घुसपैठ से हिंदू समाज ख़तरे में: भागवत

मोहन भागवत, संघ प्रमुख

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि विविधताओं को स्वीकार करने से ही मानवता का विकास संभव है.

विजयादशमी के मौक़े पर नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय में होने वाले सालाना कार्यक्रम के दौरान अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने ये बातें कहीं. लगभग एक घंटे से थोड़ा अधिक समय तक चले अपने भाषण में उन्होंने कई मुद्दों का ज़िक्र किया.

उनके संबोधन को दूरदर्शन पर लाइव प्रसारित किया गया.

हर साल विजय दशमी के मौक़े पर संघ प्रमुख स्वंयसेवकों को संबोधित करते हैं जिसमें वो संगठन की नीतियों और विचार के बारे में बातचीत करते हैं.

1925 में विजयदशमी के दिन ही हेडगेवर ने आरएसएस की स्थापना की थी.

मोहन भागवत के संबोधन की कुछ ख़ास बातें

मोहन भागवत ने कहा कि प्रकृति ने मनुष्य को अलग-अलग बनाया है इसलिए किसी को पराया मानना और अपने मत को थोपना सही नहीं है.

हाल के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मिली सफलता का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समाज ने बदलाव लाने की ठानी थी और बदलाव लाकर दिखाया.

संघ प्रमुख ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल की अमरीका यात्रा के दौरान भारतीय मूल के लोगों का उत्साह साफ़ दिख रहा था.

भारत प्रशासित कश्मीर में हाल में आई बाढ़ का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि संकट के समय पूरा समाज एक हो गया था और सभी ने पीड़ितों की मदद की. उन्होंने केंद्र सरकार के राहत कार्यों की भी तारीफ़ की.

कमल

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इमेज कैप्शन, भाजपा और आरएसएस में ख़ास संबंध

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में अकेला ऐसा देश है जिसने स्वार्थ के बग़ैर मानवता को सुख शांति का रास्ता दिखाया है.

उन्होंने कहा कि दुनिया जीडीपी की बात करती है लेकिन भारत के लिए तो केवल एक ही मानक है. उनके अनुसार आख़िरी पंक्ति में खड़े आख़िरी व्यक्ति को सुरक्षित और संपन्न करना होगा.

भागवत ने पश्चिम बंगाल, असम और बिहार का ज़िक्र करते हुए कहा कि वहां विदेशी घुसपैठ हो रही है और राज्य सरकारें वोट की लालच के कारण उन पर कोई रोक नहीं लगाती हैं.

उन्होंने कहा कि घुसपैठ के कारण हिंदू समाज का जीवन ख़तरे में पड़ने की स्थिति हो गई है. उन्होंने कहा कि पुशओं के मांस से पैसा नहीं कमाया जाना सकता. उन्होंने पशु मांस के निर्यात पर पाबंदी लगाने की मांग की.

चीन के बारे में उन्होंने कहा कि समाज को स्वदेशी का आचरण करना होगा और चीन के बने माल को इस्तेमाल करना छोड़ना होगा.

नक्सलवाद का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समाज के एक हिस्से का शोषण समाज ही करता है जिसके ख़िलाफ़ समाज को खड़ा होना चाहिए.

समाज में भेदभाव के बारे में उन्होंने कहा कि सामाजिक भेदभाव को सरकार पूरी तरह ख़त्म नहीं कर सकती. उनके अनुसार मन से भेदभाव हटाने का काम केवल समाज ही कर सकता है.

उन्होंने साफ़ कहा कि सरकार हर काम नहीं कर सकती और समाज को इसके लिए आगे आना होगा.

इस मौक़े पर उन्होंने मंगलयान कार्यक्रम से जुड़े वैज्ञानिकों और एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों का अभिनंदन भी किया.

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