कोलकाता में नहीं चलेंगी साइकिल

- Author, राहुल टंडन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़़, कोलकाता
जब दुनिया के दूसरे शहर साइकिल की सवारी को बढ़ावा दे रहे हैं तो भारत के मशहूर शहर कोलकाता में साइकिल चलाने पर पाबंदी लगाई जा रही है.
कोलकाता में अभी भी लाखों लोग <link type="page"><caption> साइकिल</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/06/130609_mexico_naked_cyclist_sp.shtml" platform="highweb"/></link> की सवारी करते हैं. यह भारत का एकमात्र ऐसा महानगर है जहाँ आम लोग कार से ज्यादा साइकिल से सफ़र करते हैं.
एक चौंकाने वाले फ़ैसले के तहत कोलकाता ट्रैफ़िक पुलिस ने कोलकाता की 174 प्रमुख सड़कों एवं गलियों में दिन में साइकिल, हाथरिक्शा और बिना मोटर के चलने वाले परिवहन साधनों पर पाबंदी लगा दी है.
राजू सपुई पेशे से ड्राइवर हैं लेकिन ढेर सारे कोलकातावासियों की तरह उनके पास भी कार नहीं है. वो <link type="page"><caption> साइकिल</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/06/130529_man_cycles_100miles_pk.shtml" platform="highweb"/></link> से ही रोज़ अपने काम पर जाते हैं. राजू के पास कार या मोटरसाइकिल ख़रीदने के पैसे नहीं हैं.
साइकिल पर पाबंदी लगने के बाद उनके लिए जीवन पहले से कठिन हो गया है.
राजू कहते हैं, "यह फ़ैसला मेरी ज़िंदगी को मुश्किल बना देगा. जब भी मैं साइकलि पर बैठता हूँ तो डर लगता है कि मुझ पर जुर्माना लग जाएगा क्योंकि काम के सिलसिले में मुझे कई ऐसी सड़कों पर जाना होता है जिन पर साइकिल चलाने की पाबंदी लगी है."
नए फ़ैसले के बाद इस तरह की मुश्किल से दो-चार होने वाले राहुल अकेले नहीं हैं.
ट्रैफ़िक की रफ़्तार

कोलकाता पुलिस के अनुसार इस निर्णय के पीछे ट्रैफ़िक का बढ़ता दबाव था.
यह सही है कि कोलकाता में दूसरे महानगरों के मुक़ाबले कारों की संख्या सबसे कम है लेकिन यहाँ की सड़कें और गलियाँ इतनी पतली हैं कि कोलकाता में विभिन्न तरह के वाहनों को संभालना मुश्किल हो जाता है.
कोलकाता की सड़कों पर कारों, साइकिलों, बसें, ऑटोरिक्शा, मोटरसाइकिलें, हाथरिक्शा, साइकिल रिक्शा, ट्राम इत्यादि के बीच जगह पाने के लिए एक होड़ सी लगी रहती है.
कोलकाता ट्रैफ़िक पुलिस के डिप्टी कमिश्नर दिलीप कुमार अदक कहते हैं, "कोलकाता की सड़कों पर हर तरह के वाहन के लिए पर्याप्त जगह नहीं है. साइकिलों से ट्रैफ़िक की रफ़्तार कम हो जाती है. उन्हें हटाने से ट्रैफ़िक की रफ़्तार बढ़ेगी और यातायात पहले से ज़्यादा सुरक्षित होगा."
कोलकाता में ट्रैफ़िक की औसत रफ़्तार 14-18 किलोमीटर प्रतिघंटा है जबकि भारत की औसत ट्रैफ़िक रफ़्तार 22 किमी प्रतिघंटा है.
अदक कहते हैं, "सभी सड़कों पर साइकिल चलाने पर पाबंदी नहीं लगी है. छोटी सड़कों पर लोग अभी भी साइकिल चला सकते हैं."
साइकिल सत्याग्रह
कोलकाता ट्रैफ़िक पुलिस के इस निर्णय के ख़िलाफ़ लोगों का विरोध करना स्वाभाविक ही है.
साइकिल चालकों के कई समूहों ने इस निर्णय का विरोध करना शुरू कर दिया है.

ये समूह अपने विरोध को 'साइकिल-सत्याग्रह' कह रहे हैं. ये समूह इस फ़ैसले के विरोध में शहर में साइकिल चलाकर विरोध करते हैं.
ऐसे ही एक समूह 'राइड टू ब्रीद' से जुड़े गौतम श्राफ़ कहते हैं, "ये पागलपन भरा नियम है."
गौतम का मानना है कि "प्रदूषण दिन-रात बढ़ रहा है तो लोगों को साइकिल चलाने के लिए प्रेरित करना चाहिए जबकि हम साइकिल चलाने वालों को पर्यावरण सुधार में मदद करने के लिए प्रताड़ित कर रहे हैं."
गौतम पुलिस के इस दावे को "वाहियात" बताते हैं कि नए नियम से सड़कें पहले से सुरक्षित हो जाएँगी.
ट्रैफ़िक पुलिस के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए गौतम कहते हैं, "अगर <link type="page"><caption> साइकिल</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130808_turkmenistan_president_cycle_race_vr.shtml" platform="highweb"/></link> वाले समस्या हैं तो पैदल चलने वाले, मोटरसाइकिल वाले, कार वाले भी समस्या हैं. सरकार उन्हें सड़क से क्यों नहीं हटाती. ?"
गौतम श्राफ़ के लिए साइकिल चलाना एक शौक़िया शग़ल है लेकिन शहर के कई दूसरे लोगों के लिए यह यातायात का एकमात्र साधन है.
पुलिस ने कोलकाता की प्रमुख सड़कों पर साइकिल चलाने वालों पर जुर्माना लगाना भी शुरू कर दिया है. जो लोग बार-बार इस नए आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं उन्हें चेतावनी दी गई है कि न मानने पर उनकी साइकिल ज़ब्त कर ली जाएगी.
लेकिन इसके बावजूद अभी भी कोलकाता की प्रमुख सड़कों पर राजू सपुई जैसे कई लोग साइकिल से आते-जाते दिख जाएँगे.
जैसा कि राजू सपुई कहते हैं, "मैं तब तक साइकिल चलाता रहूँगा जब तक कि पुलिस वाले मेरी साइकिल ज़ब्त नहीं कर लेते. अगर वो चाहते हैं कि मैं साइकिल चलाना बंद कर दूँ तो वो चाहें तो मेरे लिए कार ख़रीद सकते हैं."
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