बाढ़ बढ़ाती है जिनका कारोबार

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- Author, रोहित घोष
- पदनाम, कानपुर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
क्या बाढ़ भी कभी किसी के लिए कारोबार का मौका हो सकती है?
उत्तर भारत के कुछ इलाकों में बाढ़ के दिनों में नाव के बगैर एक कदम भी आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है.
कानपुर के नन्हे केवट पुश्तों से नाव का बनाने का काम करते हैं.
कानपुर से स्थानीय पत्रकार रोहित घोष ने नन्हे केवट की ज़िंदगी में झांकने की कोशिश की है.
नन्हे केवट की कहानी
नन्हे केवट कानपुर में गंगा किनारे बसे सरसैया घाट पर नाव बनाने में रात-दिन जुटे हैं.
जिंदगी के 50 साल देखे चुके नन्हे केवट कहते हैं, "अगर मैं आराम करने की सोचूं तो बाढ़ में फंसे लोगों की जान कैसे बचेगी?"

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नन्हे केवट का परिवार कुछ और परिवारों के साथ कानपुर के सरसैया घाट पर दो-तीन सदी पहले आकर बसा था.
सभी परिवार नाव चलाने और नाव बनाने का काम करते थे.
लोहे की चादर
कानपुर के आसपास के ज़िलों में जब भी बाढ़ आती है तो लोगों को बचाने के लिए प्रशासन, पुलिस और पंचायत के लोग नाव खरीदने कानपुर के सरसैया घाट आते हैं.

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नन्हे केवट कहते हैं, "मेरी बनाई हुए नाव कई जगह जाती है, जैसे- रामपुर, गोरखपुर, झाँसी आदि."
उत्तर प्रदेश में नावें सिर्फ दो जगहों पर बनाई जाती है, कानपुर और इलाहाबाद.
दोनों जगहों की नावों में फ़र्क होता है. कानपुर में नाव लोहे की चादर से वहीं इलाहाबाद में लकड़ी से बनती है.

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नन्हे केवट बताते हैं, "मैंने अपने दादा और पिता को नाव बनाते देखा है. मैंने कभी कुछ और काम करने के बारे में सोचा ही नहीं."
नाव ही सहारा
नन्हे केवट की ज़्यादातर नावें 12 फ़ीट लंबी और छह फ़ीट चौड़ी होती हैं.

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ऐसी नाव बनाने में उनको चार दिन का समय चाहिए होता है और इसकी क़ीमत 12,000 रुपए होती है. ऐसी नाव में 12 लोग आराम से बैठ सकते हैं.
नन्हे केवट एक महीने या एक साल में कितनी नाव बनाते हैं, इसका हिसाब वो नहीं रखते.
भारी बारिश

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कानपुर के चंद्रशेखर आज़ाद कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉक्टर अनिरुद्ध दूबे कहते हैं, "प्रदेश की ज़मीन का ढलान पश्चिम से पूरब और उत्तर से दक्षिण की ओर है. इसलिए पूर्वी, दक्षिणी और तराई क्षेत्र में बाढ़ का खतरा बना हुआ है."
वो बताते हैं, "यूपी में ज़्यादातर नदियां पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं. उत्तराखंड में बारिश हुई तो पश्चिम उत्तर में बाढ़ आ जाती है. अगर पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश में भारी बारिश होगी तो पूर्व के ज़िलों में बाढ़ का ख़तरा बढ़ जाता है."
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