क़ानून से मिलेगा बुज़ुर्गों को उनका हक़?

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- Author, नीरज सिन्हा
- पदनाम, रांची से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
कभी वह रेलवे स्टेशन पर भटकती मिली थीं, अब बरसों से वृद्धाश्रम में रह रही हैं. लेकिन इसे वो अपनी तकदीर का हिस्सा मानती हैं. उम्र सौ के पार लेकिन ज़ेहन में अब भी बहुत सी बातें हैं.
झारखंड की राजधानी रांची के एक वृद्ध आश्रम में रहने वाली करुणा देवी की पीड़ा है कि अब ज़माना बदल गया.
झारखंड सरकार ने <link type="page"><caption> वृद्ध माता-पिता</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/07/130705_elderly_senior_citizens_retirement_homes_sy.shtml" platform="highweb"/></link> की देखरेख को अनिवार्य कर दिया है, वरना उनके बच्चों को माता पिता का गुज़ारा भत्ता देना होगा.
इस पर करुणा देवी कहती है, ''मैं बेटे के पास चली जाउंगी, वो क्यों भरेगा पैसा?''
हालांकि बेटे ने लंबे समय से उनकी खोज-ख़बर नहीं ली.
राज्य सरकार ने माता-पिता, वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण नियमावली 2014 को मंजूरी दे दी है.
इसके तहत वृद्ध माता-पिता ने शिकायत की तो सरकार उन्हें अधिकतम दस हज़ार रुपए महीना तक गुज़ारा भत्ता दिलाएगी.
'सख़्ती से होगा लागू'

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झारखंड की समाज कल्याण मंत्री अन्नपूर्णा देवी कहती हैं, ''<link type="page"><caption> वृद्ध</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/06/120615_old_age_vd.shtml" platform="highweb"/></link> माता-पिता को संरक्षण देने की कोशिशें जरूरी हैं. इस नियमावली का सरकार सख़्ती से पालन कराएगी. जल्दी ही ट्राइब्यूनल, राज्य परिषद और जिला स्तर पर कमेटी का गठन होगा.''
वो बताती हैं, ''नियमावली में इसका उल्लेख है कि पक्षकार को जो भी रकम देनी होगी, वो उनके परिवार के सदस्यों की संख्या से विभक्त करते हुए उनकी मासिक आय से अधिक नहीं होगी.''
रांची की एक वृद्ध महिला ऊषा बताने लगीं, ''पति नहीं रहे और बेटा तो शादी के बाद से एकदम बदल गया. बेटी-दामाद बड़े भले हैं, जो यहां आकर देख जाते हैं. वे ही ख़र्चे भी उठाते हैं.''
बेटे से गुज़ारा भत्ता लेने का आवेदन करेंगी, यह पूछने पर वो ख़ामोश हो जाती हैं.
चुनौती

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समाज कल्याण मंत्री बताती हैं कि प्राकृतिक आपदा या अन्य आपात घटनाओं में वरिष्ठ नागरिकों को सहायता और राहत पहुंचाना भी ज़रूरी होगा.
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष महुआ माजी बताती हैं, ''आए दिन आयोग के सामने शिकायतें आती हैं कि बेटे-बहू, मां-बाप की अनदेखी कर रहे हैं.''
वो कहती हैं, ''जब किसी वृद्ध माता की शिकायत आती है कि बहू, पति पर एकाधिकार समझते हुए उनसे अलग कर रही है, तो अधिक तक़लीफ़ होती है.
वो कहती हैं कि गुज़ारे भत्ते का कदम अच्छा है, ज़रूरत है इसे लागू कराने की.
(बुजुर्गों के नाम बदल दिए गए हैं.)
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