तो इसलिए याद नहीं रहता बुज़ुर्गों को!

- Author, जेमस गैलागर
- पदनाम, बीबीसी स्वास्थ्य और विज्ञान संवाददाता
इंसान के दिमाग़ में अगर प्रोटीन का स्तर गिरता है तो इसका सबसे पहला असर होता है याददाश्त पर. प्रोटीन की कमी से याददाश्त कमज़ोर हो सकती है.
अमरीकी शोधकर्ताओं ने यह अनुमान चूहों पर एक शोध से मिले नतीजों के आधार पर जताया है. उम्मीद की जा रही है कि इस खोज के बाद भूलने की प्रक्रिया रोकने के लिए कारगर उपाय किए जा सकेंगे.
हालांकि चूहों पर किए गए प्रयोगों के नतीजों को मनुष्य के लिए उपयोगी बनाने में एक लंबा फासला तय करना होगा.
जर्नल साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसीन में प्रकाशित शोध के अनुसार उम्र बढ़ने के साथ <link type="page"><caption> याददाश्त</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130823_american_speaking_sweadish_only_rd.shtml" platform="highweb"/></link> जाने का अल्ज़ाइमर बीमारी से कोई संबंध नहीं है.
कोलंबिया विश्वविद्यालय मेडिकल सेंटर की टीम ने आठ मृत लोगों के मस्तिष्क के विश्लेषण से अपना अध्ययन शुरू किया. सभी मृतकों की उम्र 22 से 88 साल के बीच थी. इऩ लोगों ने अपना मस्तिष्क चिकित्सा शोध के लिए दान दिया था.
वैज्ञानिकों को ऐसे 17 जीन मिले, जिनका स्तर उम्र के अनुसार अलग-अलग था. इनमें से एक जीन के अंदर आरबीएपी-48 नामक प्रोटीन के निर्माण की सूचना होती है. उम्र बढ़ने के साथ साथ इस प्रोटीन की सक्रियता कम होती जाती है.
याददाश्त में वृद्धि

स्मृति परीक्षण में पाया गया कि जिन नौजवान चूहों में जेनेटिक तरीके से आरबीएपी-48 का स्तर घटाया गया था उनकी <link type="page"><caption> याददाश्त</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/08/130812_dolfin_long_memory_vt.shtml" platform="highweb"/></link> उम्रदराज़ चूहों जितनी ख़राब थी.
जबकि आरबीएपी48 का स्तर बढ़ाने वाले जीवाणु के प्रयोग से उम्रदराज़ चूहों की याददाश्त बेहतर हो गई और उनकी याददाश्त में आने वाली कमी भी रुक गई.
इस टीम के एक शोधकर्ता प्रोफ़ेसर एरिक कैंडल ने कहा, "यह खोज बहुत उत्साहजनक है कि हम चूहों में याददाश्त की कमी होने की प्रक्रिया पलट सकते हैं."
"इससे कम से कम इतना तो पता चला ही है कि यह प्रोटीन <link type="page"><caption> याददाश्त</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2011/07/110726_sleep_memory_mg.shtml" platform="highweb"/></link> की कमी का एक बड़ा कारण है. यह हमें बताता है कि उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त में आने वाली कमी के लिए न्यूरॉन में आने वाले कुछ परिवर्तन ज़िम्मेदार हैं. यह मामला अल्ज़ाइमर से अलग है क्योंकि उसमें न्यूरॉन को कोई क्षति नहीं पहुंचती."
अभी तक यह नहीं पता चला है कि अत्यधिक जटिल मानव मस्तिष्क में आरबीएपी-48 का स्तर किन बातों पर निर्भर होता है और इसके स्तर को सुरक्षित तरीके से बदला जा सकता है कि नहीं.
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