे बढ़ेगी. मगर इन्होंने हमसे कुछ पूछा भी नहीं. विज्ञान भवन के कार्यक्रम में उद्योगपति तो मौजूद थे, मगर श्रम संगठनों से किसी को भी नहीं बुलाया गया. यह श्रमिकों की बेइज़्ज़ती है."

मजदूर संघ भी नाराज़

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से सम्बद्ध भारतीय मज़दूर संघ का कहना है कि उद्योगपतियों के इशारे पर मज़दूरों के अधिकारों की अनदेखी ठीक नहीं है.

संघ के अध्यक्ष वृजेश उपाध्याय कहते हैं कि सरकार का प्रस्ताव इंस्पेक्टर राज को ख़त्म करने का है जो ठीक नहीं है क्योंकि उद्योगों पर किसी तरह का कोई नियंत्रण नहीं रह जाएगा.

"इंस्पेक्टरों के कारण जगहों पर मज़दूरों के हितों रक्षा भी हो जाया करती थी. कई जगहों पर इसका दुरुपयोग था, इसमें भी कोई दो राय नहीं है. उद्योगों या उद्योगपतियों के इशारे पर कि भाई हम सब खत्म कर देंगे. काम की कोई सुरक्षा नहीं रहेगी, कोई क़ानून नहीं रहेगा, कोई इन्स्पेक्टर आपको पूछने नहीं आएगा. ये ठीक नहीं है."

श्रम कानून के उल्लंघन को बढ़ावा

मोदी की श्रमेव जयते योजना

इमेज स्रोत, PIB

इमेज कैप्शन, श्रमेव जयते योजना के जरिए सरकार ज़्यादा से ज़्यादा प्रशिक्षण देने पर बल देना चाहती है.

भारतीय मज़दूर संघ के अध्यक्ष का कहना है कि सरकार ज़्यादा से ज़्यादा प्रशिक्षण देने पर बल देना चाहती है जो अच्छी बात है. मगर उनका कहना है कि प्रशिक्षण की आड़ में श्रम क़ानून के उल्लंघन को ही बढ़ावा मिलेगा.

वहीं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की मज़दूर इकाई यानी सेंटर फॉर इंडियन ट्रेड यूनियंस के तपन सेन का आरोप है कि मज़दूर अब पूरी तरह से मालिकों के रहमो-करम पर रहने को मजबूर हो जाएंगे.

ट्रेड यूनियन श्रम क़ानूनों में प्रस्तावित बदलाव के खिलाफ गोलबंद हो रहे हैं.

भारतीय मज़दूर संघ सहित देश की सभी प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने आगामी 5 दिसंबर को श्रम क़ानूनों में होने वाले बदलाव के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने की घोषणा की है.

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां <link type="page"><caption> क्लिक करें</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link>. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और<link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>