महाराष्ट्र: राज ठाकरे हिरासत से रिहा

राज ठाकरे

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महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे को हिरासत से रिहा कर दिया गया है.

राज ठाकरे को सुबह टोल टैक्स के विरोध में प्रदर्शन करने लिए वाशी नाका जाते समय हिरासत में लिया गया था.

महाराष्ट्र में टोल टैक्स के विरोध में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना या मनसे ने राज्यव्यापी 'रास्ता रोको' अभियान बुधवार से शुरू किया.

ठाकरे ने कुछ दिन पहले समर्थकों से उस फ़ीस का विरोध करने के लिए कहा था जो सड़क के इस्तेमाल के लिए ली जाती है.

ठाकरे के समर्थकों ने राज्य में जगह जगह सड़कों पर यातायात को रोक दिया था.

पुलिस ने राज ठाकरे को मंगलवार को एक नोटिस जारी कर किसी भी ऐसी गतिविधि से दूर रहने को कहा था जिससे क़ानून व्यवस्था की समस्या पैदा हो.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा कि राज ठाकरे को भारतीय दंड संहिता 1973 की धारा 149 के तहत नोटिस जारी किया गया.

ठाकरे के ख़िलाफ़ कुछ दिन पहले विभिन्न राजमार्गों पर स्थित टोल नाकों पर तोडफोड़ के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं को भड़काने के कई मामले दर्ज किए गए हैं.

मनसे प्रमुख ने पुणे में रविवार को एक जनसभा में कहा था कि जब तक सरकार टोल संग्रह को ‘पारदर्शी’ नहीं बनाती तब तक वह आंदोलन जारी रखेंगे.

नोटिस

मनसे के प्रदर्शन के देखते हुए राज्य में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक़ ऐहतियात के तौर पर मुंबई के पुलिस स्टेशनों ने सोमवार से ही मनसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को नोटिस देने शुरू कर दिए थे.

नोटिस में कहा गया है कि अगर मनसे कार्यकर्ता किसी अवैध गतिविधि में लिप्त पाए जाते हैं तो उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.

इससे पहले ठाकरे ने 26 जनवरी को नवी मुंबई में आयोजित पार्टी के एक कार्यक्रम में लोगों से कहा था कि किसी भी हालत में टोल टैक्स का भुगतान न करें चाहे इसके लिए उन्हें हिंसा ही क्यों न करनी पड़े.

तोड़फोड़

इसके बाद पूरे राज्य में मनसे कार्यकर्ताओं ने कथित रूप से टोल बूथों पर तोड़फोड़ की.

पुणे की जनसभा में ठाकरे ने कहा था कि टोल बंद करने की मांग को लेकर बुधवार से पूरे राज्य में रास्ता रोको अभियान शुरू किया जाएगा.

साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर उसमें हिम्मत है तो उन्हें गिरफ़्तार करे.

इसके बाद पुलिस ने मनसे के उन कार्यकर्ताओं को नोटिस देना शुरू कर दिया जो विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रहे हैं और जिसकी वजह से क़ानून व्यवस्था की समस्या पैदा हुई थी.

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