जनता नहीं नेता दंगे कराते हैं: केजरीवाल

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- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
दिल्ली के मुख्यमंत्री का पद छोड़ने के बाद अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार शुरू कर दिया है. भ्रष्टाचार के मुद्दे के अलावा उनके एजेंडे में क्या- क्या है? अलग- अलग मुद्दों पर उनकी राय क्या है? बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद केजरीवाल से मिलने उनके घर गए.
किन मुद्दों पर आप आम चुनाव लड़ रहे हैं?
हमारा कोई मुद्दा नहीं है. जनता का मुद्दा है और जनता का मुद्दा आज भ्रष्टाचार ही है. जनता अब समझने लगी है कि उनकी महंगाई का, उनके दुःख का और उनके दर्द का सबसे बड़ा कारण भ्रष्टाचार है. यूपीए सरकार ने एक डॉलर की गैस को आठ डॉलर में बेच दिया. इसलिए अब बिजली महँगी हो जाएगी, खाद महंगा हो जाएगी जिससे खाने-पीने की चीज़ें महँगी हो जाएंगी. इसीलिए अब सीएनजी भी महँगी हो जाएगी. अब जनता को समझ में आ रहा है कि मंत्री ऊपर बैठकर जनता को लूट रहे हैं.
<documentLink href="/hindi/multimedia/2014/02/140224_kajriwal_zubair_iv_ml.shtml" document-type="audio"> अरविंद केजरीवाल के साथ ख़ास बातचीत </documentLink>
नरेंद्र मोदी 400 करोड़ रुपए विज्ञापन में ख़र्च कर रहे हैं, कहाँ से आ रहे हैं पैसे? निजी हवाई जहाज़ों और हेलिकॉप्टरों में घूम रहे हैं कहाँ से आ रहा है इतना पैसा? चाय बेचने वाले के पास इतने पैसे कहाँ से आ गए? उधर राहुल गांधी जी हैं जो हवाई जहाज़ों में घुमते हैं और रैलियों पर इतने ही पैसे खर्च करते हैं. पैसे आते कहाँ से हैं? इस देश को मुकेश अंबानी चलाते हैं, जीते जो भी कंट्रोल उन्हीं के पास है.

आपकी लड़ाई किसके ख़िलाफ़ है पार्टियों के या फिर व्यवस्था के?
मेरी लड़ाई व्यवस्था के ख़िलाफ़ है और भाजपा और कांग्रेस इस व्यवस्था का हिस्सा हैं. नरेंद्र मोदी जी कहते हैं कि वह इसी व्यवस्था को इस्तेमाल करके इस देश का विकास करेंगे. हम कहते हैं इस व्यवस्था के ज़रिए विकास हो ही नहीं सकता. आपको राजनीति बदलनी पड़ेगी. ईमानदार राजनीति लानी पड़ेगी. आपको पूरा सिस्टम बदलना पड़ेगा. जब तक ये नहीं होगा देश का विकास नहीं होगा. पहली बार इस देश के अंदर किसी ने हिम्मत की है अंबानी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज़ करने की. हमारी सरकार ने ये किया लेकिन हुआ क्या? एकदम से भाजपा और कांग्रेस वाले हमारे ऊपर चढ़ गए.
ये आपकी सियासत भी हो सकती है. लोग शायद इसी तरह से देख रहे हैं?
उसमें बहुत सारे फैक्ट्स हैं. और मान लीजिए ये सियासत है भी लेकिन दोनों पार्टियों को इतनी तकलीफ क्यों हो गई?

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भ्रष्टाचार के अलावा और भी मुद्दे हैं आम आदमी की ज़िन्दगी में. बेरोज़गारी है, सांप्रदायिकता है, जातिवाद है. इन मुद्दों पर आपकी राय अधितर लोगों को पता नहीं है?
गवर्नमेंट सेक्टर की नौकरियां बिकती हैं. एक-एक नौकरी के पैसे देने पड़ते हैं. लोग अपने गहने बेच देते हैं सरकारी नौकरियां हासिल करने के लिए. प्राइवेट सेक्टर में नौकरियां क्यों नहीं बढ़ रही है? क्योंकि प्राइवेट सेक्टर को बढ़ने ही नहीं दे रही है सरकार. अगर हम ने भ्रष्टाचार दूर कर दिया तो नौकरियां भी बढ़ेंगी. आपने सांप्रदायिकता की बात की. हिन्दू और मुसलमान इस देश में शांति से जीना चाहते हैं. सदियों से ये साथ रह हैं. कौन कराता है ये दंगे? जनता दंगे नहीं कराती है.
नेता दंगे कराते हैं. उनके ख़िलाफ़ कोई जांच नहीं होती. क्यों कराना चाहते हैं ये दंगे? क्योंकि एक मुसलमान को वोट बैंक बनाना चाहती है और एक हिंदुओं को. न इस पार्टी ने मुसलमानों के लिए कुछ किया न उस पार्टी ने हिंदुओं के लिए कुछ किया. वोट बैंक बनाकर सत्ता में आना चाहते है और सत्ता में आकर देश को लूटना चाहते हैं.
अगर मिली-जुली सरकार बनी तो 'आप' की भागेदारी होगी? किसको समर्थन देंगे?
गठबंधन तो नहीं करना है इनके साथ. भ्रष्टाचार दूर करने के लिए जो भी ज़िम्मेदारी उठानी पड़ेगी उससे पीछे नहीं हटेंगे.
कोई पद मिले तो इसे स्वीकार करेंगे?
बिल्कुल. हम मुख्यमंत्री तो थे ही. सीएम बनने में भी नहीं हिचके और छोड़ने में भी नहीं हिचके.जनलोकपाल: केजरीवाल और उप राज्यपाल में 'टकराव'

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आपकी लड़ाई भाजपा से है या कांग्रेस से या दोनों से?
हमारा मुख्य प्रतिद्वंदी भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता है. भाजपा, कांग्रेस और बाकी सारी पार्टियां इनका प्रतिनिधित्व करती हैं. अगर इन लोगों को सत्ता में आने के लिए एक हज़ार क़त्ल कराना पड़े तो मिनट नहीं लगेंगे इन्हें लोगों को मरवाने में.
ये जो आप बदलाव लाने की बात करते हैं इसके लिए आपको सियासी ताकत चाहिए. कितनी सीटें हासिल करने का लक्ष्य है आपका?
शक्ति जनता को चाहिए. परिवर्तन लाना एक लंबी प्रक्रिया होती है. ये एक यात्रा होती है जिसमें कई सारे पड़ाव होते हैं. अब ये वाला चुनाव कहाँ तक इस यात्रा को ले जाना चाहता है कह नहीं सकते.
लंबी लड़ाई है?
ये लंबी लड़ाई है.
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