क्यों रुके हुए हैं ये पहिए?

- Author, अदिति जैन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दिल्ली की एक आम सुबह जहाँ एक तरफ़ सड़कों पर चौपहिया वाहनों की मशक्कत दिखाई देती है वहीं दूसरी तरफ़ इन दो पहियों को सिर्फ़ सड़क का किनारा ही मिल पाता है.
और कभी कभी तो इन्हें किनारों से भी धकेल दिया जाता है. इन दो पहियों को मिलाकर बनती है आम आदमी की सवारी 'साइकिल'.
दिल्ली में कारों की बढ़ती संख्या और उनसे निकलता धुआँ वातावरण को प्रदूषित कर रहा है. ऐसे में साइकिल एक छोटी सी राहत है.
लेकिन साइकिल सवारों के लिए यहाँ ज़िन्दगी काफ़ी मुश्किल है.
दिल्ली साइक्लिंग क्लब के संयोजक नलिन सिन्हा का कहना है, “दिल्ली की सड़कें साइकिल चलाने वालों के लिए सुरक्षित नहीं हैं. यहाँ के कार चालक संवेदनशील नहीं हैं.”
उनका मानना है कि किसी भी सभ्य समाज में पैदल यात्री और साइकिल वालों को प्राथमिकता दी जाती है. लेकिन दिल्ली में ऐसा नहीं है. यहाँ लोगों का सोचना है कि साइकिल चलाना शान के ख़िलाफ़ है.
गरीबों की सवारी

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दिल्ली की वर्ग आधारित मानसिकता के हिसाब से साइकिल 'गरीबों की सवारी है'. इस मिथक को टूटने में वक़्त लगेगा.
दिल्ली की 8% जनता साइकिल का इस्तेमाल रोज़ अपने काम पर जाने के लिए करती है पर हॉलैंड के जैक लीनार्स ने दिल्ली में साइक्लिंग को ही अपना कारोबार बना लिया है.
इनके संगठन “दिल्ली बाइ साइकिल” की टूर गाइड अर्पिता कहती हैं कि जो हमारे समाज में चलता है वही हमारी सड़क पर भी चलता है. आपके पास जितनी बड़ी गाड़ी है उतनी ज़्यादा आपकी इज़्ज़त है. क्योंकि इज़्ज़त नहीं है इसलिए साइकिल वालों की सुरक्षा नहीं है.
और यही वजह है कि अर्पिता सिर्फ़ सुबह साइकिल चलाती हैं.
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरशन ने साल 2008 में 15 मेट्रो स्टेशनों पर साइकिल फ़ीडर सेवा शुरू की थी. आज ये एक स्टेशन दिल्ली विश्वविद्यालय पर सिमट कर रह गई है.
समर्पित साइकिल ट्रैक दिल्ली के बीआरटी कॉरिडोर और चंद सड़कों पर ही हैं.
संकरी सड़कें

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समर्पित साइकिल ट्रैक 60 फुट या उससे ज़्यादा चौड़ी सड़कों पर बनाया जा सकता है. दिल्ली नगर निगम के मुख्य इंजीनियर उमेश सचदेव ने बताया कि दिल्ली नगर निगम पास जो सड़कें हैं वो 60 फुट से संकरी हैं.
साल 1998 का बाइसाइकिल मास्टर प्लान कछुए की धीमी चाल चल रहा है या दौड़ में हार चुका है. ऐसा क्यों हुआ इसका जवाब भी किसी के पास नहीं है.
चीन, नार्वे, स्पेन, कोलंबिया, कनाडा और स्कैंडिनेवियाई देशों में साइकिल सवारों के पसंदीदा हैं.
बुनियादी ढांचों के अलावा नार्वे में बाइसाइकिल लिफ़्ट, स्पेन में बाइसाइकिल स्टेशन, और कनाडा में बिक्सी प्रोग्राम की सुविधाएँ हैं.
जिन दो पहियों ने हमें बचपन में पहली बार ख़ुद पर यकीन करना सिखाया था आज उन पर से हमारा विश्वास उठ गया है.
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