होली गीतों पर हावी हो गई अश्लीलता!

इमेज स्रोत, MANISH SHANDILYA
- Author, मनीष शांडिल्य
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
रंग और पकवानों की तरह गीतों के बिना भी लोक पर्व होली की कल्पना नहीं की जा सकती. होली के कुछ हफ़्तों पहले से ही ढोल-मंजीरे के साथ टोलियां बनाकर होली गाए जाने लगती है.
होली के दिन घर-घर में गीत गाते हुए, फाग गाते हुए ही रंग-अबीर लगाने, पुए-पकवान खाने की परंपरा रही है. लेकिन अब धीरे-धीरे गांवों-शहरों में सामूहिक रूप से होली गाने-बजाने की परंपरा की यह डोर कमजोर पड़ रही है.
इस ख़ालीपन को भरने के लिए अब इस मौसम में होली गीतों से सजे ऑडियो और वीडियो एल्बम बड़ी संख्या में बाजार में आ जाते हैं. भोजपुरी म्यूज़िक एल्बमों की बात करें तो इस बार होली में बाजार में 50 से अधिक एल्बम विभिन्न म्यूज़िक कंपनियों ने बाज़ार में उतारे हैं.
समाजशास्त्र
लेकिन भोजपुरी म्यूज़िक फ़ैक्ट्री से फटाफट निकलने वाले इन गीतों में ज़्यादातर चटपटे गाने होते हैं. इनके गीतों के बोल दोअर्थी होते हैं. वीडियो एल्बमों में इनका फ़िल्मांकन बहुत ही अश्लील तरीक़े से किया जाता है.
<link type="page"><caption> (आज ब्रज में होली रे.....)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2014/03/140316_braj_holi_barsane_gallery_rd.shtml" platform="highweb"/></link>
ये कितने भड़काऊ होते हैं इसका अंदाज़ा इन एल्बमों के नाम से भी लगाया जा सकता है. रंग ढोढ़ी में जाता की ना, होली में हिला के डाली, भऊजी होली में हिलेली, पाछा से डालल ठीक नइखे - ये कुछ नाम इस बार बाज़ार में आई होली एल्बमों के हैं.
ऐसा नहीं है कि पहले इस तरह के होली गीत नहीं बनते थे. ऐसे भड़काऊ गीत एक ख़ास वर्ग को ध्यान में रखकर पहले भी तैयार किए जाते थे.

इमेज स्रोत, MANISH SHANDILYA
इस संबंध में बिदेसिया डॉट को डॉट इन के मॉडरेटर निराला कहते हैं कि भोजपुरी भाषी इलाक़ों की एक बड़ी आबादी रोज़गार के सिलसिले में बड़े पैमाने पर पलायन करती रही है. ऐसे लोगों की यौन कुंठाओं को शांत करने के लिए धीरे-धीरे ऐसे गीत पेश किए जाने लगे.
लेकिन निराला यह भी याद दिलाते हैं कि ऐसे गीतों को सुनने वाला एक ख़ास वर्ग था और इनका सामान्यीकरण नहीं हुआ था. अस्सी के दशक के आस-पास इनकी सार्वजनिक प्रस्तुतियों का विरोध भी किया जाता था.
लेकिन अब डिजिटल जमाने में 'वर्गीय' सीमाएं टूट रही हैं. बच्चों की आवाज़ तक में कामुक गीत रिकॉर्ड किए जा रहे हैं और बैठक-चर्चा में विरोध और चिंता जताने के अलावा समाज कोई ठोस प्रतिवाद नहीं कर रहा है.
तकनीक दिखाएगी रास्ता
आज बाज़ार में उपलब्ध ज़्यादातर एल्बमों के गीत इतने भड़काऊ होते हैं कि कई बार महिला यात्रियों को ऑटो और सार्वजनिक बसों में इन्हें बंद करवाने के लिए आवाज़ उठानी पड़ती है.
<link type="page"><caption> (ये रंग गुलाबी है...) </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2014/03/140309_gulal_spring_festival_holi_vs.shtml" platform="highweb"/></link>
बाजार में ऐसे गीतों की भरमार का कारण बताते हुए मशहूर लोक गायिका पदमश्री शारदा सिन्हा कहती हैं, 'गीतकार, गायक से लेकर कंपनियां तक सस्ती लोकप्रियता के पीछे भाग रहे हैं. वह कम मेहनत और निवेश में ज़्यादा-से-ज़्यादा कमाने की होड़ में ऐसे एल्बम बाज़ार में लाते हैं.'

इमेज स्रोत, MANISH SHANDILYA
अश्लीलता के काले बादलों से घिरते जा रहे भोजपुरी होली गीतों के बीच आशा की किरण क्या हो सकती है?
इस सवाल के जवाब में शारदा सिन्हा कहती हैं, 'हमें उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए. वर्तमान में भोजपुरी गीतों पर भौंडेपन और अश्लीलता की परत ज़रूर चढ़ गई है लेकिन समय के साथ अच्छे गीतों को गाया जाएगा तो यह धूल झड़ जाएगी.'
जबकि निराला को उम्मीद की किरण तकनीक में दिखाई देती है. वह कहते हैं, ‘आज भी गांवों में हर तरह के लोक गीतों का खज़ाना बिखरा पड़ा है और अब सबके हाथ में मोबाइल भी है.’
अश्लीलता से कीचड़ से निकलने का रास्ता निराला यह बताते हैं, 'जब कोई समधुर पांरपरिक गीत कहीं भी सुनने को मिले तो उन्हें न सिर्फ रिकॉर्ड किया जाए बल्कि सोशल मीडिया और दूसरे डिजिटल माध्यमों के द्वारा उसे प्रचारित-प्रसारित भी किया जाए.'
शारदा सिन्हा की आशा और निराला का रास्ता भरोसा पैदा करता है. लेकिन आशावादी होते हुए भी भोजपुरी गीत-संगीत की वर्तमान स्थिति को देखते हुए फ़िलहाल इतना ही कहा जा सकता है कि भोजपुरी संगीत पर लगे दाग-धब्बों को धोने में अभी लंबा वक्त लगेगा.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi " platform="highweb"/></link>. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi " platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi " platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>












