जान हथेली पर लेकर चलते हैं साइकिल सवार

- Author, एंड्र्यू नॉर्थ
- पदनाम, दक्षिण एशिया संवाददाता
दक्षिणी दिल्ली में माली की नौकरी करने वाले सुशील कुमार पिछले 20 वर्षों से साइकिल से ही अपनी नौकरी पर आते-जाते हैं.
प्रतिदिन दो घंटे की उनकी यात्रा के दौरान कई बार दुघर्टना घटी लेकिन सौभाग्य से उन्हें मामूली चोटें ही आईं.
लेकिन साइकिल से चलने वाले उनके एक दोस्त को हाल ही में ट्रक ने एक मोड़ पर टक्कर मार दी और उन्हें अस्पताल पहुंचाना पड़ा.
प्रतिष्ठित जर्नल <link type="page"><caption> 'दुर्घटना सांख्यिकी विश्लेषण'</caption><url href="http://tripp.iitd.ernet.in/DM_UMTRI-2009-1[1].o.pdf" platform="highweb"/></link> के अनुसार, दिल्ली की सड़कों पर हर दिन औसतन तीन साइकिल सवार दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं.
यह आंकड़ा शहरी सड़कों पर होने वाली कुल मौतों का आधा है और विशेषज्ञों की इस चेतावनी को पुष्ट करता है कि राजधानी की सड़कों पर बढ़ता यातायात का बोझ एक संकट बन गया है.
आपात स्थिति
'सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरोंमेंट' (सीएसई) से जुड़ी अनोमिता रायचौधरी का कहना है, ''यदि सड़कों पर इतनी सारी मौतें हो रही हैं तो यह राज्य के लिए एक आपात स्थिति है.''
मुंबई की तरह ही अन्य शहरों के भी आंकड़े इतने ही डरावने हैं.
<link type="page"><caption> सीएसई</caption><url href="http://www.cseindia.org/content/one-third-delhi-walks-work-are-our-roads-designed-safe-walking-and-cycling-latest-cse-survey" platform="highweb"/></link> के अनुसार, जब भी <link type="page"><caption> यातायात नीति</caption><url href="http://www.downtoearth.org.in/content/dangers-letting-cars-dictate-city-design" platform="highweb"/></link> की बात आती है तो कार को प्राथमिकता दी जाती है जबकि सड़कों पर रोजाना चलने वाले साइकिल सवार एवं पैदल यात्रियों की कुल संख्या इससे तीन गुनी अधिक है.
कोलकाता में तो प्रशासन इससे भी एक कदम आगे बढ़ गया है. यहां यातायात जाम को कम करने के नाम पर कई सड़कें साइकिल सवारों के लिए प्रतिबंधित कर दी गई हैं.
साइकिल लेन

दिल्ली में लाखों लोग रोजाना अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल करते हैं, इसके बावजूद साइकिल सवारों के लिए निर्धारित लेन वाली सड़कों की संख्या अंगुलियों पर गिनी जा सकती है.
दिल्ली में सड़कों पर अनियंत्रित बसों, कारों, रिक्शा और आराम से घूमती गायों का सिलसिला, एक आम दृश्य है.
और इस दृश्य में साइकिल सवार और पैदल यात्रियों के लिए कितनी जगह बचती है, इसकी कल्पना की जा सकती है.
खतरनाक सड़कें
कुमार कहते हैं, ''साइकिल चलाना पहले से ज्यादा ख़तरनाक हो गया है. कारें पहले कहीं ज्यादा हो गई हैं और उनकी रफ्तार भी. जब भी मुझे घर पहुंचने में देर होती है घर वाले चिंतित हो जाते हैं.''
सड़क पर चलते समय आपको लगातार पीछे भी ध्यान रखना पड़ता है ताकि कोई बस पीछे से आकर आपको रौंद न दे.
हाल ही में सीएसई की प्रमुख सुनीता नारायण के साथ हुई दुर्घटना के कारण साइकिल सवार सुर्खियां में आ गए.
सुबह साइकिल चलाते हुए उन्हें एक कार ने वाले ने टक्कर मार दी, उसके बाद वो फरार हो गया. उन्हें काफी गंभीर चोटें आईं और वह अभी भी अस्पताल में हैं.
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