'ये शख़्स रोजाना 161 कि.मी. साइकिल चलाता है'

स्टीव हैमिल्टन हर रोज करीब 80 से 100 मील साइकिल चलाते हैं. आपको यकीन नहीं हुआ ना. लेकिन ये स्टीव हैमिल्टन की ज़िंदगी की हकीकत है.

सेंट्रल लंदन की बेहद व्यस्त सड़कों के बीच साइकलिंग करना स्टीव हैमिल्टन का पेशा है. वे कूरियर पहुंचाने का काम करते हैं.

कूरियर पहुंचाने के इस काम के दौरान वे हर रोज करीब सौ मील साइकलिंग कर लेते हैं. यानि साल में वे 22 हजार मील की दूरी साइकिल से तय करते हैं.

स्टीव कहते हैं, “मुझे एडवेंचर में आनंद आता है. मैं तो दो बसों के बीच से साइकिल निकालने को या फिर तेज़ी से किसी मोड़ पर निकलने में एडवेंचर महसूस करता हूं.”

हालांकि ये कोई आसान काम नहीं है. लंदन की सड़कों पर स्टीव को हर पल चौकन्ना रहना होता है. एक चूक उन्हें जानलेवा दुर्घटना का शिकार बना सकती है.

<link type="page"><caption> (साइकिल चलाइए, स्वस्थ रहिए)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/08/120802_cycling_health_ia.shtml" platform="highweb"/></link>

हर पल मौत की आहट

स्टीव कहते हैं, “कई बार तो लगता है, बस अब काम से गए.”

पिछले कुछ समय में लंदन में नौ साइकिल से कूरियर पहुंचाने वाले लोगों की मौत हो चुकी है.

इनमें स्टीव के एक करीबी मित्र भी शामिल हैं. उनकी याद करते हुए स्टीव ने बीबीसी न्यूज़ को बताया, “मैं ने तब कूरियर का काम शुरू ही किया था. वो काफी फ्रेंडली था, बिशप गेट के पास दुर्घटना में उसकी मौत हुई थी.”

ऐसा एक हादसा स्टीव के साथ भी होते होते बचा है. उसे याद करते हुए स्टीव कहते हैं, “एक लाल रंग की वैन थी. किसी तरह से उसके ड्राइवर ने गाड़ी दूसरी तरफ मोड़ ली नहीं तो दुर्घटना निश्चित थी.”

स्टीव तो ये मानने लगे हैं कि साइकिल से कूरियर पहुंचाने वाले लोगों में सिक्सथ सेंस जैसी कोई चीज होती है, जो उन्हें सेंट्रल लंदन के भीड़ भाड़ वाले इलाकों में दुर्घटनाओं से बचाती रहती है.

वैसे हम आपको पता दें कि इन विषम परिस्थितियों को सामना अकेले स्टीव हैमिल्टन ही नहीं कर रहे हैं. बल्कि सेंट्रल लंदन में उनके जैसे 500 दूसरे लोग भी कूरियर पहुंचाने का काम साइकिल के जरिए करते हैं.

ऐसे लोगों के लिए सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि ऐसे लोग असंगठित तौर पर काम करते हैं. ज़्यादातर कूरियर पहुंचाने वाले अकेले काम करते हैं.

ऐसे में बीमार होने पर इनकी मजदूरी मारी जाती है और इनका कोई जीवन बीमा भी नहीं होता है. जिस दिन काम करते हैं, उस दिन आमदनी होती है.

<link type="page"><caption> (साइकिल पर अंग्रेज़ी की क्लास)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2011/03/110308_cycle_english_va.shtml" platform="highweb"/></link>

पेट का सवाल है

यही वजह है कि स्टीव पिछले डेढ़ सालों से हर वीक डेज़ पर काम करते हैं. उनकी मेहनत का नतीजा है कि उन्हें साल 2012 का कूरियर ऑफ़ द ईयर से सम्मानित किया गया.

स्टीव हर रोज 20 से 30 कूरियर को उसके गंतव्य तक पहुंचाते हैं. वे कहते हैं, “कई सामान ऐसे होते हैं, जिन्हें आप इंटरनेट से नहीं भेज सकते. कूरियर पहुंचाने वालों की जरूरत तो रहेगी ही.”

बहरहाल, इतनी मेहनत के बावजूद स्टीव हैमिल्टन की आमदनी निश्चित नहीं है. वे हर सप्ताह 200 से 600 पाउंड के बीच में कुछ कमा लेते हैं.

स्टीव हैमिल्टन 49 साल के हैं. लेकिन वे थके नहीं हैं. वे कहते हैं कुछ कमाने के लिए काम तो करना ही होगा.

स्टीव के मुताबिक साइकलिंग करने के काम उन्हें अब काफी कुछ फन जैसा महसूस होने लगा है.

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