'महारानी' की सियासत, सादगी और किफ़ायत

राजस्थान सरकार पर भी दिल्ली में आम आदमी पार्टी के सादगी भरे फैसलों का 'असर' दिखाई दे रहा है.
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को भले महारानी कहा जाता हो, लेकिन अब उन्होंने सादगी और किफ़ायत की सियासत करने का फ़ैसला किया है.
दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने अपनी सुरक्षा को आधा कर दिया है. वे जब सफ़र पर निकलती हैं या राजधानी जयपुर में कहीं जाती हैं, तो कारों का लंबा-चौड़ा काफ़िला उनके साथ नहीं होता.
उन्होंने अपने पुराने बंगले में रहने और आठ सिविल लाइंस स्थित मुख्यमंत्रीआवास न जाने का फ़ैसला किया है. उन्होंने मंत्रियों और अफ़सरों को भी सादगी पेश करने को कहा है.
हालांकि, राज्य सरकार इन फ़ैसलों के लिए दिल्ली में 'आप' सरकार के निर्णयों को ज़िम्मेदार नहीं मानती.
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र सिंह राठौर का कहना है, ''ये फ़ैसले 'आप' से प्रभावित नहीं हैं बल्कि 'आप' हमारी सरकार से प्रभावित है. हम शुरू से ही सादगी का परिचय दे रहे हैं.''
पंचसितारा कार्यक्रम नहीं
राज्य सरकार के एक प्रवक्ता का कहना है कि मुख्यमंत्री की पहल पर अब सभी मंत्री सादगी का परिचय देते हुए काम करेंगे. मंत्रियों के काफ़िले में पुलिस सुरक्षा वाहन के अलावा दो से अधिक वाहन नहीं होंगे.
सरकारी कार्यक्रमों का आयोजन पांच सितारा होटलों में नहीं होगा. मंत्री सरकारी कार्यक्रमों में किसी भी सामूहिक भोज का आर्थिक बोझ सरकार पर नहीं डालेंगे. वे अभिनंदन और सामूहिक गोष्ठी जैसे कार्यक्रमों में कम से कम ख़र्च करेंगे.
राजधानी जयपुर में बुधवार और गुरुवार को कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस के दौरान यह फ़ैसला लिया गया, तो मंत्रियों ने ख़ुद एक पत्र पर हस्ताक्षर करके मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि वे अब सादगी से रहेंगे.
उधर, के इन फ़ैसलों के बाद जोधपुर स्थितराजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अमिताभ राय ने सुरक्षा दस्ता हटाने का फ़ैसला किया है.
राज्य सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार द्वारा विधायकों को दी गई गनमैन की सुविधा भी ख़त्म करने का फ़ैसला लिया है.
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा, ''मुख्यमंत्री आम आदमी के अंदाज़ में सादगी का परिचय दे रही हैं. वे पद संभालने के साथ ही ट्रैफ़िक सिग्नल पर रुकने, अपना काफ़िला कम करने, सरकारी विमान की जगह नियमित उड़ान से यात्रा करने, सुरक्षा दस्ता आधा करने, सरकारी वाहन की जगह निजी वाहन का उपयोग करने और मुख्यमंत्री आवास के स्थान पर छोटे सरकारी आवास में रहने जैसे निर्णय ले चुकी हैं."
फ़ैसले का स्वागत

उन्होंने आगे बताया, "मुख्यमंत्री से प्रेरणा लेकर सभी मंत्रियों ने भी अब सरकारी ख़र्च में कटौती करने का महत्वपूर्ण फ़ैसला किया है.''
गहलोत भी कह चुके हैं कि वसुंधरा अपने पुराने अनुभव को देखते हुए सादगी अपनाती हैं, तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए.
मगर कांग्रेस प्रवक्ता डॉक्टर अर्चना शर्मा ने इस पर सवाल उठाए और कहा कि सादगी का यह प्रपंच लोकसभा चुनाव देखते हुए मतदाताओं को भ्रमित करने के लिए है.
अगर सादगी ही इनका लक्ष्य था, तो वसुंधरा राजे ने विधानसभा परिसर में इतना बड़ा समारोह क्यों किया जबकि आज तक राजभवन में ही मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण करते रहे हैं.
सादगी का पालन
इस पर भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष सुमन शर्मा कहती हैं कि कांग्रेस को इस समय सही फ़ैसले ग़लत और ग़लत फ़ैसले सही लग रहे हैं. इसलिए वह सादगी की आलोचना करती है.
राज्य के मुख्य सचिव राजीव महर्षि ने अधिकारियों से कहा है कि वे दो गाड़ियां न रखें. सरकारी कारों का निजी कामों में इस्तेमाल न करें. अधिकारी अपने सरकारी आवास पर सरकारी चौकीदार नहीं रखें.
मुख्य सचिव ने ज़िला कलेक्टरों से कहा है कि वे बेसहारा बच्चों को चिह्नित कर उनकी शिक्षा और पालन-पोषण की व्यवस्था करें.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर </caption><url href="https://twitter.com/bbchindi" platform="highweb"/></link>पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>












