शशि थरूर पर चढ़ीं कांग्रेसी त्यौरियाँ

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कांग्रेस पार्टी ने लगभग चेतावनी भरे अंदाज में तिरुवनंतपुरम से अपने सांसद शशि थरूर से कहा है कि 'वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा से बाज आएं'.
दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'स्वच्छ भारत अभियान' में शामिल होने के लिए जिन नौ लोगों को आमंत्रित किया उनमें एक शशि थरूर भी थे. इसके बाद थरूर ने ट्वीट किया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कैंपेन में शामिल होने का न्यौता पाकर 'बेहद गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं'.
इसके बाद कांग्रेस प्रवक्ता संदीप दीक्षित ने कहा है, "चाहे वो शशि थरूर हों या कोई और शख्सियत, वे किसी तरह का रुख़ अख्तियार करने से पहले ये देख लें कि किसी को निमंत्रित करने के पीछे सरकार की मंशा क्या है."
दीक्षित ने कहा, "विपक्ष के लोगों को बुलाना एक बात है, लेकिन यदि किसी स्कीम के लिए ब्रांड एंबेसडर के रूप में लेबल किया जा रहा है तो सावधानी बरतनी होगी. इसके राजनीतिक पहलू हो सकते हैं."
भाजपा नहीं, भारत समर्थक हूँ!

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इसके बाद शशि थरूर ने अपने फेसबुक अकाउंट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा है, "कोई मुझे भाजपा समर्थक कैसे कह सकता है. मैं चकित हूं. मैं पिछले 30 वर्षों से भारत के बहुलतावाद में अपनी आस्था पर लिखता और भारत के बारे में विचार जाहिर करता रहा हूं."
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने फेसबुक पर लिखा, "भाजपा नेता के किसी काम या खास बयान से किसी व्यक्ति के प्रभावित होने का ये मतलब कतई नहीं है कि उसने पार्टी के महत्वपूर्ण हिंदुत्व एजेंडे को स्वीकार कर लिया है. प्रधानमंत्री की इस गुजारिश का संबंध किसी तरह की राजनीति से नहीं है. मैंने इसे ऐसे ही लिया है. मुझे कांग्रेसी होने पर गर्व है. मैं भाजपा नहीं, भारत समर्थक हूं!"
फिर संदीप दीक्षित का बयान आने के बाद शशि थरूर ने नियंत्रण रेखा पर हुई गोलीबारी को लेकर भाजपा की तुरंत आलोचना भी कर दी. थरूर ने ट्वीट किया, "पाकिस्तानी गोलीबारी में पाँच लोगों की मौत और 50 लोगों के घायल होने की ख़बर काफ़ी परेशान करने वाली हैं. जब से भाजपा सत्ता में आई है 100 से ज़्यादा बार संघर्ष विराम का उल्लंघन हुआ है."
केरल कांग्रेस उपाध्यक्ष और प्रवक्ता एम एम हसन ने सोमवार को बताया कि शशि थरूर मोदी की प्रशंसा कई दिनों से कर रहे हैं.
वे कहते हैं, "बात केवल 2 अक्टूबर की नहीं है. थरूर कुछ दिनों से मोदी की प्रशंसा बढ़-चढ़ कर करते दिख रहे हैं."
शशि थरूर ने साल 2009 में जब तिरुवनंतपुरम् से पहली बार जीत हासिल की, तभी से वे पार्टी के स्थानीय नेतृत्व से अलग-थलग ही रहे.
साल 2014 के चुनाव में हुए लोकसभा चुनाव में थरूर जीते तो जरूर मगर उनको मिले मतों की संख्या में भारी कमी देखी गई.
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