पानी-पानी कश्मीर में पीने के पानी की कमी

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जम्मू-कश्मीर में बाढ़ की वजह से मरने वालों की संख्या 200 तक जा पहुँची है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ़ जम्मू में 193 लोग मारे गए हैं और श्रीनगर से संपर्क न होने के कारण वहां मरने वालों की संख्या के बारे में पुख़्ता जानकारी नहीं मिल पा रही है.

बीबीसी संवाददाता फ़ैसल मोहम्मद अली ने बताया है कि भगवती नदी पर बना पुल टूट गया है. रजौरी, ऊधमपुर, पुंछ और कठुआ इलाके बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं.

राज्य के जम्मू डिवीज़न के कमिश्नर शांत मनु ने बीबीसी को बताया, ''143 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. करीब पचास लोग लापता हैं, जिनके मारे जाने की हमें आशंका है क्योंकि उनके शव हमें नहीं मिले हैं. तो हम लोग 193 या 194 मौतों का आँकडा लेकर चल सकते हैं. पहली रिपोर्ट जो आई है उसके अनुसार 15,000 मकान पूरी तरह से गिर चुके हैं.''

बीबीसी संवाददाता के अनुसार बाढ़ के कारण श्रीनगर से संपर्क टूट गया है और वहां किसी से बातचीत नहीं हो पा रही है.कई इलाके जो ऊंची जगहों पर बसे हैं वहां प्रशासन नहीं पहुंच पाया है.

श्रीनगर जाने वाली सड़क कुछ दूरी तक खुली है लेकिन राजधानी के हवाई अड्डे से श्रीनगर शहर तक नहीं जाया जा सकता है. ख़बरें हैं कि आबादी का कुल 30 फीसदी हिस्सा पूरी तरह से सैलाब में प्रभावित है.

जम्मू और श्रीनगर में पानी का स्तर कम हो रहा है लेकिन डल झील में पानी बढ़ रहा है.

पानी की कमी

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अनंतनाग में लोगों के पास रसद की कमी तो नहीं है लेकिन पीने के पानी और दवाई की कमी से उन्हें जूझना पड़ रहा है.

एक आम नागरिक मीनू पट्टी ने बताया है कि अब तक वे शेरबाग झील का पानी पी रहे थे लेकिन अब उसका पानी भी गंदा हो चला है.

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प्रभावित इलाकों में बिजली कटी हुई है, जिसकी वजह से लोग अपने मोबाइल चार्ज नहीं कर पा रहे हैं, ऐसे में इन लोगों का अपने रिश्तेदारों से संपर्क करने का जरिया भी नहीं है.

चेतावनी

सरकार का कहना है कि ये प्राकृतिक आपदा है और इस बारे में लोगों को चेतावनी दी गई थी. लेकिन लोगों का कहना है कि सरकार इस तरह की आपदा के लिए तैयार नहीं थी और जिस तरह की चेतावनी दी गई थी वो स्पष्ट नहीं थी, जिससे लोग अब संकट में फँस चुके हैं.

कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन कहती हैं, "राज्य प्रशासन इस तरह की त्रासदी से निपटने के लिए तैयार नहीं था. ये लोग आकलन सही से नहीं कर पाए साथ ही संसाधनों की कमी थी. रविवार को कश्मीर के कई इलाकों में जब 12-12 फीट से पानी ऊपर चढ़ा तो इनके पास नावें नहीं थीं. शनिवार को चेतावनी दी गई कि आप घर खाली कर अपने-अपने रिश्तेदारों के घर चले जाएँ और रहने का दूसरा कोई विकल्प नहीं दिया गया."

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उधर इंजीनियरिंग छात्रों ने इम्तिहान की तारीख़ को बढ़ाने की मांग की है. शांत मनु का कहना है कि राहत काम तेज़ी से चल रहा है. साफ पीने के पानी के लिए क्लोरिन की गोलियां दी जा रही हैं और स्वास्थ्य कैंप भी लगाए जाएंगे.

भारतीय सेना के करीब 20 हज़ार जवान, 45 विमान और हेलिकॉप्टर बचाव और राहत कार्य में लगे हुए हैं. केंद्र सरकार ने दावा किया है कि अब तक 47 हज़ार लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा चुका है.

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