मोदी के निशाने पर क्यों हैं पवार?

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- Author, प्रकाश दुबे
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जमकर प्रचार कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार पर निशाना साधने का कोई मौका नहीं चूक रहे हैं.
रविवार को भी महाराष्ट्र विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष विनोद तावड़े के पक्ष में प्रचार करने बोरीवली पहुंचे मोदी ने जानबूझकर पवार पर निशाना दागा.
तीन दिन पहले मोदी ने पवार के गढ़ बारामती में कहा, "चाचा-भतीजे की लूट समाप्त करना है. गुलामी से मुक्त होकर स्वराज्य लाना है."
पिंपरी में मोदी ने कहा, "राकांपा के चुनाव चिह्न घड़ी में दस बजकर दस मिनट समय है. इसका मतलब है दस बार भ्रष्टाचार."
मुंबई में उन्होंने कहा, "आप समझबूझ कर मताधिकार का प्रयोग करें. घड़ी बंद है. चुनाव के बाद इस पार्टी का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा."
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हालांकि मोदी के पवार के गढ़ में जाकर उन्हें चुनौती देने के कई कारण हैं. बारामती में शरद पवार के भतीजे अजित पवार किस्मत आजमा रहे हैं.
मोदी ने पवार की मराठा-महानायक की छवि तोडऩे के लिए पशुपालक समुदाय के उम्मीदवार के पक्ष में बारामती में जाकर वंचितों के हित की बात की.

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मोदी का कहना है कि पवार की पार्टी अस्ताचल की ओर जा रही है.
सर्वेक्षण भाजपा को 288 में से 120 विधानसभा क्षेत्रों में आगे बता रहे हैं.
चुनावी आकलन के हिसाब से बहुमत से थोड़ा पिछडऩे पर भाजपा के समक्ष तीन विकल्प होंगे.
तालमेल
पहला यह कि वह शिवसेना से तालमेल करे. दो दर्जन से कम विधायकों की आवश्यकता पड़ने पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सहयोग करने के लिए आतुर होंगे.
पवार पर भाजपा के कोप का एक कारण और भी है. त्रिशंकु जनादेश आने पर शिवसेना के लिए राहत की स्थिति हो सकती है.
उद्धव ठाकरे को राकांपा ने सपना देखने और उसमें रंग भरने के लिए उकसाया है.

शिवसेना, मनसे और राकांपा की तिकड़ी भाजपा को सरकार बनाने से रोकने की स्थिति में आती है तो बाहर रहकर परोक्ष समर्थन देने में कांग्रेस को आपत्ति नहीं होगी.
यह तभी होगा, जब शिवसेना कांग्रेस को पीछे छोड़कर दूसरे स्थान पर रहे.
ख़तरा
इस ख़तरे को भांपकर भाजपा ने राष्ट्रवादी वोटों को झपटने के लिए मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश से दो हजार कार्यकर्ता महाराष्ट्र में झोंक दिए हैं.
मोदी को लगता है कि वक़्त राकांपा के बिखराव का है. तालमेल से नहीं, टूटकर आने वाले निर्वाचित धड़े के साथ सहयोग करना भाजपा पसंद करेगी.

चुनौती से चौकन्ने शरद पवार ने उद्धव के महाराष्ट्र प्रेम की प्रशंसा की.
ख़बर है कि राकांपा के लंगर से मनसे ही नहीं, इस बार शिव सेना के उम्मीदवार भी भूख मिटा रहे हैं. राकांपा इसे निवेश कह सकती है.
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